प्रांजल दहिया ने उज्जैन में किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणवी सिंगर प्रांजल दहिया ने 17 जून 2026 को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भाग लिया। यह उनकी इस मंदिर की दूसरी यात्रा थी, जिसमें उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति की ओर से उनका विशेष सम्मान भी किया गया।
भस्म आरती का विशेष आयोजन
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर बुधवार को महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। भस्म आरती इस मंदिर की सबसे विशिष्ट और विश्व-विख्यात परंपरा मानी जाती है, जिसमें तड़के सुबह बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर भस्म से आरती की जाती है। इस दिव्य अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चारण, दीपों की रोशनी और शंख-घंटों की ध्वनि एक अलौकिक वातावरण का निर्माण करती है।
गणेश स्वरूप में हुआ महाकाल का श्रृंगार
बुधवार की भस्म आरती विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि इस दिन भगवान महाकाल को भगवान गणेश के स्वरूप में सजाया गया था। इस दिव्य श्रृंगार ने मंदिर में उपस्थित सभी भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। पूरा परिसर 'हर हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।
प्रांजल दहिया का अनुभव
भस्म आरती के बाद प्रांजल दहिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'जय महाकाल। मुझे बहुत सौभाग्यशाली और खुश महसूस हुआ। आज मैं दूसरी बार यहां आई हूं और जब भी मैं यहां आती हूं, तो बहुत खुशी लेकर जाती हूं। मुझे यहां बहुत सकारात्मकता मिलती है। बस बाबा मुझे हमेशा ऐसे ही बुलाते रहें। सभी लोग यहां आएं, खुश रहें और मुस्कुराते रहें।' उनके अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर में आकर मन को एक अनूठी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
महाकालेश्वर मंदिर की आध्यात्मिक विरासत
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की गहराई को भी दर्शाता है। प्रतिदिन देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु यहाँ भस्म आरती के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।