3 अगस्त 2026
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प्रांजल दहिया ने उज्जैन में किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल

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प्रांजल दहिया ने उज्जैन में किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल

सारांश

हरियाणवी सिंगर प्रांजल दहिया दूसरी बार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुँचीं और भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दिन महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया था। दहिया ने कहा कि यहाँ आकर उन्हें एक अलग सकारात्मक ऊर्जा और मन की शांति मिलती है।

मुख्य बातें

हरियाणवी सिंगर प्रांजल दहिया ने 17 जून 2026 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में भाग लिया।
यह उनकी इस मंदिर की दूसरी यात्रा थी; मंदिर समिति ने उनका विशेष सम्मान किया।
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया था।
दहिया ने कहा — 'मुझे यहाँ बहुत सकारात्मकता मिलती है, बस बाबा मुझे हमेशा ऐसे ही बुलाते रहें।' महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।

हरियाणवी सिंगर प्रांजल दहिया ने 17 जून 2026 को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भाग लिया। यह उनकी इस मंदिर की दूसरी यात्रा थी, जिसमें उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति की ओर से उनका विशेष सम्मान भी किया गया।

भस्म आरती का विशेष आयोजन

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर बुधवार को महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। भस्म आरती इस मंदिर की सबसे विशिष्ट और विश्व-विख्यात परंपरा मानी जाती है, जिसमें तड़के सुबह बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर भस्म से आरती की जाती है। इस दिव्य अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चारण, दीपों की रोशनी और शंख-घंटों की ध्वनि एक अलौकिक वातावरण का निर्माण करती है।

गणेश स्वरूप में हुआ महाकाल का श्रृंगार

बुधवार की भस्म आरती विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि इस दिन भगवान महाकाल को भगवान गणेश के स्वरूप में सजाया गया था। इस दिव्य श्रृंगार ने मंदिर में उपस्थित सभी भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। पूरा परिसर 'हर हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।

प्रांजल दहिया का अनुभव

भस्म आरती के बाद प्रांजल दहिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'जय महाकाल। मुझे बहुत सौभाग्यशाली और खुश महसूस हुआ। आज मैं दूसरी बार यहां आई हूं और जब भी मैं यहां आती हूं, तो बहुत खुशी लेकर जाती हूं। मुझे यहां बहुत सकारात्मकता मिलती है। बस बाबा मुझे हमेशा ऐसे ही बुलाते रहें। सभी लोग यहां आएं, खुश रहें और मुस्कुराते रहें।' उनके अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर में आकर मन को एक अनूठी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

महाकालेश्वर मंदिर की आध्यात्मिक विरासत

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की गहराई को भी दर्शाता है। प्रतिदिन देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु यहाँ भस्म आरती के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस खबर का असली महत्व महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती परंपरा की वैश्विक पहुँच में है — जो अब मनोरंजन जगत की हस्तियों को भी आकर्षित कर रही है। यह उज्जैन के धार्मिक पर्यटन की बढ़ती साख को रेखांकित करता है, जिसे महाकाल लोक कॉरिडोर के निर्माण के बाद और बल मिला है। सेलेब्रिटी दर्शन सामान्य श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का काम करते हैं, हालाँकि मंदिर प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन एक सतत चुनौती बनी रहती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रांजल दहिया कौन हैं और वे उज्जैन क्यों गईं?
प्रांजल दहिया एक लोकप्रिय हरियाणवी सिंगर हैं। वे 17 जून 2026 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में भाग लेने के लिए पहुँचीं। यह उनकी इस मंदिर की दूसरी यात्रा थी।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की सबसे विशिष्ट और विश्व-विख्यात परंपरा है, जिसमें तड़के सुबह बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर भस्म से आरती की जाती है। यह अनुष्ठान मंत्रोच्चारण, दीपों और शंख-घंटों की ध्वनि के साथ एक दिव्य वातावरण का निर्माण करता है।
17 जून की भस्म आरती विशेष क्यों थी?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर इस दिन भगवान महाकाल को भगवान गणेश के स्वरूप में सजाया गया था। इस दिव्य श्रृंगार ने उपस्थित भक्तों को भाव-विभोर कर दिया और पूरा परिसर 'हर हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा।
प्रांजल दहिया ने महाकाल मंदिर के बारे में क्या कहा?
प्रांजल दहिया ने कहा कि उन्हें महाकालेश्वर मंदिर में आकर बहुत सकारात्मक ऊर्जा और खुशी मिलती है। उन्होंने सभी लोगों से यहाँ आने और खुश रहने की अपील की।
महाकालेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है और यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर भारतीय धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक विरासत का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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