नीट पेपर लीक पीड़ित परिवारों से मिले राहुल गांधी, PM मोदी से माँगी माफी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 अगस्त को महाबलीपुरम, तमिलनाडु में उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के बाद अपने बच्चों को आत्महत्या में खो दिया। इस मुलाकात में गांधी ने शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी और देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
परिजनों से मुलाकात और भावुक संदेश
राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर परिवारों के साथ मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आँसू, उनका बिलखना — इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। यह गम उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा प्रणाली के बारे में कई सवाल।'
उन्होंने आगे कहा, 'पेपर लीक, रद्द परीक्षाएँ, सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद... हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है।'
PM मोदी पर सीधा हमला
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस कथित टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने छात्रों को 'माफ' करने की बात कही थी। गांधी ने कहा, 'भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की जरूरत नहीं — प्रधानमंत्री मोदी को उनसे माफी माँगनी चाहिए।'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री एक भी शोकाकुल परिवार से मिले, जिन्होंने अपना बच्चा खोया, या उन छात्रों से जिनकी 'जमा पूंजी, जिंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए।' उनका जवाब था — 'नहीं।'
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
नीट-यूजी 2024 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों ने देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था। तमिलनाडु में कई छात्रों ने कथित तौर पर इस विवाद के मानसिक दबाव में आत्महत्या की। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पहले से ही परीक्षा संचालन में पारदर्शिता को लेकर आलोचनाओं के घेरे में थी।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय भी नीट-यूजी मामले की सुनवाई कर चुका है और केंद्र सरकार से जवाब माँग चुका है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की दिशा
राहुल गांधी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब विपक्षी दल नीट मुद्दे को संसद से सड़क तक उठाने में जुटे हैं। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा सुधार और NTA के पुनर्गठन पर सरकार की प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही है। पीड़ित परिवारों के साथ इस प्रत्यक्ष संपर्क से कांग्रेस ने इस मुद्दे को मानवीय चेहरा देने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर संसद और अदालत दोनों में और घमासान देखने को मिल सकता है।