3 सितंबर 2026
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पुणे पोर्श हादसा: अनीश के माता-पिता ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर मांगा न्याय, बालिग उम्र 16 साल करने की अपील

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पुणे पोर्श हादसा: अनीश के माता-पिता ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर मांगा न्याय, बालिग उम्र 16 साल करने की अपील

सारांश

पुणे पोर्श हादसे में बेटे को खोने वाले अवधिया परिवार ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर न्याय की उम्मीद जताई और सरकार से बड़ी माँग रखी — नाबालिग की कानूनी उम्र 18 से घटाकर 16 साल की जाए। परिवार की पीड़ा और उनका संघर्ष अब एक व्यापक कानूनी बहस की शक्ल ले रहा है।

मुख्य बातें

अनीश अवधिया के माता-पिता सविता और ओम अवधिया ने 3 सितंबर को पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
परिवार ने जाँच को सही दिशा में बताया; आरोपी को हादसे के 15 घंटे के भीतर छोड़े जाने पर चिंता जताई।
माँ सविता अवधिया ने माँग की कि बालिग होने की कानूनी उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल की जाए।
शव घर पहुँचने में 52 घंटे लगे; शीतल कक्ष न मिलने से परिवार उचित अंतिम विदाई नहीं दे सका।
परिवार ने इस केस को हिट एंड रन व ड्रिंक एंड ड्राइव मामलों में मिसाल बनाने की माँग की।
सुनील टिंगरे को क्लीन चिट पर परिवार ने पुलिस जाँच पर भरोसा जताया।

पुणे के चर्चित पोर्श कार हादसे में अपनी जान गंवाने वाले अनीश अवधिया के माता-पिता — माँ सविता अवधिया और पिता ओम अवधिया3 सितंबर को पुणे पहुँचे और पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। परिवार ने जाँच को सही दिशा में बताते हुए पुणे और पूरे महाराष्ट्र की जनता व मीडिया का आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन घड़ी में उनका साथ नहीं छोड़ा।

माँ सविता का भावुक बयान

अनीश की माँ सविता अवधिया ने कहा, 'मैं यहाँ अमितेश सर का धन्यवाद करने आई थी। पुणे की जनता, पूरे महाराष्ट्र की जनता और मीडिया ने शुरू से लेकर आज तक हमारा बहुत सपोर्ट किया है, इसके लिए मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ।' उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि अनीश की पार्थिव देह घर पहुँचने में 52 घंटे लगे और तब तक शव इस स्थिति में नहीं था कि वह अपने बेटे को अंतिम बार गले लगा सकें। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर शीतल कक्ष (फ्रीजर) की सुविधा न मिलने से उन्हें अपने बच्चे को उचित अंतिम विदाई देने का मौका नहीं मिला।

बालिग होने की उम्र 16 साल करने की माँग

सविता ने सरकार से अपील की कि नाबालिगों के लिए बालिग होने की कानूनी उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल की जाए। उनका तर्क था कि आज के युवा समय से पहले परिपक्व हो रहे हैं और 16 वर्ष की आयु में ड्रग्स, शराब, वाहन चलाने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहती हैं कि मीडिया के माध्यम से यह माँग सरकार तक पहुँचे और पुलिस कमिश्नर की ओर से प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को पत्र लिखा जाए, ताकि यह मुद्दा विधानसभा में उठे।

पिता ओम अवधिया का आक्रोश और माँग

मध्य प्रदेश से आए अनीश के पिता ओम अवधिया ने भी बालिग उम्र घटाने की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि आए दिन नाबालिगों द्वारा हिंसक अपराध किए जाते हैं और वे कानूनी कमज़ोरी के चलते बच निकलते हैं। उन्होंने माँग की कि इस पोर्श हादसे को हिट एंड रन और ड्रिंक एंड ड्राइव मामलों में एक मिसाल के तौर पर पेश किया जाए, ताकि समाज में भय पैदा हो और ऐसी घटनाएँ कम हों।

जाँच और ब्लड सैंपल विवाद पर परिवार का रुख

सविता अवधिया ने स्वीकार किया कि मामले को पलटने की पूरी कोशिश की गई थी — आरोपी को हादसे के 15 घंटे के भीतर ही छोड़ दिया गया था। उन्होंने ब्लड सैंपल बदले जाने के प्रयास का भी उल्लेख किया, लेकिन पुणे पुलिस की निष्पक्ष जाँच की सराहना की। सुनील टिंगरे को क्लीन चिट मिलने पर ओम अवधिया ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने जाँच की है और उनके निष्कर्ष पर उन्हें भरोसा है।

अनीश की यादें और मराठी जनता का आभार

परिवार ने बताया कि अनीश परिवार में सबसे बड़ा था, घर के सभी सदस्यों का ख्याल रखता था और विदेश जाकर माता-पिता को साथ ले जाने के सपने देखता था। ओम अवधिया ने कहा कि पुणे आने से पहले भाषाई दूरी की थोड़ी आशंका थी, लेकिन मराठी समाज के अपनेपन ने उन्हें अभिभूत कर दिया। उन्होंने कहा, 'आज लगता है मराठी मानुष गलत नहीं हैं, सब अपने हैं।' यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है और परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक जटिल विधिक प्रश्न है जिस पर बाल अधिकार विशेषज्ञ और न्यायविद् लंबे समय से बँटे हुए हैं। असली सवाल यह है कि क्या उम्र की सीमा बदलने से न्याय सुनिश्चित होगा, या जरूरत है जाँच तंत्र को मज़बूत करने की — ताकि ब्लड सैंपल बदलने जैसे प्रयास पहले ही नाकाम हो सकें। पोर्श हादसे ने यह भी उजागर किया कि आर्थिक रसूख किस तरह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करता है — और इस पर बहस उम्र सीमा से कहीं आगे जानी चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे पोर्श हादसा क्या था और अनीश अवधिया कौन थे?
पुणे पोर्श हादसा एक सड़क दुर्घटना थी जिसमें एक नाबालिग ने तेज़ रफ्तार पोर्श कार चलाते हुए अनीश अवधिया की जान ले ली। अनीश मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और पुणे में काम करते थे।
अनीश के माता-पिता ने पुणे में किससे मुलाकात की और क्यों?
अनीश के माता-पिता सविता और ओम अवधिया ने 3 सितंबर को पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने जाँच की प्रगति पर संतोष जताया और जनता व मीडिया का आभार व्यक्त किया।
परिवार ने बालिग उम्र 16 साल करने की माँग क्यों की?
सविता अवधिया का कहना है कि आज 16 साल के बच्चे ड्रग्स, शराब और वाहन चलाने जैसे काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि यह बदलाव विधानसभा में उठाया जाए।
अनीश की पार्थिव देह को घर पहुँचने में इतना समय क्यों लगा?
परिवार के अनुसार अनीश की पार्थिव देह घर पहुँचने में 52 घंटे लगे और स्थानीय स्तर पर शीतल कक्ष (फ्रीजर) की सुविधा नहीं मिली, जिससे शव की स्थिति खराब हो गई। माँ सविता ने कहा कि वह अपने बेटे को अंतिम बार ठीक से गले नहीं लगा सकीं।
सुनील टिंगरे को क्लीन चिट मिलने पर परिवार का क्या कहना है?
ओम अवधिया ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने जाँच की है और उनके निष्कर्ष पर उन्हें भरोसा है, इसलिए वह इस पर कुछ नहीं कहेंगे। परिवार ने पुणे पुलिस की समग्र जाँच की सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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