पुणे पोर्श हादसा: अनीश के माता-पिता ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर मांगा न्याय, बालिग उम्र 16 साल करने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के चर्चित पोर्श कार हादसे में अपनी जान गंवाने वाले अनीश अवधिया के माता-पिता — माँ सविता अवधिया और पिता ओम अवधिया — 3 सितंबर को पुणे पहुँचे और पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। परिवार ने जाँच को सही दिशा में बताते हुए पुणे और पूरे महाराष्ट्र की जनता व मीडिया का आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन घड़ी में उनका साथ नहीं छोड़ा।
माँ सविता का भावुक बयान
अनीश की माँ सविता अवधिया ने कहा, 'मैं यहाँ अमितेश सर का धन्यवाद करने आई थी। पुणे की जनता, पूरे महाराष्ट्र की जनता और मीडिया ने शुरू से लेकर आज तक हमारा बहुत सपोर्ट किया है, इसके लिए मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ।' उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि अनीश की पार्थिव देह घर पहुँचने में 52 घंटे लगे और तब तक शव इस स्थिति में नहीं था कि वह अपने बेटे को अंतिम बार गले लगा सकें। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर शीतल कक्ष (फ्रीजर) की सुविधा न मिलने से उन्हें अपने बच्चे को उचित अंतिम विदाई देने का मौका नहीं मिला।
बालिग होने की उम्र 16 साल करने की माँग
सविता ने सरकार से अपील की कि नाबालिगों के लिए बालिग होने की कानूनी उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल की जाए। उनका तर्क था कि आज के युवा समय से पहले परिपक्व हो रहे हैं और 16 वर्ष की आयु में ड्रग्स, शराब, वाहन चलाने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहती हैं कि मीडिया के माध्यम से यह माँग सरकार तक पहुँचे और पुलिस कमिश्नर की ओर से प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को पत्र लिखा जाए, ताकि यह मुद्दा विधानसभा में उठे।
पिता ओम अवधिया का आक्रोश और माँग
मध्य प्रदेश से आए अनीश के पिता ओम अवधिया ने भी बालिग उम्र घटाने की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि आए दिन नाबालिगों द्वारा हिंसक अपराध किए जाते हैं और वे कानूनी कमज़ोरी के चलते बच निकलते हैं। उन्होंने माँग की कि इस पोर्श हादसे को हिट एंड रन और ड्रिंक एंड ड्राइव मामलों में एक मिसाल के तौर पर पेश किया जाए, ताकि समाज में भय पैदा हो और ऐसी घटनाएँ कम हों।
जाँच और ब्लड सैंपल विवाद पर परिवार का रुख
सविता अवधिया ने स्वीकार किया कि मामले को पलटने की पूरी कोशिश की गई थी — आरोपी को हादसे के 15 घंटे के भीतर ही छोड़ दिया गया था। उन्होंने ब्लड सैंपल बदले जाने के प्रयास का भी उल्लेख किया, लेकिन पुणे पुलिस की निष्पक्ष जाँच की सराहना की। सुनील टिंगरे को क्लीन चिट मिलने पर ओम अवधिया ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने जाँच की है और उनके निष्कर्ष पर उन्हें भरोसा है।
अनीश की यादें और मराठी जनता का आभार
परिवार ने बताया कि अनीश परिवार में सबसे बड़ा था, घर के सभी सदस्यों का ख्याल रखता था और विदेश जाकर माता-पिता को साथ ले जाने के सपने देखता था। ओम अवधिया ने कहा कि पुणे आने से पहले भाषाई दूरी की थोड़ी आशंका थी, लेकिन मराठी समाज के अपनेपन ने उन्हें अभिभूत कर दिया। उन्होंने कहा, 'आज लगता है मराठी मानुष गलत नहीं हैं, सब अपने हैं।' यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है और परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।