सरदार पटेल की 151वीं जयंती: गौतमबुद्धनगर में राष्ट्रीय एकता दिवस पर अधिकारियों ने ली एकता की शपथ
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर के कलेक्ट्रेट सभागार में 31 अक्टूबर 2026 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में योगदान को स्मरण करते हुए देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। यह आयोजन प्रतिवर्ष उस महान नेता की विरासत को जीवंत रखने के उद्देश्य से आयोजित होता है जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद देश को एकसूत्र में पिरोया था।
मुख्य घटनाक्रम
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अजीत कुमार ने सरदार वल्लभभाई पटेल के छायाचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इसके पश्चात उन्होंने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनुराग सारस्वत सहित कलेक्ट्रेट के तमाम अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
शपथ में क्या संकल्प लिए गए
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने देश की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास करने का वचन दिया। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि सरदार पटेल की दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण से स्थापित एकता की भावना को वे सदैव बनाए रखेंगे। साथ ही देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की प्रतिज्ञा की गई।
एडीएम का संबोधन
एडीएम अजीत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस महज एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन देशसेवा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण की अनवरत प्रेरणा देता है। एडीएम ने सभी से अपील की कि वे समाज में राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाएँ और आपसी भाईचारे एवं सद्भाव की भावना को मजबूत करें।
सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका
गौरतलब है कि देश की आज़ादी के बाद 500 से अधिक रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका को इतिहास में अप्रतिम माना जाता है। उनकी इसी दृढ़ता और कूटनीतिक क्षमता के चलते उन्हें 'लौह पुरुष' की उपाधि दी गई। राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को उनकी जयंती पर मनाया जाता है, ताकि उनकी राष्ट्रवादी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
आगे की दिशा
इस कार्यक्रम के माध्यम से जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी तंत्र केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मूल्यों के प्रसार में भी अपनी भूमिका निभाता है। ऐसे आयोजन नागरिकों और प्रशासन के बीच राष्ट्रीय चेतना को जीवंत बनाए रखने में सहायक होते हैं।