त्रिपुरा विधानसभा का 63वाँ स्थापना दिवस: जितेंद्र चौधरी बोले — यह संस्था त्याग और संघर्ष की विरासत है
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा विधानसभा के 63वें स्थापना दिवस पर 1 जुलाई 2026 को अगरतला में आयोजित विशेष कार्यक्रम में विपक्ष के नेता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] विधायक जितेंद्र चौधरी ने कहा कि त्रिपुरा विधानसभा महज एक इमारत नहीं, बल्कि अनगिनत लोगों के त्याग, समर्पण और संघर्ष का जीवंत प्रतीक है। राज्यपाल ने भी इस अवसर पर त्रिपुरा के 40 लाख नागरिकों को बधाई दी और इसे लोकतंत्र के असली हिस्सेदारों का उत्सव बताया।
समारोह का मुख्य घटनाक्रम
स्थापना दिवस समारोह में जितेंद्र चौधरी ने विधानसभा की स्थापना से जुड़े योगदानकर्ताओं को याद किया। उन्होंने त्रिपुरा टेरिटोरियल काउंसिल के दौर में जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन दिवंगत जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से नमन किया गया, जिन्होंने राज्य के लोकतांत्रिक ढाँचे की नींव रखी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और लोकतंत्र की जड़ें
चौधरी ने रेखांकित किया कि विधानसभा का इतिहास केवल उसके भवन-निर्माण तक सीमित नहीं है। इसकी जड़ें उस कालखंड में हैं जब त्रिपुरा एक रियासत हुआ करती थी और राजशाही शासन के विरुद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था की माँग को लेकर व्यापक जन-आंदोलन हुए थे। उन्होंने कहा कि उन संघर्षों की विरासत ही आज इस संस्था को अर्थ देती है।
जनप्रतिनिधित्व और चुनावी परंपरा
विपक्ष के नेता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर पाँच वर्ष में चुनाव के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है, जिससे लोकतांत्रिक परंपराएँ निरंतर सुदृढ़ होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे दलीय हों या निर्दलीय, सभी जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाया है।
राज्यपाल का संबोधन
त्रिपुरा के राज्यपाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 63वें स्थापना दिवस पर इस सदन में उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है। उन्होंने सदन के प्रत्येक सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी और त्रिपुरा के 40 लाख नागरिकों को — जिन्हें उन्होंने 'लोकतंत्र के असली हिस्सेदार' कहा — हार्दिक बधाई दी।
आगे का संदर्भ
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब त्रिपुरा में राजनीतिक विमर्श सक्रिय है और विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रासंगिकता को जन-चेतना के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि CPI(M) दशकों तक त्रिपुरा में सत्तारूढ़ रही है और विधानसभा के इतिहास से उसका गहरा नाता रहा है। स्थापना दिवस जैसे अवसर सभी दलों को साझा लोकतांत्रिक विरासत की याद दिलाते हैं।