रांची पेपर लीक आंदोलन: वार्ता से पहले देवेंद्र नाथ महतो की माँग — 'आजीवन कारावास का प्रावधान हो'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार और रांची में 15 दिनों से आंदोलनरत छात्रों के बीच 17 अगस्त 2026 को होने वाली वार्ता से पहले अनशनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने ठोस सुधारों की माँग रखी है। उन्होंने कहा कि इस वार्ता से पीढ़ी दर पीढ़ी आने वाले छात्रों को पेपर लीक और धांधली से मुक्ति मिलनी चाहिए।
मुख्य माँगें और आंदोलन की पृष्ठभूमि
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि पेपर लीक में शामिल दोषियों के लिए आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक ऐसा सिस्टम बनाए और उसकी गारंटी दे, जिससे भविष्य में किसी भी परीक्षा में धांधली न हो सके।
महतो ने 29 जनवरी 2024 का हवाला देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद सीजीएल परीक्षा रद्द कराई गई थी, लेकिन दोबारा हुई परीक्षा में भी पेपर लीक और धांधली की शिकायतें सामने आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि इसकी क्या गारंटी है कि अगली बार सीजीएल परीक्षा पारदर्शी होगी।
जाँच प्रक्रिया पर संदेह
महतो ने कहा कि उन्होंने जीवन में कई बार सीआईडी और सीबीआई जाँच होते देखी है, लेकिन इन जाँचों से छात्रों को वास्तविक न्याय नहीं मिल पाता। उनके अनुसार, जाँच के दौरान कुछ समय के लिए जीत का आभास होता है, परंतु परिणाम निराशाजनक रहते हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रतिक्रिया
सदर अस्पताल में भर्ती प्रदर्शनकारी छात्र राहुल क्रांति ने सरकार के रवैये पर गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, 'सरकार के रवैये और उसके बयानों को देखते हुए हमें नहीं लगता कि बातचीत सफल होगी।'
राहुल क्रांति की माँगों में सीबीआई जाँच, 11 से 13 जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करना, सीजीएल परीक्षा रद्द करना और 2019 के बाद हुई सभी परीक्षाओं की जाँच शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत-1 और हेमंत-2 दोनों सरकारों के कार्यकाल में परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ है।
राहुल क्रांति ने यह भी आरोप लगाया कि एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी को टेंडर देकर नौकरियाँ बेचने का काम किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें छह महीने के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी दी जाए, तो वे परीक्षाओं में सुधार और झारखंड के युवाओं का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।
आम जनता और राज्य पर असर
आंदोलन को पूरे झारखंड से समर्थन मिला है। 15 दिनों की भूख हड़ताल के बाद भी छात्रों का हौसला बुलंद है। यह आंदोलन ऐसे समय में तेज़ हुआ है जब झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच 17 अगस्त को होने वाली वार्ता का परिणाम ही तय करेगा कि क्या इस आंदोलन का कोई ठोस हल निकल पाता है। देवेंद्र नाथ महतो ने उम्मीद जताई है कि वार्ता में पेपर लीक विरोधी कड़े कानून और परीक्षा सुधारों पर सहमति बनेगी।