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पश्चिम बंगाल मदरसा जांच पर रफीकुल इस्लाम: 'स्वागत है, लेकिन परेशान करने की नीयत न हो'

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पश्चिम बंगाल मदरसा जांच पर रफीकुल इस्लाम: 'स्वागत है, लेकिन परेशान करने की नीयत न हो'

सारांश

AIUDF नेता रफीकुल इस्लाम ने पश्चिम बंगाल में मदरसा जांच को लेकर दो-टूक कहा — जांच से कोई ऐतराज नहीं, लेकिन मुस्लिम समुदाय को परेशान करने की कोशिश संविधान का उल्लंघन होगी। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी को संविधान पढ़ने की सलाह दी।

मुख्य बातें

AIUDF नेता रफीकुल इस्लाम ने 8 जून को गुवाहाटी में कहा कि मदरसा जांच पर कोई आपत्ति नहीं, बशर्ते मंशा साफ हो।
उन्होंने कहा कि देशभर के मदरसों के दरवाजे प्रशासनिक जांच के लिए हमेशा खुले हैं।
मदरसों में अब धार्मिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर शिक्षा और सामान्य पाठ्यक्रम भी शामिल है।
सुवेंदु अधिकारी को संविधान पढ़ने और पश्चिम बंगाल की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी।
इस्लाम ने चेतावनी दी कि मदरसा छात्रों को परेशान करना संविधान के तहत दिए गए अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नेता रफीकुल इस्लाम ने 8 जून को गुवाहाटी में कहा कि पश्चिम बंगाल में मदरसों की जांच पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते सरकार की मंशा साफ हो और मुस्लिम समुदाय को परेशान करने का इरादा न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

मदरसों के दरवाजे सबके लिए खुले हैं

रफीकुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि न केवल पश्चिम बंगाल में, बल्कि पूरे देश में मदरसों के दरवाजे हर जांच के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा, 'अगर किसी जिलाधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी को मदरसों की जांच करनी है, तो वो शौक से आएं — हम उनका स्वागत करेंगे।' उनके अनुसार मदरसों में इंसानियत और शांति की तालीम दी जाती है, दहशतगर्दी का कोई पाठ नहीं पढ़ाया जाता।

ऐतिहासिक भूमिका का हवाला

AIUDF नेता ने दावा किया कि मदरसों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी और वहां से पढ़े लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि मदरसों से निकले लोगों ने हमेशा सामाजिक कल्याण में योगदान दिया है। यह टिप्पणी उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए की।

संविधान और अल्पसंख्यक अधिकार

इस्लाम ने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान मुस्लिम समुदाय को अपने धर्म का पालन करने और मदरसे संचालित करने का पूरा अधिकार देता है। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी — जो कथित तौर पर हाल ही में मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं — को सलाह दी कि वे संविधान पढ़ें और पश्चिम बंगाल की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें।

मदरसों की बदलती तस्वीर

रफीकुल इस्लाम ने स्वीकार किया कि मदरसों की आर्थिक स्थिति अक्सर कमज़ोर रहती है और इन्हें पारस्परिक सहयोग से चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि आज के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षा भी दी जाती है, ताकि छात्र आधुनिक दुनिया में पिछड़ें नहीं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मदरसा नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।

सुवेंदु अधिकारी को सीधा संदेश

AIUDF नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को परेशान करने की कोई योजना बनाई जा रही है, तो यह संविधान का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर सत्ता में आई सरकार को इस वादे पर खरा उतरना होगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तनाव और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'मंशा साफ होनी चाहिए' की शर्त जोड़कर राजनीतिक दबाव बनाए रखते हैं। असली सवाल यह है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के तहत मदरसा नीति किस दिशा में जाएगी — शैक्षिक सुधार या राजनीतिक ध्रुवीकरण। 'सबका साथ, सबका विकास' के वादे और अल्पसंख्यक संस्थाओं की जांच के बीच की खाई को पाटना ही नई सरकार की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रफीकुल इस्लाम ने पश्चिम बंगाल में मदरसा जांच पर क्या कहा?
AIUDF नेता रफीकुल इस्लाम ने कहा कि मदरसा जांच से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और प्रशासनिक अधिकारी कभी भी आकर जांच कर सकते हैं। उन्होंने हालांकि यह शर्त रखी कि सरकार की मंशा साफ होनी चाहिए और मुस्लिम समुदाय को परेशान करने का इरादा नहीं होना चाहिए।
AIUDF क्या है और रफीकुल इस्लाम कौन हैं?
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) असम स्थित एक राजनीतिक दल है जो मुख्यतः अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है। रफीकुल इस्लाम इस दल के प्रमुख नेताओं में से एक हैं।
क्या मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा दी जाती है?
रफीकुल इस्लाम के अनुसार आज के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षा भी दी जाती है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक दुनिया के लिए तैयार करना है।
सुवेंदु अधिकारी को रफीकुल इस्लाम ने क्या सलाह दी?
इस्लाम ने सुवेंदु अधिकारी को सलाह दी कि वे भारत का संविधान पढ़ें, जो अल्पसंख्यकों को अपने धर्म का पालन करने और शैक्षणिक संस्थान चलाने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि नई सरकार को पश्चिम बंगाल की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
मदरसों और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में इस्लाम ने क्या दावा किया?
रफीकुल इस्लाम ने दावा किया कि मदरसों से पढ़े लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि मदरसों ने हमेशा सामाजिक कल्याण में योगदान दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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