रामागुंडम आरएफसीएल में अमोनिया रिसाव से यूरिया उत्पादन ठप, 7 राज्यों की आपूर्ति पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले में स्थित रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) को 9 जुलाई 2026 को अमोनिया पाइपलाइन में रिसाव के कारण पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की इस प्रमुख इकाई में यूरिया उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। सूत्रों के अनुसार, तकनीकी खराबी के चलते हुए इस रिसाव का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है और उत्पादन पुनः शुरू होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार अमोनिया पाइपलाइन में तकनीकी खराबी के कारण रिसाव हुआ, जिसके बाद प्लांट की सभी उत्पादन इकाइयाँ बंद करनी पड़ीं। यह इस वर्ष दूसरी बार है जब आरएफसीएल को अमोनिया रिसाव के कारण बंद करना पड़ा है — इससे पहले मार्च 2026 में भी प्लांट करीब एक सप्ताह तक बंद रहा था।
गौरतलब है कि 3,850 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला यह प्लांट मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण गैस की आपूर्ति में कमी के चलते पहले से ही 50 प्रतिशत क्षमता पर संचालित हो रहा था। ऐसे में यह बंदी उत्पादन पर दोहरा झटका है।
आम जनता और किसानों पर असर
यूरिया उत्पादन ठप होने से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पाँच अन्य राज्यों को उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब खरीफ फसल का मौसम चल रहा है और किसानों को यूरिया की सख्त जरूरत है, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।
चूँकि आरएफसीएल तेलंगाना के लिए यूरिया का एकमात्र स्थानीय स्रोत है, इसलिए राज्य सरकार केंद्र सरकार से माँग कर रही है कि इस प्लांट से उत्पादित संपूर्ण यूरिया को तेलंगाना को ही आवंटित किया जाए।
सरकार की प्रतिक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था
इस संकट के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों को रियायती यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक वैकल्पिक कदम उठाया है। राज्य के कृषि विभाग ने राज्यभर के सभी मीसेवा केंद्रों पर यूरिया बुकिंग सेवा शुरू की है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और समय पर वितरण हो सके।
जो किसान उर्वरक बुकिंग ऐप के माध्यम से यूरिया बुक नहीं कर पा रहे हैं, वे अपने निकटतम मीसेवा केंद्र पर जाकर ऑपरेटर की सहायता से बुकिंग कर सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग मंत्री दुद्दिला श्रीधर बाबू के नेतृत्व में कार्यरत मीसेवा, कृषि विभाग के सहयोग से इस पहल को आगे बढ़ा रही है।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूरिया की माँग खरीफ सीजन के चरम पर होती है और किसी भी आपूर्ति व्यवधान का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। आरएफसीएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उर्वरक संयंत्रों पर कई राज्यों की निर्भरता इस बंदी को महज एक औद्योगिक घटना से कहीं अधिक बनाती है।
आने वाले दिनों में प्लांट की मरम्मत की प्रगति और केंद्र सरकार द्वारा वैकल्पिक यूरिया आवंटन की दिशा में उठाए जाने वाले कदम निर्णायक होंगे।