31 जुलाई 2026
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राघव चड्ढा का कांग्रेस पर हमला: कर्नाटक में 2016 के पेपर लीक कांड के मंत्री को 2026 में फिर मिला वही विभाग

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राघव चड्ढा का कांग्रेस पर हमला: कर्नाटक में 2016 के पेपर लीक कांड के मंत्री को 2026 में फिर मिला वही विभाग

सारांश

राज्यसभा में पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान राघव चड्ढा ने कांग्रेस को घेरा — 2016 में कर्नाटक में जिस मंत्री के पीए ने पेपर लीक किया, वह मंत्री 2026 में भी उसी विभाग पर काबिज है। चड्ढा ने इसे कांग्रेस की जवाबदेही का असली चेहरा बताया।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 31 जुलाई 2026 को संसद में कांग्रेस पर कर्नाटक पेपर लीक को लेकर तीखा हमला बोला।
2016 में कर्नाटक में कांग्रेस शासन के दौरान कक्षा 12 की रसायन विज्ञान का पेपर दो बार लीक हुआ और परीक्षा दो बार रद्द करनी पड़ी।
सीआईडी ने संबंधित मंत्री के पीए को गिरफ्तार किया था, लेकिन मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।
चड्ढा के अनुसार वही मंत्री 2026 में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत फिर उसी विभाग का प्रभार संभाल रहा है।
चड्ढा ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का समर्थन करते हुए कंप्यूटरीकृत परीक्षाओं और कड़ी सजा के प्रावधान की वकालत की।

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 31 जुलाई 2026 को संसद में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' पर चर्चा के दौरान कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया और कर्नाटक के 2016 के पेपर लीक प्रकरण को 'इस पूरी बहस का सबसे शर्मनाक अध्याय' करार दिया। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस मंत्री के कार्यालय से पेपर लीक हुआ था, वही मंत्री 2026 में एक बार फिर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत उसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

मुख्य आरोप: 2016 का कर्नाटक पेपर लीक प्रकरण

चड्ढा ने सदन को याद दिलाया कि 2016 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के दौरान कक्षा 12 की रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) का प्रश्नपत्र लीक हुआ था। उन्होंने कहा, 'री-एग्जाम का पेपर भी लीक हो गया। परीक्षा दो बार रद्द करनी पड़ी। इसके बाद सीआईडी ने मंत्री के अपने ही पीए को पेपर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया। इस्तीफा नहीं आया, सिर्फ बहाना दिया गया।'

उन्होंने आगे कहा, 'अब 2026 में देखिए, वही मंत्री आज फिर उसी विभाग को चला रहा है, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत। ये हैं कांग्रेस के जवाबदेही के मानक।'

विधेयक का समर्थन और केंद्र सरकार की सराहना

चड्ढा ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की माँगें पूरी तरह जायज थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर नहीं, बल्कि युवाओं के अभिभावक के रूप में जवाब दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी छात्रों से जुड़ा कोई मामला आया, केंद्र सरकार ने सुना, कार्रवाई की और परिणाम दिए।

यह विधेयक संगठित सिंडिकेट द्वारा पेपर लीक करने पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है और परीक्षा प्रणाली को कंप्यूटरीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

छात्रों और परिवारों की पीड़ा का जिक्र

चड्ढा ने कोटा, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली और पटना जैसे शहरों में पढ़ने वाले छात्रों के परिवारों के बलिदान का मार्मिक जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये परिवार घर का बजट काटकर और कर्ज लेकर अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, जहाँ छात्र 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एक लीक हुआ प्रश्नपत्र सालों की मेहनत को बर्बाद कर सकता है और छात्रों के विश्वास, मानसिक स्वास्थ्य तथा आकांक्षाओं को तोड़ सकता है।

अपनी भूमिका पर चड्ढा का स्पष्टीकरण

अपने पहले की चुप्पी पर सफाई देते हुए चड्ढा ने कहा कि पहले वह विपक्ष की बेंच पर थे, लेकिन अब ट्रेजरी बेंच पर होने के नाते सिस्टम को ठोस समाधान से दुरुस्त करना उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र समुदाय में गहरा आक्रोश है और संसद में इस विधेयक पर तीखी बहस जारी है।

आगे क्या

संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद परीक्षा प्रणाली में कंप्यूटरीकरण और संगठित पेपर लीक सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक की असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा अंतर है — उन्होंने संबंधित कर्नाटक मंत्री का नाम नहीं लिया, जिससे दावे की स्वतंत्र जाँच मुश्किल हो जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक पर केंद्र सरकार खुद NEET और UGC-NET विवाद के कारण दबाव में रही है — इसलिए राज्य-स्तरीय उदाहरण उठाना एक सुविचारित रणनीति है। असली सवाल यह है कि यदि यह दावा सटीक है, तो विपक्षी दलों और मीडिया ने कर्नाटक में इस जवाबदेही के सवाल को उतनी तीव्रता से क्यों नहीं उठाया जितना केंद्र पर उठाया जाता है — यह दोहरे मानकों की बहस को और गहरा करता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि 2016 में कर्नाटक में कांग्रेस शासन के दौरान जिस मंत्री के कार्यालय के पीए ने कक्षा 12 का पेपर लीक किया था, वह मंत्री 2026 में भी उसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहा है। उन्होंने इसे कांग्रेस की जवाबदेही के खोखले मानकों का प्रमाण बताया।
2016 का कर्नाटक पेपर लीक मामला क्या था?
2016 में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के दौरान कक्षा 12 की रसायन विज्ञान परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ था। री-एग्जाम का पेपर भी लीक होने से परीक्षा दो बार रद्द करनी पड़ी और सीआईडी ने संबंधित मंत्री के पीए को गिरफ्तार किया था।
'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' क्या है?
यह विधेयक संगठित पेपर लीक सिंडिकेट पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है और परीक्षा प्रणाली को कंप्यूटरीकृत करने की दिशा में कदम उठाता है। राज्यसभा में 31 जुलाई 2026 को इस पर बहस के दौरान राघव चड्ढा ने इसका पुरजोर समर्थन किया।
राघव चड्ढा ने छात्रों के बारे में क्या कहा?
चड्ढा ने कोटा, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली और पटना जैसे शहरों में 18 घंटे पढ़ने वाले छात्रों और उनके परिवारों के बलिदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक लीक हुआ पेपर सालों की मेहनत, विश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और आकांक्षाओं को एक झटके में बर्बाद कर सकता है।
क्या राघव चड्ढा पहले भी पेपर लीक पर बोल चुके हैं?
चड्ढा ने स्वयं स्पष्ट किया कि पहले विपक्ष की बेंच पर रहते हुए उनकी भूमिका अलग थी, लेकिन अब ट्रेजरी बेंच पर होने के नाते सिस्टम को ठोस समाधान से सुधारना उनकी बढ़ी हुई जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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