कतर ने संघर्ष के बीच फोर्स मेज्योर की चेतावनी दी: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं

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कतर ने संघर्ष के बीच फोर्स मेज्योर की चेतावनी दी: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं

सारांश

कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने संघर्ष के चलते 'फोर्स मेज्योर' की चेतावनी दी है। यदि युद्ध जारी रहा, तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।

Key Takeaways

  • फोर्स मेज्योर की चेतावनी खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों के लिए गंभीर है।
  • संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आ सकती है।
  • कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है।
  • कतर का एलएनजी संयंत्र ईरानी हमले से प्रभावित हुआ है।
  • बीमा प्रीमियम के बढ़ने से शिपिंग कंपनियों में हिचक है।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच, कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध कुछ और दिनों तक जारी रहा, तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा सकती है।

वास्तव में, यदि कोई तेल कंपनी युद्ध या प्राकृतिक आपदा के कारण तेल की आपूर्ति नहीं कर पाती है, तो वह फोर्स मेज्योर घोषित कर सकती है और उसे अनुबंध के उल्लंघन का दोष नहीं दिया जाएगा।

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में, साद अल-काबी ने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है, तो खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को आने वाले दिनों में फोर्स मेज्योर की घोषणा करनी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें कानूनी रूप से गंभीर जिम्मेदारियों और नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि टैंकर और अन्य जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहते हैं, तो अगले दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। वहीं, प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना बढ़कर 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक जा सकती हैं।

इस सप्ताह, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में लगभग 20 प्रतिशत और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। शुक्रवार को, ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया। दोनों बेंचमार्क अप्रैल 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर हैं।

कतर, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक है, इस सप्ताह फोर्स मेज्योर की घोषणा कर चुका है, जब ईरानी ड्रोन हमले में उसके रस लाफान एलएनजी संयंत्र को नुकसान पहुँचा। यह संयंत्र कतर का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यदि हमले तुरंत समाप्त भी हो जाएं, तब भी निर्यात संचालन को सामान्य होने में हफ्तों से महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स में गंभीर बाधाएँ आई हैं। उन्होंने बताया कि कतर के 128 एलएनजी कैरियर जहाजों में से इस समय केवल छह या सात ही कार्गो लोड करने के लिए उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में कम से कम 10 जहाजों पर हमले हुए हैं और बीमा कंपनियों ने प्रीमियम काफी बढ़ा दिया है, जिसके कारण शिपिंग कंपनियां इस इलाके से जहाज भेजने में हिचक रही हैं।

इस बीच, ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इन हमलों में बहरीन के एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया है।

डीबीएस बैंक की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भले ही ईरानी नौसेना के युद्धपोत सीधे तौर पर बड़ा खतरा न हों, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों के कारण शिपमेंट धीमे पड़ सकते हैं। इससे बीमा, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

Point of View

जो वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर गहरा असर डाल सकता है। यह स्थिति न केवल खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

फोर्स मेज्योर क्या है?
फोर्स मेज्योर एक कानूनी स्थिति है, जिसमें कंपनियां युद्ध या प्राकृतिक आपदा के कारण अनुबंध का उल्लंघन नहीं कर पाने पर इसकी घोषणा कर सकती हैं।
कतर के ऊर्जा मंत्री ने क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो खाड़ी क्षेत्र के सभी ऊर्जा निर्यातकों को फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ सकता है।
तेल की कीमतें कब बढ़ सकती हैं?
यदि संघर्ष जारी रहा, तो अगले दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है।
कतर का एलएनजी संयंत्र क्यों प्रभावित हुआ?
कतर का एलएनजी संयंत्र ईरानी ड्रोन हमले में नुकसान हुआ, जिसके चलते फोर्स मेज्योर की घोषणा की गई।
क्या शिपिंग कंपनियों पर असर पड़ा है?
हाँ, हमलों के कारण बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं, जिससे शिपिंग कंपनियाँ इस क्षेत्र में जहाज भेजने में हिचक रही हैं।
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