चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून बारिश ने तोड़ा तीन साल का रिकॉर्ड, जून के 15 दिनों में 88 मिमी बरसात
सारांश
मुख्य बातें
चित्तौड़गढ़ ज़िले में जून 2026 के पहले 15 दिनों में 88 मिलीमीटर प्री-मानसून बारिश दर्ज की गई है — जो पिछले तीन वर्षों की इसी अवधि के मुकाबले सर्वाधिक है। यह आँकड़ा राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन से पहले का है, और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य प्री-मानसून सीज़न के लिहाज़ से यह असामान्य रूप से भारी बारिश है।
चार साल के आँकड़ों में कहाँ खड़ा है 2026
पिछले चार वर्षों के मौसम संबंधी आँकड़े इस साल की बारिश का महत्व स्पष्ट करते हैं। जून 2025 में पूरे महीने 75 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस साल केवल पहले पखवाड़े में ही उससे अधिक बरसात हो चुकी है। जून 2024 में कुल 91.2 मिमी बारिश दर्ज हुई थी — इस साल का आँकड़ा उसके भी करीब पहुँच गया है।
हालाँकि, जून 2023 में चक्रवात बिपरजॉय के कारण असाधारण रूप से भारी बारिश हुई थी, जिससे इस साल का आँकड़ा उस वर्ष से थोड़ा पीछे है। फिर भी मौसम विशेषज्ञ मौजूदा पैटर्न को सामान्य प्री-मानसून सीज़न के हिसाब से बेहद असामान्य मानते हैं।
नौतपा की चेतावनियाँ गलत साबित हुईं
नौतपा के दौरान पड़ी भीषण गर्मी के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि मानसून कमज़ोर रहेगा। लेकिन चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में हुई असामान्य प्री-मानसून बारिश ने इन अनुमानों को गलत साबित किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 22 जून से 25 जून के बीच चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में पहुँचने की संभावना है। यदि मौजूदा मौसमी रुझान बना रहा, तो जून 2026 हाल के वर्षों में सर्वाधिक बारिश वाले महीनों में शुमार हो सकता है।
अल-नीनो की चेतावनी: खुशी अधूरी
IMD जयपुर के निदेशक डॉ. आर.एस. शर्मा के अनुसार, सक्रिय अल-नीनो की स्थिति मुख्य मानसून महीनों के दौरान बारिश को कम कर सकती है। उनके अनुसार इस घटनाक्रम में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं को कमज़ोर करने और मौसमी वर्षा को घटाने की क्षमता है।
अनुमान है कि इस साल मानसून की कुल बारिश दीर्घकालीन औसत का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है — जिससे यह प्री-मानसून की जोरदार शुरुआत के बावजूद 'सामान्य से कम' बारिश की श्रेणी में आ सकती है।
अल-नीनो क्या है और भारत पर इसका असर
अल-नीनो एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है — आमतौर पर मानसून कमज़ोर होता है, वर्षा सामान्य से कम होती है और सूखे की आशंका बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल तट पर पहुँच चुका है और प्रायद्वीपीय तथा पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
आगे क्या
मेवाड़ क्षेत्र के किसानों और जल प्रबंधन अधिकारियों के लिए यह शुरुआती बारिश राहत की खबर है, लेकिन मौसम वैज्ञानिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए खरीफ फसल की बुवाई से पहले जुलाई-अगस्त की बारिश का रुझान निर्णायक साबित होगा।