बेअदबी मामला: सुखबीर सिंह बादल आज SIT के सामने पेश, विजय सांपला के बयान के बाद बढ़ी मुश्किलें
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल सोमवार, 20 जुलाई को बेअदबी मामले में विशेष जांच टीम (SIT) के समक्ष पेश होंगे। उन्हें सुबह 11 बजे चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह समन पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता विजय सांपला के SIT के समक्ष दिए गए बयान के बाद जारी किया गया है।
SIT का नोटिस और पूछताछ की पृष्ठभूमि
SIT ने 16 जुलाई को औपचारिक नोटिस जारी कर सुखबीर बादल को चंडीगढ़ में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। जांच एजेंसी के समक्ष विजय सांपला ने कथित तौर पर उस मेमोरेंडम पर अपने हस्ताक्षर की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए, जिसे सुखबीर बादल के साथ मिलकर पंजाब के राज्यपाल को बेअदबी की घटनाओं के संदर्भ में सौंपा गया था। सांपला के इस बयान ने जांच को नई दिशा दी और सुखबीर बादल को पूछताछ के लिए तलब करना अनिवार्य हो गया।
बहिबलकलां गोलीकांड: मामले की जड़
यह पूरा मामला 11 साल पुराने बहिबलकलां गोलीकांड से जुड़ा है। अक्टूबर 2015 में पंजाब के फरीदकोट जिले में बेअदबी के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। SIT अब उन घटनाओं की श्रृंखला की जांच कर रही है जो पुलिस कार्रवाई से पहले घटित हुईं। जांच के दौरान कई पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका पर सवाल
जांच में यह दावा सामने आया है कि पूर्व अकाली विधायक मनतार बरार की प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और डीजी से बातचीत हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ओएसडी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश रात में दिया गया था। ये बयान SIT की जांच की दिशा और दायरे को और व्यापक बनाते हैं।
सुखबीर बादल की प्रतिक्रिया
SIT नोटिस मिलने के बाद सुखबीर बादल ने गुरुवार को मीडिया से कहा कि वे जांच टीम के साथ पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले का उपयोग न्याय के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'पिछले 10 सालों से बेअदबी के मुद्दे पर राजनीति चल रही है। अब चुनाव नजदीक आते देख 'झाड़ू' वाली सरकार ने फिर से यह ड्रामा शुरू कर दिया है। मैंने पहले भी हर जांच में हिस्सा लिया है और अब भी वे मुझे जहां बुलाएंगे, मैं वहां जाऊंगा। मेरा एक वादा है, जब 2027 में शिरोमणि अकाली दल की सरकार सत्ता में आएगी, तो हम दोषियों को ऐसी सजा देंगे जो मिसाल बनेगी।'
आगे क्या होगा
SIT की यह पूछताछ बेअदबी मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील होता जा रहा है। जांच के निष्कर्ष न केवल SAD बल्कि राज्य की राजनीतिक तस्वीर को भी प्रभावित कर सकते हैं।