पंजाब विधानसभा चुनाव: कांग्रेस नेता लखबीर सिंह लाखा ने हाईकमान को सौंपी जीत की रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की एक अहम बैठक के दौरान पंजाब के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता लखबीर सिंह लाखा ने 17 जून 2026 को दावा किया कि पार्टी आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और हाईकमान को विस्तृत चुनावी रणनीति सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पूरा विश्वास है कि अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी पंजाब में सत्ता में वापसी करेगी।
हाईकमान को सौंपी रणनीति
लाखा ने बताया कि पंजाब में तीन से चार महीनों के भीतर चुनावी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा, 'पंजाब कांग्रेस को किस रणनीति के साथ चुनाव में उतरना है, इस पर हाईकमान ने हमसे राय और सुझाव माँगे थे। हमने अपनी पूरी रणनीति पार्टी नेतृत्व को बता दी है। अब हाईकमान तय करेगा कि किस प्रकार चुनावी अभियान चलाना है और किस रणनीति के साथ जीत हासिल करनी है।' यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ रही है।
संगठनात्मक तैयारी और जनता के मुद्दे
कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी संगठन स्तर से लेकर जमीनी तैयारी तक हर मोर्चे पर सक्रिय है। कार्यकर्ताओं को चुनावी माहौल के लिए तैयार किया जा रहा है और किसानों, युवाओं और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दी जाएगी। लाखा ने कहा कि कांग्रेस को पंजाब की जनता पर पूरा भरोसा है और पार्टी को उम्मीद है कि मतदाता बदलाव के पक्ष में अपना फैसला सुनाएँगे।
अकाल तख्त बेअदबी मामले पर प्रतिक्रिया
बैठक के दौरान लाखा ने अकाल तख्त से जुड़े कथित बेअदबी मामले और मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार द्वारा दिए गए बयानों और निर्णयों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लाखा ने कहा, 'जत्थेदार साहब का कहना है कि इस वीडियो की दो अलग-अलग फॉरेंसिक लैब से जाँच करवाई गई है। अगर किसी को लगता है कि जाँच गलत है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसके अलावा कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो वह बेहद गंभीर विषय होगा।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव में AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस बार कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमज़ोरियों को दूर कर मैदान में उतरने की तैयारी में है। हाईकमान के निर्देशों के बाद पार्टी का चुनावी अभियान और उम्मीदवारों की सूची तय होने की उम्मीद है।