राम नवमी पर भक्ति का अद्भुत संगम: ऋषि अग्निबिंदु से जुड़ा बिंदु माधव मंदिर

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राम नवमी पर भक्ति का अद्भुत संगम: ऋषि अग्निबिंदु से जुड़ा बिंदु माधव मंदिर

सारांश

रामनवमी का पर्व 27 मार्च को है, जिसमें भक्त विशेष रूप से बिंदु माधव मंदिर में जाकर भगवान राम और विष्णु की संयुक्त भक्ति का अनुभव करते हैं।

Key Takeaways

  • राम नवमी का पर्व 27 मार्च को मनाया जाता है।
  • बिंदु माधव मंदिर वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित है।
  • यह मंदिर ऋषि अग्निबिंदु से जुड़ा हुआ है।
  • भगवान राम और विष्णु की संयुक्त भक्ति का अनुभव यहाँ होता है।
  • मंदिर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10:30 बजे तक खुला रहता है।

वाराणसी, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव, जिसे रामनवमी के नाम से जाना जाता है, २७ मार्च को मनाया जाएगा। यह उत्सव विश्वभर में भक्तों द्वारा उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। भक्त पूजा-पाठ के साथ नारायण के दर्शन करने के लिए देवालयों में जाते हैं। काशी, जिसे श्रीकाशी विश्वनाथ की नगरी कहा जाता है, में गंगा, शिव और ज्ञान का अद्भुत संगम है। इसी संगम के बीच स्थित है नारायण को समर्पित एक भव्य मंदिर, जिसकी मान्यता ऋषि अग्निबिंदु से जुड़ी हुई है।

वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित इस मंदिर का नाम बिंदु माधव मंदिर है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान नारायण ‘बिंदु माधव’ या ‘बूंदों के स्वामी’ के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर केवल विष्णु भक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि रामनवमी के अवसर पर भक्त यहाँ भगवान राम और विष्णु के एकत्व का अनुभव करते हैं।

उत्तर प्रदेश की काशी गवर्मेंट पोर्टल के अनुसार, पंचगंगा घाट से ऊपर जाती सीढ़ी एक साधारण पत्थर के हॉल तक पहुँचती है। यहाँ कोई तड़क-भड़क नहीं है, केवल पौराणिक कथाओं और शांत भक्ति की गूंज है। इस हॉल में प्राचीन बिंदु माधव मंदिर स्थित है। किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर की उत्पत्ति ऋषि अग्निबिंदु से हुई है। ऋषि ने यहाँ तपस्या की और पवित्र जल की बूंदों को पीकर जीवन व्यतीत किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि वह सदैव यहाँ निवास करेंगे। इसीलिए उनका नाम ‘बिंदु माधव’ रखा गया, जिसका अर्थ है ‘बूंदों के स्वामी’।

यह मंदिर ‘पंच माधव’ मंदिरों में से एक है, जहां सच्ची भक्ति से मनुष्यों के कर्मों के पाप धुल जाते हैं। रामनवमी के दिन भक्त इस मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान राम विष्णु के अवतार हैं, इसलिए रामनवमी पर बिंदु माधव मंदिर में राम-विष्णु की संयुक्त भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। श्रद्धालु यहाँ दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की कामना करते हैं।

मोक्षनगरी का यह मंदिर दुनिया की भागदौड़ से राहत प्रदान करता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर कभी अत्यंत भव्य रहा है। १७वीं शताब्दी के फ्रांसीसी यात्री जीन बप्तिस्त टैवर्नियर ने अपने यात्रा वर्णन में इसकी प्रशंसा की थी। उन्होंने बताया कि मंदिर ‘क्रॉस’ (एक्स) के आकार का पैगोडा था, जिसमें भगवान विष्णु की छह फुट ऊंची प्रतिमा रत्नों, माणिकों और मोतियों की मालाओं से सजी हुई थी। वर्ष १६६९ में इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया, लेकिन प्रतिमा को गुप्त रूप से बचा लिया गया।

१९वीं शताब्दी में मराठा शासक भवान राव ने एक नए साधारण मंदिर का निर्माण कराया और प्राचीन प्रतिमा को पुनर्स्थापित किया। आज मंदिर में भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला और प्रतिमा स्थापित है, जिसके दोनों ओर गरुड़ और हनुमान जी विराजमान हैं। जानकारी के अनुसार, ये प्रतिमाएं पुराने मंदिर के मलबे से बचाई गई हैं। कम ऊंचाई वाले हॉल में श्रद्धालु कीर्तन और जप करते हैं।

हर वर्ष कार्तिक मास में यह मंदिर दीपों से जगमगा उठता है। धार्मिक ग्रंथों का पाठ होता है और दूर-दूर से भक्त पापों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। रामनवमी पर भी यहाँ विशेष सजावट और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जो भक्ति भाव को और गहरा करता है।

बिंदु माधव मंदिर, पंचगंगा घाट के रतन फाटक, घसी टोला क्षेत्र में स्थित है। मंदिर जाने के लिए कैंट रेलवे स्टेशन से ऑटो, रिक्शा या कैब का उपयोग किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की रोडवेज बसें भी उपलब्ध हैं। मंदिर प्रतिदिन सुबह ५ बजे से रात १०:३० बजे तक खुला रहता है।

Point of View

बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है।
NationPress
27/03/2026

Frequently Asked Questions

राम नवमी कब मनाई जाती है?
राम नवमी हर वर्ष 27 मार्च को मनाई जाती है।
बिंदु माधव मंदिर कहाँ स्थित है?
बिंदु माधव मंदिर वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित है।
इस मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
यह मंदिर विष्णु भक्ति का केंद्र है और यहाँ भगवान राम और विष्णु की संयुक्त भक्ति का अनुभव किया जाता है।
मंदिर में जाने का समय क्या है?
मंदिर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10:30 बजे तक खुला रहता है।
बिंदु माधव का क्या अर्थ है?
बिंदु माधव का अर्थ है 'बूंदों के स्वामी'।
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