रिम्स-2 निर्माण विरोध: नगड़ी के आदिवासी-किसानों का रांची मार्च, मुख्यमंत्री आवास से पहले पुलिस ने रोका
सारांश
मुख्य बातें
रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल 'रिम्स-2' के निर्माण के विरोध में 11 जून 2026 को आदिवासी संगठनों और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों और आदिवासी समुदाय के लोगों ने पैदल मार्च निकाला। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस-प्रशासन ने कांके ब्लॉक चौक के समीप बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी अपनी माँगें मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए पैदल मार्च पर निकले थे। कांके ब्लॉक चौक के पास बैरिकेड लगाए जाने के बाद प्रशासन ने रैली को कांके प्रखंड कार्यालय की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते रहे।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
आंदोलनकारियों का कहना है कि नगड़ी क्षेत्र की भूमि अत्यंत उपजाऊ है और यहाँ की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। उनका आरोप है कि कृषि भूमि पर रिम्स-2 जैसे बड़े निर्माण कार्य से किसानों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि झारखंड सरकार यह चिकित्सा संस्थान बनाना चाहती है, तो बंजर या गैर-कृषि भूमि का चयन किया जाए।
आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और भविष्य से जुड़ा सवाल है। रैली में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर विरोध की आवाज़ें उठती रही हैं। ग्रामीणों और किसान संगठनों का कहना है कि परियोजना के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण से बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित होंगे। यह आंदोलन ऐसे समय में और तेज़ हुआ है जब झारखंड में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर संवेदनशीलता पहले से ही अधिक है।
प्रदर्शनकारियों का रुख
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सड़क मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई तो वे अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार तक अपनी बात पहुँचाएँगे।
आगे क्या
प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास में जुटे हैं। नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति ने संकेत दिया है कि जब तक सरकार वैकल्पिक भूमि पर विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।