रथ यात्रा विविधता में एकता का प्रतीक: त्रिपुरा CM माणिक साहा ने मेलाघर में किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने बुधवार, 15 जुलाई को कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सद्भाव और 'विविधता में एकता' की अटूट भावना का जीवंत प्रतीक है। सेपाहिजला जिले के मेलाघर स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ बारी में नौ दिवसीय पारंपरिक रथ यात्रा उत्सव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने नागरिकों से इस पर्व के समानता, समावेशिता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के संदेश को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
उत्सव का आयोजन और स्वरूप
इस वर्ष के रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन सेपाहिजला जिला प्रशासन, सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग और मेलाघर नगर परिषद द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए साहा ने कहा कि यह उत्सव भगवान जगन्नाथ के मंदिर से बाहर आकर समस्त भक्तों को आशीर्वाद देने का प्रतीक है — एक ऐसा शाश्वत संदेश जो सभी धर्मों और समुदायों को शांति एवं सद्भाव से एकजुट करता है।
मुख्यमंत्री ने इसे महज एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा, सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है और लोगों के बीच भाईचारे के बंधन को और सुदृढ़ करता है।
राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व
त्योहार के व्यापक महत्व पर प्रकाश डालते हुए साहा ने कहा कि पुरी में होने वाली रथ यात्रा देश का सर्वाधिक प्रसिद्ध रथ उत्सव है, जबकि पश्चिम बंगाल के महेशपुर और मायापुर में भी इसी तरह के भव्य आयोजन होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस्कॉन के माध्यम से यह त्योहार अब एक वैश्विक आयोजन बन चुका है, जो विश्वभर में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रतिष्ठित करता है।
गौरतलब है कि रथ यात्रा का उल्लेख ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलता है — एक तथ्य जिसे मुख्यमंत्री ने इस पर्व की सनातन प्रासंगिकता को रेखांकित करने के लिए उद्धृत किया।
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर जोर
साहा ने भारत की सभ्यतागत धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और युवा पीढ़ी से आधुनिकता को अपनाते हुए देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का अनुरोध किया। उन्होंने धार्मिक धरोहर स्थलों के विकास के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल लोक, सोमनाथ मंदिर, चार धाम तीर्थ केंद्र, करतारपुर साहिब कॉरिडोर और बौद्ध सर्किट जैसी परियोजनाओं का विशेष उल्लेख किया — यह दर्शाते हुए कि धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
सामाजिक सद्भाव का आह्वान
यह उत्सव ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब देशभर में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की चर्चा तेज है। साहा का यह संबोधन रथ यात्रा को एक धार्मिक अनुष्ठान से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय एकता के मंच के रूप में प्रस्तुत करता है। मेलाघर का यह नौ दिवसीय महोत्सव आने वाले दिनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्ति आयोजनों के साथ जारी रहेगा।