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चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून बारिश ने तोड़ा तीन साल का रिकॉर्ड, जून के 15 दिनों में 88 मिमी बरसात

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चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून बारिश ने तोड़ा तीन साल का रिकॉर्ड, जून के 15 दिनों में 88 मिमी बरसात

सारांश

मानसून के आने से पहले ही चित्तौड़गढ़ में 88 मिमी बारिश — तीन साल का रिकॉर्ड ध्वस्त। लेकिन IMD की चेतावनी है कि अल-नीनो की सक्रियता मुख्य मानसून सीज़न में बारिश को दीर्घकालीन औसत के 90% तक सीमित कर सकती है। शानदार शुरुआत, अनिश्चित अंत।

मुख्य बातें

चित्तौड़गढ़ में जून 2026 के पहले 15 दिनों में 88 मिमी प्री-मानसून बारिश दर्ज — पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड टूटा।
जून 2025 के पूरे महीने ( 75 मिमी ) से अधिक बारिश केवल पखवाड़े में; जून 2024 की कुल बारिश ( 91.2 मिमी ) के करीब।
IMD के अनुसार मानसून 22-25 जून के बीच चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ पहुँचने की संभावना।
IMD जयपुर के निदेशक डॉ.
शर्मा ने चेताया — अल-नीनो के कारण कुल मानसून वर्षा दीर्घकालीन औसत के 90% तक सिमट सकती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल तट पर पहुँच चुका है और प्रायद्वीपीय व पूर्वी भारत में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

चित्तौड़गढ़ ज़िले में जून 2026 के पहले 15 दिनों में 88 मिलीमीटर प्री-मानसून बारिश दर्ज की गई है — जो पिछले तीन वर्षों की इसी अवधि के मुकाबले सर्वाधिक है। यह आँकड़ा राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन से पहले का है, और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य प्री-मानसून सीज़न के लिहाज़ से यह असामान्य रूप से भारी बारिश है।

चार साल के आँकड़ों में कहाँ खड़ा है 2026

पिछले चार वर्षों के मौसम संबंधी आँकड़े इस साल की बारिश का महत्व स्पष्ट करते हैं। जून 2025 में पूरे महीने 75 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस साल केवल पहले पखवाड़े में ही उससे अधिक बरसात हो चुकी है। जून 2024 में कुल 91.2 मिमी बारिश दर्ज हुई थी — इस साल का आँकड़ा उसके भी करीब पहुँच गया है।

हालाँकि, जून 2023 में चक्रवात बिपरजॉय के कारण असाधारण रूप से भारी बारिश हुई थी, जिससे इस साल का आँकड़ा उस वर्ष से थोड़ा पीछे है। फिर भी मौसम विशेषज्ञ मौजूदा पैटर्न को सामान्य प्री-मानसून सीज़न के हिसाब से बेहद असामान्य मानते हैं।

नौतपा की चेतावनियाँ गलत साबित हुईं

नौतपा के दौरान पड़ी भीषण गर्मी के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि मानसून कमज़ोर रहेगा। लेकिन चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में हुई असामान्य प्री-मानसून बारिश ने इन अनुमानों को गलत साबित किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 22 जून से 25 जून के बीच चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में पहुँचने की संभावना है। यदि मौजूदा मौसमी रुझान बना रहा, तो जून 2026 हाल के वर्षों में सर्वाधिक बारिश वाले महीनों में शुमार हो सकता है।

अल-नीनो की चेतावनी: खुशी अधूरी

IMD जयपुर के निदेशक डॉ. आर.एस. शर्मा के अनुसार, सक्रिय अल-नीनो की स्थिति मुख्य मानसून महीनों के दौरान बारिश को कम कर सकती है। उनके अनुसार इस घटनाक्रम में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं को कमज़ोर करने और मौसमी वर्षा को घटाने की क्षमता है।

अनुमान है कि इस साल मानसून की कुल बारिश दीर्घकालीन औसत का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है — जिससे यह प्री-मानसून की जोरदार शुरुआत के बावजूद 'सामान्य से कम' बारिश की श्रेणी में आ सकती है।

अल-नीनो क्या है और भारत पर इसका असर

अल-नीनो एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है — आमतौर पर मानसून कमज़ोर होता है, वर्षा सामान्य से कम होती है और सूखे की आशंका बढ़ जाती है।

गौरतलब है कि IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल तट पर पहुँच चुका है और प्रायद्वीपीय तथा पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

आगे क्या

मेवाड़ क्षेत्र के किसानों और जल प्रबंधन अधिकारियों के लिए यह शुरुआती बारिश राहत की खबर है, लेकिन मौसम वैज्ञानिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए खरीफ फसल की बुवाई से पहले जुलाई-अगस्त की बारिश का रुझान निर्णायक साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे मानसून की सफलता की गारंटी मानना जल्दबाज़ी होगी। भारत में बार-बार देखा गया है कि जोरदार प्री-मानसून के बाद अल-नीनो वर्षों में मुख्य सीज़न निराश करता है — 2023 इसका ताज़ा उदाहरण है जब बिपरजॉय के बाद भी कई क्षेत्रों में कुल बारिश औसत से कम रही। डॉ. शर्मा की 90% बारिश की चेतावनी को हल्के में लेना राजस्थान के किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए महंगा पड़ सकता है। मीडिया कवरेज अक्सर शुरुआती रिकॉर्ड पर केंद्रित रहती है और जुलाई-अगस्त के निर्णायक महीनों की तैयारी पर ध्यान नहीं देती — यही असली कहानी है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चित्तौड़गढ़ में इस साल प्री-मानसून बारिश का रिकॉर्ड क्यों टूटा?
जून 2026 के पहले 15 दिनों में चित्तौड़गढ़ में 88 मिमी बारिश हुई, जो पिछले तीन वर्षों की इसी अवधि से अधिक है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह सामान्य प्री-मानसून सीज़न के लिहाज़ से असामान्य रूप से भारी बारिश है।
चित्तौड़गढ़ में मानसून कब पहुँचेगा?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 22 जून से 25 जून 2026 के बीच चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में पहुँचने की संभावना है। फिलहाल मानसून केरल तट पर पहुँच चुका है और आगे बढ़ रहा है।
अल-नीनो का राजस्थान के मानसून पर क्या असर पड़ेगा?
IMD जयपुर के निदेशक डॉ. आर.एस. शर्मा के अनुसार, सक्रिय अल-नीनो दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं को कमज़ोर कर सकता है। इससे इस साल कुल मानसून वर्षा दीर्घकालीन औसत के लगभग 90 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है, यानी सामान्य से कम बारिश की आशंका है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस साल की बारिश कैसी है?
जून 2025 में पूरे महीने 75 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस साल केवल 15 दिनों में 88 मिमी बरसात हो चुकी है। जून 2024 में कुल 91.2 मिमी बारिश हुई थी — इस साल का आँकड़ा उसके करीब है। 2023 में चक्रवात बिपरजॉय के कारण बारिश इससे अधिक थी।
क्या प्री-मानसून की अच्छी बारिश पूरे सीज़न की गारंटी है?
नहीं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्री-मानसून और मुख्य मानसून सीज़न की बारिश अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है। अल-नीनो की सक्रियता के चलते जुलाई-अगस्त में बारिश कम हो सकती है, इसलिए शुरुआती अच्छी बारिश को पूरे सीज़न की सफलता नहीं माना जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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