1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में नंबर-1, टॉप 100 में यूपी के 17 जिले; 1,24,167 संयंत्र स्थापित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में नंबर-1, टॉप 100 में यूपी के 17 जिले; 1,24,167 संयंत्र स्थापित

सारांश

रूफटॉप सोलर की राष्ट्रीय रेस में उत्तर प्रदेश सबसे आगे निकल गया है। लखनऊ 1,24,167 संयंत्रों के साथ देश में पहले नंबर पर है और यूपी के 17 जिले शीर्ष 100 में शामिल हैं — यह उपलब्धि दर्शाती है कि सब्सिडी और जागरूकता अभियान मिलकर सौर क्रांति को ज़मीन पर उतार रहे हैं।

मुख्य बातें

लखनऊ 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के साथ रूफटॉप सोलर स्थापना में देश में पहले स्थान पर है।
केंद्र सरकार की ताज़ा रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के 17 जिले राष्ट्रीय शीर्ष 100 में शामिल — किसी भी राज्य से सर्वाधिक।
वाराणसी 48,829 संयंत्रों के साथ 10वें और कानपुर 43,289 संयंत्रों के साथ 14वें स्थान पर।
देश के शीर्ष 15 जिलों में अकेले यूपी के तीन जिले — लखनऊ, वाराणसी, कानपुर — शामिल।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है, जिससे आम परिवारों की सहभागिता बढ़ी है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के साथ रूफटॉप सोलर स्थापना में पूरे देश में पहला स्थान बरकरार रखा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत जारी ताज़ा राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के 17 जिले देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल हुए हैं — जो किसी भी राज्य के लिए सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में प्रदेश की बड़ी छलाँग मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्र सरकार की ताज़ा सूची के अनुसार, लखनऊ 1,24,167 संयंत्रों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी ने 48,829 संयंत्रों के साथ देश में 10वाँ स्थान हासिल किया है। औद्योगिक नगर कानपुर 43,289 संयंत्रों के साथ 14वें स्थान पर पहुँचा है — इस प्रकार देश के शीर्ष 15 जिलों में अकेले यूपी के तीन जिले शामिल हैं।

शीर्ष 100 में शामिल अन्य जिलों का विवरण इस प्रकार है: बरेली 28,315 संयंत्रों के साथ 24वें, आगरा 26,375 के साथ 29वें, प्रयागराज 23,773 के साथ 37वें, झाँसी 18,354 के साथ 51वें, रायबरेली 17,532 के साथ 56वें, गोरखपुर 14,498 के साथ 70वें, सहारनपुर 13,821 के साथ 73वें, मुज़फ्फरनगर 13,464 के साथ 75वें, मेरठ 13,137 के साथ 78वें, बाराबंकी 13,126 के साथ 79वें, अलीगढ़ 12,925 के साथ 81वें, शाहजहाँपुर 12,158 के साथ 86वें, सीतापुर 12,008 के साथ 88वें और उन्नाव 11,779 संयंत्रों के साथ 90वें स्थान पर है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपी नेडा) के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि लखनऊ में बड़ी संख्या में घरों और संस्थानों ने छत पर सोलर पैनल लगवाए हैं, जिसके चलते शहर ने देश में शीर्ष स्थान बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि वाराणसी में सोलर अभियान का असर साफ दिख रहा है और प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वहाँ लोगों में उत्साह विशेष रूप से अधिक है। सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि कानपुर जैसे औद्योगिक शहर का शीर्ष 15 में प्रवेश इस बात का संकेत है कि अब कारखाने और कारोबारी भी हरित ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं।

आम जनता पर असर

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी ने आम परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर को किफायती बनाया है। छत पर सोलर पैनल लगने से घरों का मासिक बिजली बिल घट रहा है और दिन में उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर परिवार अतिरिक्त आमदनी भी कर पा रहे हैं। इसके साथ ही सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है और वायु गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

सरकार की रणनीति

यूपी सरकार ने रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल किया गया है, डिस्कॉम और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर किया गया है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। जनजागरूकता अभियानों के ज़रिये ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सोलर अपनाने की दर में तेज़ी आई है।

क्या होगा आगे

अधिकारियों के अनुसार, जिस गति से उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, उससे आने वाले वर्षों में प्रदेश देश का सबसे बड़ा वितरित स्वच्छ ऊर्जा केंद्र बन सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिकाधिक घरों की छतों पर सोलर पैनल लगें ताकि परिवार बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हों और प्रदेश प्रदूषण मुक्त हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि संयंत्रों की संख्या और वास्तविक ऊर्जा उत्पादन में कितना अंतर है — क्योंकि स्थापना के आँकड़े और सक्रिय उत्पादन क्षमता अलग-अलग हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर ग्रिड कनेक्टिविटी और नेट मीटरिंग की धीमी प्रक्रिया कई राज्यों में रूफटॉप सोलर की व्यावहारिक उपयोगिता को सीमित कर रही है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर का शीर्ष 15 में प्रवेश उत्साहजनक है, परंतु यह देखना ज़रूरी होगा कि छोटे और मध्यम उद्योग वास्तव में ऊर्जा लागत में कितनी बचत कर पा रहे हैं। बिना पारदर्शी उत्पादन डेटा के, संयंत्र-संख्या की रैंकिंग नीतिगत सफलता का पर्याय नहीं मानी जा सकती।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है जिसके तहत आवासीय उपभोक्ताओं को छत पर सोलर पैनल लगवाने पर सब्सिडी दी जाती है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इस योजना का उद्देश्य देशभर में स्वच्छ और सस्ती बिजली की पहुँच बढ़ाना है।
रूफटॉप सोलर में लखनऊ देश में पहले नंबर पर क्यों है?
यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार, लखनऊ में बड़ी संख्या में घरों और संस्थानों ने सोलर पैनल अपनाए हैं और जनजागरूकता अभियानों तथा आसान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। इसी कारण लखनऊ 1,24,167 संयंत्रों के साथ राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर बना हुआ है।
टॉप 100 में यूपी के कौन-कौन से 17 जिले शामिल हैं?
लखनऊ (1वाँ), वाराणसी (10वाँ), कानपुर (14वाँ), बरेली (24वाँ), आगरा (29वाँ), प्रयागराज (37वाँ), झाँसी (51वाँ), रायबरेली (56वाँ), गोरखपुर (70वाँ), सहारनपुर (73वाँ), मुज़फ्फरनगर (75वाँ), मेरठ (78वाँ), बाराबंकी (79वाँ), अलीगढ़ (81वाँ), शाहजहाँपुर (86वाँ), सीतापुर (88वाँ) और उन्नाव (90वाँ) शामिल हैं।
रूफटॉप सोलर लगाने से आम परिवारों को क्या फायदा होता है?
छत पर सोलर पैनल लगाने से मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आती है और दिन में उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर परिवार अतिरिक्त आमदनी भी कर सकते हैं। इससे एक ओर घरेलू खर्च घटता है तो दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में कमी से पर्यावरण को भी लाभ होता है।
उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
यूपी सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया सरल की है, डिस्कॉम और एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर किया है और सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है। इसके अलावा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए गए हैं जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सोलर अपनाने की दर तेज़ी से बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले