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ईद-उल-अजहा पर सलीम राज की अपील: खुले में कुर्बानी न करें, साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखें

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ईद-उल-अजहा पर सलीम राज की अपील: खुले में कुर्बानी न करें, साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखें

सारांश

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलीम राज ने ईद-उल-अजहा से पहले मुस्लिम समुदाय से अपील की है — खुले में कुर्बानी न करें, रक्त गड्ढे में दफनाएँ, वीडियो वायरल न करें। उनका कहना है कि इस्लाम स्वयं पड़ोसियों को तकलीफ देने से रोकता है, और कुर्बानी संवेदनशील तरीके से भी पूरी हो सकती है।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने ईद-उल-अजहा से पहले मुस्लिम समुदाय से खुले स्थानों पर कुर्बानी न करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि खुले में बहता रक्त और जानवर की आवाज़ बहुसंख्यक व शाकाहारी पड़ोसियों के लिए गंभीर असुविधा का कारण बनती है।
व्यावहारिक सुझाव: यदि खुले में कुर्बानी अनिवार्य हो तो गड्ढा खोदकर रक्त दफनाएँ ; सड़क या नाली में रक्त न डालें ।
कुर्बानी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने से बचें ।
सलीम राज ने कहा कि यह अपील इस्लाम की शिक्षाओं के अनुरूप है — धर्म किसी को तकलीफ देने की इजाज़त नहीं देता।
छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय प्रशासन भी त्योहार के दौरान शांति बनाए रखने के लिए सतर्क हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने ईद-उल-अजहा से पहले मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे खुले सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी से परहेज करें, ताकि बहुसंख्यक समुदाय और शाकाहारी पड़ोसियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रायपुर से जारी इस अपील को छत्तीसगढ़ में साम्प्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सलीम राज की मुख्य अपील

सलीम राज ने कहा, 'मैं सभी मुस्लिम भाइयों से गुजारिश करता हूँ कि ईद-उल-अजहा के मौके पर खुले में कुर्बानी न करें, जिससे बहुसंख्यक समुदाय को तकलीफ न हो।' उन्होंने स्पष्ट किया कि खुले क्षेत्रों में जहाँ बड़ी संख्या में शाकाहारी लोग निवास करते हैं, वहाँ कुर्बानी की प्रक्रिया — जानवर की आवाज़ और खुले में बहता रक्त — कई लोगों के लिए गहरी असुविधा का कारण बन सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि 'कभी-कभी बकरे की आवाज़ सुनकर लोग बेहोश भी हो जाते हैं।' यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि त्योहारी उत्साह और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है।

व्यावहारिक सुझाव

सलीम राज ने केवल अपील तक सीमित न रहते हुए ठोस व्यावहारिक सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश खुले स्थान पर कुर्बानी करनी पड़े, तो एक गड्ढा खोदकर उसमें रक्त को दफन किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कुर्बानी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने से भी बचने की सलाह दी।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सड़क या नाली में रक्त न डाला जाए, बल्कि उसे उचित तरीके से दफनाया जाए। यह सुझाव स्वच्छता और सामाजिक शिष्टाचार दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है।

इस्लामी शिक्षाओं का संदर्भ

सलीम राज ने अपनी अपील को धार्मिक आधार भी दिया। उन्होंने कहा, 'हर समुदाय का सम्मान किया जाना चाहिए और पड़ोसियों की भावनाओं का ध्यान रखना इस्लाम की शिक्षाओं के अनुरूप है।' उनके अनुसार, 'इस्लाम किसी को तकलीफ पहुँचाने की इजाज़त नहीं देता — त्योहार खुशी का होता है, इसलिए पड़ोसियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।'

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ईद-उल-अजहा की तैयारियाँ जोरों पर हैं और प्रशासन त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क है।

प्रशासन और सरकार की भूमिका

छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय प्रशासन भी त्योहार के दौरान शांति बनाए रखने की बात कह चुका है। सलीम राज की यह अपील उस व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें धार्मिक नेता और प्रशासन मिलकर सांप्रदायिक सौहार्द सुनिश्चित करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड अध्यक्ष जैसे धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा इस प्रकार की सक्रिय अपील समुदाय के भीतर से आत्म-नियमन को प्रोत्साहित करती है, जो प्रशासनिक निर्देशों की तुलना में अधिक प्रभावी मानी जाती है।

आगे की राह

सलीम राज ने स्पष्ट किया कि कुर्बानी के धार्मिक महत्व को बरकरार रखते हुए इसे अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया जा सकता है। उनकी यह अपील छत्तीसगढ़ के मुस्लिम समुदाय से है कि वे इस ईद-उल-अजहा को एक ऐसे उत्सव के रूप में मनाएँ जो न केवल अपने धर्म का, बल्कि अपने पड़ोसियों और समाज का भी सम्मान करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक नैतिकता के आधार पर आया संदेश है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या यह अपील ज़मीनी स्तर तक पहुँचेगी, या यह केवल मीडिया बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी — क्योंकि ऐसी अपीलें पिछले वर्षों में भी होती रही हैं, फिर भी विवाद दोहराते रहे हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सलीम राज ने ईद-उल-अजहा पर क्या अपील की है?
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे खुले सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी न करें, ताकि बहुसंख्यक और शाकाहारी पड़ोसियों को असुविधा न हो। उन्होंने कुर्बानी के रक्त को गड्ढे में दफनाने और उसका वीडियो वायरल न करने की भी सलाह दी।
सलीम राज ने खुले में कुर्बानी को क्यों असुविधाजनक बताया?
उनके अनुसार, खुले क्षेत्रों में जहाँ शाकाहारी लोग रहते हैं, जानवर की आवाज़ और खुले में बहता रक्त गंभीर मानसिक असुविधा का कारण बनता है — कभी-कभी लोग बेहोश भी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम स्वयं पड़ोसियों को तकलीफ देने की इजाज़त नहीं देता।
कुर्बानी के लिए सलीम राज ने क्या व्यावहारिक सुझाव दिए?
यदि खुले स्थान पर कुर्बानी करनी हो तो गड्ढा खोदकर रक्त को दफनाएँ, सड़क या नाली में रक्त न डालें, और कुर्बानी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने से बचें। ये सुझाव स्वच्छता और सामाजिक शिष्टाचार दोनों दृष्टिकोणों से दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार का ईद-उल-अजहा पर क्या रुख है?
छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय प्रशासन ने त्योहार के दौरान शांति बनाए रखने के लिए सतर्क रहने की बात कही है। वक्फ बोर्ड की यह अपील उस व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें धार्मिक नेता और प्रशासन मिलकर सांप्रदायिक सौहार्द सुनिश्चित करना चाहते हैं।
क्या इस्लाम में कुर्बानी के तरीके को लेकर कोई निर्देश हैं?
सलीम राज के अनुसार, इस्लाम की शिक्षाएँ यही कहती हैं कि किसी को भी — चाहे वह किसी भी धर्म का हो — तकलीफ नहीं पहुँचानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के धार्मिक महत्व को बनाए रखते हुए इसे संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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