13 जुलाई 2026
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राजगीर मलमास मेले का पहला शाही स्नान संपन्न, ब्रह्मकुंड में उमड़े देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु

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राजगीर मलमास मेले का पहला शाही स्नान संपन्न, ब्रह्मकुंड में उमड़े देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु

सारांश

हर तीसरे वर्ष आयोजित राजगीर मलमास मेले में 27 मई को पहला शाही स्नान संपन्न हुआ। पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के संयोग पर ब्रह्मकुंड में उदासीन अखाड़े से लेकर कई संप्रदायों के साधु-संत और नेपाल-श्रीलंका तक के श्रद्धालु एकत्रित हुए। मेला 15 जून तक चलेगा।

मुख्य बातें

राजगीर मलमास मेले का पहला शाही स्नान 27 मई 2026 को पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के संयोग पर संपन्न हुआ।
स्नान की शुरुआत उदासीन अखाड़े के संतों ने गुरुनानक कुंड से की, अंत ब्रह्मकुंड पर हुआ।
मेले में नेपाल और श्रीलंका सहित देश-विदेश से साधु-संत व श्रद्धालु पहुंचे।
राजगीर के 22 गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान का विशेष महत्व; मेले में कुल 3 शाही स्नान होंगे।
मेला 15 जून 2026 तक चलेगा; प्रत्येक अखाड़े के साथ मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात।

राजगीर (बिहार) में 27 मई 2026 को मलमास मेले का पहला शाही स्नान पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के पावन संयोग पर ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ होकर दोपहर तक चला। ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र कुंडों पर विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, महंत और देश-विदेश से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। यह आयोजन आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा संगम बना।

शाही स्नान का क्रम और परंपरा

परंपरा के अनुसार शाही स्नान की विधिवत शुरुआत उदासीन अखाड़े के संतों ने की। साधु-संतों का पहला स्नान गुरुनानक कुंड में हुआ, जिसके बाद संतों का जत्था सरस्वती नदी और सप्तधारा होते हुए मुख्य ब्रह्मकुंड पहुंचा। वहाँ पवित्र स्नान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ अनुष्ठान संपन्न किए गए।

इस भव्य यात्रा में खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा संप्रदाय तथा सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा समेत अनेक अखाड़ों के महंत और संत पारंपरिक ध्वज-पताका और जयघोष के साथ शामिल हुए। साधु-संतों का स्नान पूरा होने के पश्चात ही आम श्रद्धालुओं के लिए ब्रह्मकुंड परिसर खोला गया।

प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम

जिला प्रशासन ने शाही स्नान को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक प्रबंध किए। अखाड़ों के साधु-संतों के जत्थों को निर्धारित रेड कॉरिडोर से सीधे ब्रह्मकुंड तक पहुंचाया गया। प्रत्येक अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी की तैनाती की गई।

सभी प्रमुख स्नान स्थलों, मार्गों और मेला क्षेत्र में पुलिस बल, दंडाधिकारी तथा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से कतारबद्ध कर कुंडों तक पहुंचाया गया, जिससे यातायात और भीड़ प्रबंधन सुचारु रहा।

मलमास मेले का धार्मिक महत्व

राजगीर मलमास मेला हर तीसरे वर्ष आयोजित होता है और इसका धार्मिक महत्व देशभर में विशेष माना जाता है। मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं और यहाँ के पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान से पापों का नाश तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।

यह मेला 15 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें राजगीर के 22 पवित्र गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान का विशेष महत्व है। मेले में कुल तीन शाही स्नान होंगे, साथ ही अनेक धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

आम जनता पर असर और श्रद्धालुओं की भागीदारी

मंगलवार की रात से ही राजगीर में श्रद्धालुओं और साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया था। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलकामना की।

मेले में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और श्रीलंका से भी साधु-संत एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं। आने वाले दिनों में शेष दो शाही स्नान तिथियों पर भीड़ और बढ़ने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियाँ की हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का प्रतीक है — फिर भी हर तीन साल में एक बार आने वाले इस मेले के लिए स्थायी बुनियादी ढाँचे की कमी बार-बार उजागर होती है। नेपाल और श्रीलंका तक से श्रद्धालुओं का आना इसके अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है, लेकिन भीड़ प्रबंधन अभी भी मुख्यतः अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्भर है। प्रशासन की तत्परता सराहनीय है, पर सवाल यह है कि क्या इस आस्था की विरासत को दीर्घकालिक विकास योजना का हिस्सा बनाया जाएगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजगीर मलमास मेला क्या है और यह कब होता है?
राजगीर मलमास मेला बिहार के राजगीर में हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाला प्रमुख धार्मिक मेला है। मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं और यहाँ के पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान से पुण्य की प्राप्ति होती है।
2026 में राजगीर मलमास मेले का पहला शाही स्नान कब हुआ?
पहला शाही स्नान 27 मई 2026 को पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के संयोग पर ब्रह्म मुहूर्त से दोपहर तक चला। उदासीन अखाड़े के संतों ने गुरुनानक कुंड से इसकी विधिवत शुरुआत की।
राजगीर मलमास मेला 2026 कब तक चलेगा?
यह मेला 15 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान कुल तीन शाही स्नान, 22 पवित्र गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान, तथा अनेक धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
शाही स्नान में कौन-कौन से अखाड़े शामिल हुए?
शाही स्नान में उदासीन अखाड़े के अलावा खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा संप्रदाय और सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा समेत कई अखाड़ों के महंत और संत शामिल हुए।
मेले में प्रशासन ने सुरक्षा के क्या इंतजाम किए?
जिला प्रशासन ने प्रत्येक अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात किए। साधु-संतों को रेड कॉरिडोर से ब्रह्मकुंड तक पहुंचाया गया और उनका स्नान पूरा होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए परिसर खोला गया।
राष्ट्र प्रेस
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