राजनाथ सिंह का AFHQ सिविलियन सर्विस दिवस पर आह्वान: रक्षा सहयोगी संस्थाएं भी विकसित हों
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सशस्त्र सेना मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विस दिवस के अवसर पर स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे भारत की सशस्त्र सेनाएं प्रौद्योगिकी, उद्योग और नवाचार के साथ गहरे जुड़ती जा रही हैं, उनकी सहायक संस्थाओं को भी उसी गति से विकसित होना अनिवार्य है। उन्होंने AFHQ सिविलियन सेवाओं को रक्षा मंत्रालय की 'संस्थागत स्मृति' बताते हुए उनकी भूमिका को और अधिक सक्रिय एवं पेशेवर बनाने का आग्रह किया।
मुख्य संबोधन के बिंदु
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी सेना की शक्ति केवल हथियारों और गोला-बारूद तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन हजारों 'अदृश्य हाथों' से भी आती है जो सेना के पीछे खड़े होकर उसे निरंतर सहयोग देते हैं। उनके अनुसार, AFHQ सिविलियन सेवाएं इन्हीं निर्णायक लेकिन अदृश्य शक्तियों में से एक हैं।
उन्होंने रेखांकित किया कि आज भारतीय सशस्त्र सेनाएं अधिक संयुक्तता (Jointness) और एकीकरण (Integration) की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे परिवेश में AFHQ सिविलियन सेवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि वे अपनी भूमिका को पुनः परिभाषित करें।
सैन्य-नागरिक समन्वय पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा, 'मेरा मानना है कि सैन्य और नागरिक घटकों के बीच भी संयुक्तता और एकीकरण के नए आयामों पर विचार होना चाहिए, ताकि संस्थागत स्मृति, संस्थागत स्थिरता तथा नियमों एवं विनियमों के प्रभावी अनुप्रयोग के साथ रक्षा तंत्र में और अधिक संयुक्तता लाई जा सके।' उन्होंने AFHQ संवर्ग को ऐसी संस्था बताया जो रक्षा मंत्रालय को निरंतरता, विषयगत विशेषज्ञता और नीतिगत स्थिरता प्रदान करती है और नागरिक-सैन्य समन्वय में एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाती है।
विस्तारित भूमिका का आह्वान
राजनाथ सिंह ने AFHQ कर्मियों से आग्रह किया कि वे अपने निर्धारित दायित्वों से आगे बढ़कर रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान, भू-रणनीतिक चिंतन और नवीन विचारों के माध्यम से देश के रक्षा तंत्र को सशक्त बनाने में योगदान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी नागरिक रक्षा सेवा अब पुरानी सोच और पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रह सकती — उसे समय के साथ नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी।
भविष्य की दिशा
रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में AFHQ सिविलियन सेवाओं को रक्षा प्रबंधन के एक पेशेवर संवर्ग के रूप में विकसित किया जाना चाहिए — ऐसा संवर्ग जो रक्षा क्षेत्र के विभिन्न आयामों की गहरी समझ रखे, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके और बदलती सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अपनी विशेषज्ञता को लगातार उन्नत करता रहे।
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत थिएटर कमांड के गठन और त्रि-सेवा एकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है, जिससे नागरिक रक्षा प्रशासन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।