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रांची: यौन उत्पीड़न मामले में स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा को 3 साल कारावास, ₹10,000 जुर्माना

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रांची: यौन उत्पीड़न मामले में स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा को 3 साल कारावास, ₹10,000 जुर्माना

सारांश

रांची की अदालत ने तीन साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में था।

मुख्य बातें

रांची के अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने 22 मई को पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा को 3 वर्ष कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला मई 2022 का है — पीड़िता नर्सिंग स्टाफ ने अरगोड़ा थाना, रांची में एफआईआर दर्ज कराई थी।
आरोपी एफआईआर के बाद फरार हुआ; पुलिस ने जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से 4 दिन बाद गिरफ्तार किया।
झारखंड हाईकोर्ट ने 20 जून 2025 को जमानत रद्द की; सर्वोच्च न्यायालय ने भी राहत देने से इनकार किया।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सरेंडर के बाद से आरोपी न्यायिक हिरासत में रहकर ट्रायल का सामना कर रहा था।

रांची की एक अदालत ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल के पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार सिन्हा उर्फ एमके सिन्हा को स्कूल की नर्सिंग स्टाफ के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया। यह मामला मई 2022 का है, जब पीड़िता ने रांची के अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

मुख्य घटनाक्रम

रांची के अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार (नंबर-2) की अदालत ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूर्व प्राचार्य को दोषी करार दिया था। इसके अगले दिन शुक्रवार को सजा का ऐलान किया गया। यह मामला तीन वर्षों से अधिक समय तक कानूनी उतार-चढ़ाव से गुज़रा।

पीड़िता के आरोप

पीड़िता नर्सिंग स्टाफ ने अपनी शिकायत में कहा था कि तत्कालीन प्रिंसिपल एमके सिन्हा उसे ब्लड प्रेशर जाँचने के बहाने बार-बार अपने चैंबर में बुलाते थे। पीड़िता के अनुसार, इस दौरान वे अश्लील हरकतें करते थे और शारीरिक संबंध बनाने के लिए लगातार मानसिक व प्रशासनिक दबाव डालते थे।

गिरफ्तारी और जमानत का सफर

एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी कडरू से फरार हो गया था। पुलिस ने तकनीकी सेल की सहायता से चार दिन बाद उसे जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे पीड़िता ने चुनौती दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 20 जून 2025 को एमके सिन्हा की जमानत रद्द कर दी। इस फैसले को चुनौती देने के लिए पूर्व प्रिंसिपल सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा। सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया, जिसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में रहते हुए ट्रायल का सामना कर रहा था।

आगे क्या

सजा सुनाए जाने के साथ यह मामला निचली अदालत में अपने तार्किक अंत तक पहुँचा। दोषी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यह फैसला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा कानूनी ढाँचा सत्ता के पद पर बैठे उत्पीड़कों के लिए पर्याप्त निवारक है। इस मामले ने यह भी उजागर किया कि तकनीकी सेल की भूमिका के बिना गिरफ्तारी में और देरी हो सकती थी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमके सिन्हा को किस मामले में सजा मिली है?
रांची के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल के पूर्व प्राचार्य एमके सिन्हा को स्कूल की नर्सिंग स्टाफ के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में 3 वर्ष कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह मामला मई 2022 में दर्ज हुआ था।
यह मामला अदालत में इतने वर्षों तक क्यों चला?
नवंबर 2022 में झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने उसे चुनौती दी। जून 2025 में हाईकोर्ट ने जमानत रद्द की, और सर्वोच्च न्यायालय ने भी आरोपी की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद सरेंडर और न्यायिक हिरासत में ट्रायल पूरा हुआ।
पीड़िता ने क्या आरोप लगाए थे?
पीड़िता नर्सिंग स्टाफ ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रिंसिपल उसे ब्लड प्रेशर जाँचने के बहाने चैंबर में बुलाते थे और अश्लील हरकतें करते थे। साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए मानसिक व प्रशासनिक दबाव डाला जाता था।
आरोपी की गिरफ्तारी कैसे हुई?
एफआईआर दर्ज होने के बाद एमके सिन्हा कडरू से फरार हो गया था। पुलिस ने तकनीकी सेल की मदद से चार दिन बाद उसे जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेजा।
दोषी के पास अब क्या कानूनी विकल्प हैं?
निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दोषी एमके सिन्हा झारखंड हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय पहले ही उसकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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