रविदास मेहरोत्रा का आरोप: निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों का तबादला लोकतंत्र के लिए खतरा है।
- रविदास मेहरोत्रा ने यूपी चुनाव का भी जिक्र किया।
- भाजपा विपक्षी नेताओं को खरीदने की कोशिश कर रही है।
लखनऊ, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के दौरान अधिकारियों के तबादले पर तंजचुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव के प्रति गंभीर नहीं है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मेहरोत्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा किया गया है। लेकिन, राज्य सरकार की सहमति के बिना डीजीपी और गृह सचिव का तबादला करना लोकतंत्र की हत्या के समान है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अन्य राज्यों में भी चुनावों से पहले अधिकारियों के तबादले होंगे?
मेहरोत्रा ने यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वे यह देखना चाहेंगे कि क्या चुनाव आयोग वहां भी बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले करेगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के द्वारा जिस प्रकार से डीजीपी और गृह सचिव को हटाया गया है, यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। ऐसा लगता है कि आयोग निष्पक्ष चुनाव नहीं चाहता।
इसके अलावा, उन्होंने फिल्म 'धुरंधर 2' में माफिया डॉन अतीक अहमद के आईएसआई से संबंधों को लेकर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर कोई आईएसआई के साथ काम कर रहा था, तो इसकी जांच किसने की? सरकार को जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए।
मेहरोत्रा ने असम में होने वाले विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया और कहा कि सत्ताधारी भाजपा विपक्षी नेताओं को खरीदने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को वहां हार का सामना करना पड़ेगा।