राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी नेहा सोलंकी को सम्मानित: सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बेटे के लिए बनाई खास कुर्सी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पाली जिले की मनोवैज्ञानिक और माँ नेहा सोलंकी को 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने उन्हें 'ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन 2026' पुरस्कार के लिए देशभर के 26 नवोन्मेषकों में चुना है। यह सम्मान उस स्वदेशी अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम के लिए दिया जा रहा है, जो नेहा ने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए विकसित किया — एक ऐसी समस्या से जूझते हुए जो पहले उनके अपने बेटे की थी।
समस्या की शुरुआत: स्कूल का इनकार
इस नवाचार की जड़ें वर्ष 2023 में हैं, जब नेहा ने अपने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे दुरंजय का स्कूल में दाखिला कराने का प्रयास किया। एक स्कूल के प्रधानाचार्य ने स्पष्ट कह दिया कि दुरंजय को तभी प्रवेश मिलेगा जब वह बिना सहारे के बैठना सीख जाए। स्कूल में दिव्यांग बच्चों के लिए उपयुक्त बैठने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
नेहा के अनुसार, दुरंजय का जन्म गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में समय से पहले हुआ था और जन्म के समय उसका वजन मात्र लगभग 900 ग्राम था। बाद में उसमें सेरेब्रल पाल्सी का पता चला। इसके बाद कई वर्षों तक नेहा को एक के बाद एक स्कूलों के इनकार का सामना करना पड़ा।
माँ ने उठाई पढ़ाई की जिम्मेदारी
बेटे की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को समझने के लिए नेहा ने रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान उन्हें यह स्पष्ट हुआ कि समस्या बच्चों में नहीं, बल्कि स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए ज़रूरी सहायक उपकरणों की कमी में है। यह ऐसे समय में आया जब भारत में समावेशी शिक्षा को लेकर नीतिगत चर्चाएँ तो होती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बुनियादी ढाँचे की कमी बनी रहती है।
नवाचार: अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम का विकास
नेहा ने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के सहयोग से 3 से 12 वर्ष आयु वर्ग के सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बच्चों के लिए एक स्वदेशी अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम तैयार किया। इसे विकसित करने और उस पर शोध करने में उन्हें करीब नौ महीने लगे।
यह विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया सीटिंग सिस्टम बच्चों के शरीर को आवश्यक सहारा देता है, जिससे वे पढ़ाई, भोजन, लेखन और कक्षा की अन्य गतिविधियों के दौरान अधिक सुरक्षित और आरामदायक तरीके से बैठ पाते हैं। इससे बार-बार सहारे की ज़रूरत कम होती है और गिरने का जोखिम भी घटता है।
दुरंजय पर असर और व्यापक सामाजिक महत्व
नेहा के अनुसार, इस नवाचार से उनके बेटे दुरंजय की दैनिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वह पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर होकर सीखने तथा रोज़मर्रा के कार्य करने में सक्षम हुआ है। गौरतलब है कि भारत में सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हज़ारों बच्चे उचित सहायक उपकरणों के अभाव में मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित रहते हैं — नेहा का यह समाधान उस खाई को पाटने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
राष्ट्रीय पहचान और आगे की राह
इस नवाचार के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने नेहा सोलंकी को देशभर के 26 चयनित नवोन्मेषकों में शामिल किया है। 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें 'ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन 2026' पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह सम्मान न केवल नेहा के व्यक्तिगत संघर्ष को मान्यता देता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि समावेशी शिक्षा के लिए ज़मीनी स्तर के नवाचार कितने ज़रूरी हैं।