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रोहित पवार ने CM फडणवीस को पत्र लिखा, चांदीवाल आयोग की 1,400 पन्नों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग

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रोहित पवार ने CM फडणवीस को पत्र लिखा, चांदीवाल आयोग की 1,400 पन्नों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग

सारांश

रोहित पवार ने CM फडणवीस को पत्र लिखकर चांदीवाल आयोग की वह रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की जो अनिल देशमुख पर ₹100 करोड़ के कथित घोटाले की जाँच से जुड़ी है। रिपोर्ट अप्रैल 2022 में सरकार को सौंपी गई थी — चार साल बाद भी रहस्य बना हुआ है।

मुख्य बातें

रोहित पवार (एनसीपी-एसपी) ने 18 सितंबर 2026 को CM देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर चांदीवाल आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की।
न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल आयोग ने 1,400 पन्नों की रिपोर्ट 26 अप्रैल 2022 को राज्य सरकार को सौंपी थी।
रिपोर्ट पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर कथित ₹100 करोड़ के घोटाले के आरोपों की जाँच से संबंधित है।
अनिल देशमुख ने स्वयं मुख्यमंत्री को 13 बार और राज्यपाल को 2 बार रिपोर्ट जारी करने के लिए पत्र लिखे हैं।
चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता और विधायक रोहित पवार ने 18 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर माँग की है कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगे कथित आरोपों की जाँच के लिए गठित न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक किया जाए। चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह रिपोर्ट दबाकर रखे जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से 'सच को सामने लाने' की अपील की है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2021 से जुड़ा है, जब तत्कालीन राज्य गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सुनी-सुनाई जानकारी के आधार पर कथित तौर पर ₹100 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया गया था। राज्य सरकार ने आरोपों की सच्चाई जानने के लिए 30 मार्च 2021 को 'जाँच आयोग अधिनियम, 1952' के तहत एक न्यायिक आयोग का गठन किया था। इस आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल ने की थी।

आयोग ने समस्त उपलब्ध साक्ष्यों की गहन समीक्षा की और 13 महीने की विस्तृत जाँच के बाद 1,400 पन्नों की रिपोर्ट 26 अप्रैल 2022 को राज्य सरकार को सौंप दी थी।

अनिल देशमुख ने 13 बार लिखे पत्र

रोहित पवार ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग खुद अनिल देशमुख भी बार-बार करते रहे हैं। उन्होंने 27 फरवरी 2024, 7 जुलाई 2024, 18 जुलाई 2024, 27 सितंबर 2024, 22 दिसंबर 2024, 15 जनवरी 2025, 30 मई 2025, 28 दिसंबर 2025, 15 फरवरी 2026, 27 मार्च 2026, 16 जून 2026, 31 जुलाई 2026 और 20 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री को कुल 13 पत्र लिखे हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्यपाल को भी दो बार पत्र लिखकर रिपोर्ट तुरंत जारी करने की विनती की थी।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

रोहित पवार का कहना है कि बार-बार माँग किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने चार साल से अधिक समय में भी यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी (एसपी) और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव पहले से चल रहा है। गौरतलब है कि जाँच आयोग की रिपोर्ट को जनता के सामने न लाना, लोकतांत्रिक पारदर्शिता के सिद्धांतों पर सवाल खड़े करता है।

रोहित पवार की माँग

विधायक रोहित पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस से आग्रह किया है कि चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता के सामने स्पष्ट सच्चाई आ सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रिपोर्ट दबाए रखने से जनहित को नुकसान होता है और लोकतांत्रिक जवाबदेही कमज़ोर होती है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री फडणवीस इस माँग पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं, और महाराष्ट्र सरकार इस संवेदनशील राजनीतिक मामले में पारदर्शिता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब इसे जारी करने की माँग करने वाले स्वयं आरोपी पक्ष से भी आ रहे हैं। राजनीतिक रूप से यह प्रकरण दर्शाता है कि जाँच आयोगों की रिपोर्टें अक्सर सत्तारूढ़ दलों के राजनीतिक हित-अहित की दृष्टि से दबाई या जारी की जाती हैं, न कि जन-पारदर्शिता के आधार पर। जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, न तो देशमुख की बेगुनाही साबित होती है और न ही दोष — और इस अनिश्चितता का लाभ किसे होता है, यह महाराष्ट्र की जनता के लिए विचारणीय है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट क्या है और यह किस मामले से संबंधित है?
चांदीवाल आयोग हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल की अध्यक्षता में 30 मार्च 2021 को गठित न्यायिक जाँच आयोग है। यह महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर कथित ₹100 करोड़ के घोटाले के आरोपों की जाँच के लिए बनाया गया था, और आयोग ने 1,400 पन्नों की रिपोर्ट 26 अप्रैल 2022 को राज्य सरकार को सौंपी थी।
रोहित पवार ने CM फडणवीस को पत्र क्यों लिखा?
रोहित पवार ने यह पत्र इसलिए लिखा क्योंकि चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट 2022 में सरकार को सौंपे जाने के बावजूद आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से माँग की है कि जनहित में इस रिपोर्ट को तुरंत जारी किया जाए।
अनिल देशमुख ने खुद रिपोर्ट जारी करने के लिए कितनी बार पत्र लिखे हैं?
रोहित पवार के पत्र के अनुसार, अनिल देशमुख ने स्वयं मुख्यमंत्री को 13 बार और राज्यपाल को 2 बार पत्र लिखकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। उनका पहला पत्र 27 फरवरी 2024 को और अंतिम 20 अगस्त 2026 को भेजा गया था।
महाराष्ट्र सरकार ने अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं जारी की?
राज्य सरकार ने रिपोर्ट न जारी करने के लिए अब तक कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। बार-बार माँग के बावजूद चार साल से अधिक समय बीत जाने पर विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर रिपोर्ट दबाए हुए है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
रोहित पवार के पत्र के बाद अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री फडणवीस इस माँग पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं। यदि सरकार फिर भी रिपोर्ट जारी नहीं करती, तो विपक्ष इसे विधानसभा या न्यायालय के माध्यम से उठाने पर विचार कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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