रागिनी नायक का केंद्र पर हमला: शिक्षा प्रणाली विफल, बिहार में AK-47 फायरिंग पर जवाबदेही माँगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर तीखा हमला बोला और छात्र आंदोलन के दौरान बिहार में कथित एके-47 फायरिंग तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए सरकार से जवाबदेही की माँग की। उन्होंने संसद में छात्र मुद्दों पर जारी गतिरोध को लेकर भी सत्ता पक्ष को आड़े हाथों लिया।
संसद में गतिरोध पर कांग्रेस का रुख
रागिनी नायक ने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और वहाँ चर्चा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उनके अनुसार, 'सत्ता पक्ष चाहे तो संवाद है और न चाहे तो कोई चर्चा नहीं होगी' — यह रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चर्चा के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही ज़रूरी है।
शिक्षा प्रणाली पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'बिके हुए शिक्षा के सिस्टम के खिलाफ युवा उठ खड़ा हुआ है।' उनके अनुसार, केंद्र को शुरू में यह अनुमान नहीं था कि यह आंदोलन इतना व्यापक रूप लेगा और सरकार ने पुलिस व लाठीचार्ज से इसे दबाने की कोशिश की, किंतु छात्रों का विरोध पूरे देश में फैलता जा रहा है।
बिहार और दिल्ली में कथित पुलिस कार्रवाई
रागिनी नायक ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई गई, जिसके लिए उन्होंने सरकार के प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया। बिहार में हुई घटनाओं के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जवाबदेह बताया। उनके अनुसार, कथित एके-47 फायरिंग और लाठीचार्ज में तीन छात्र घायल हुए हैं — किसी का सिर फूटा, किसी का पैर टूटा।
नाबालिग छात्रों की न्यायिक हिरासत पर चिंता
कांग्रेस नेता ने बताया कि 15 से 17 वर्ष के किशोरों को हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के परिजन उनके भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। उनके अनुसार, इन सभी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय होना अत्यंत आवश्यक है।
सवाल और आगे की राह
रागिनी नायक ने सवाल उठाया कि दिल्ली में पैलेट गन किसके आदेश पर चलाई गई और सिवान में एके-47 चलाने का निर्देश कहाँ से आया — दिल्ली से या मुख्यमंत्री के स्तर पर। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह सिद्ध किया है कि देश पुलिस की लाठी से नहीं, छात्रों की आवाज़ से चलता है। यह पूरा विवाद आने वाले दिनों में संसदीय सत्र और राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।