क्या हिंदू आतंकवाद का झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का मुंह काला हुआ?: साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर

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क्या हिंदू आतंकवाद का झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का मुंह काला हुआ?: साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर

सारांश

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मालेगांव विस्फोट मामले में बरी होने के बाद अपने विचार साझा किए और कहा कि यह निर्णय सत्य और धर्म की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। जानिए, इस विवाद के पीछे की सच्चाई क्या है।

मुख्य बातें

भगवा आतंकवाद का झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का मुंह काला हुआ।
साध्वी प्रज्ञा ने राजनीतिक दबाव का सामना किया।
कांग्रेस नेताओं पर भी आरोप लगाए गए।
धर्म और सत्य हमेशा हमारे साथ हैं।

भोपाल, 3 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट से 31 जुलाई को बरी होने के बाद, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने रविवार को पहली बार भोपाल में अपने निवास पर कदम रखा। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर कहा कि यह भगवा की जीत है और हिंदू आतंकवाद का झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का मुंह काला हुआ है।

साध्वी प्रज्ञा ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में अपनी गिरफ्तारी और जांच के संदर्भ में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें जांच एजेंसियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए मजबूर किया गया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि, "हां, मुझे मजबूर किया गया था। मैं दबाव में नहीं आई और मैंने किसी का नाम नहीं लिया, किसी को झूठा नहीं फंसाया। इसलिए, मुझे अत्यधिक प्रताड़ना सहनी पड़ी।"

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में उन्हें 17 साल तक अपमान और यातना का सामना करना पड़ा, और यह फैसला उनके लिए सत्य की जीत है। कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक सशक्त जवाब है जिन्होंने 'भगवा आतंकवाद' या 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

प्रज्ञा ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने 'सनातन आतंकवाद' और 'हिंदुत्व आतंकवाद' जैसे शब्दों का उपयोग किया था।

उन्होंने सभी आरोपियों को एक ही श्रेणी में रखते हुए कहा कि इन लोगों ने हिंदुओं को बदनाम करने के लिए यह नैरेटिव तैयार किया। अंततः सत्य की जीत हुई है। धर्म और सत्य हमारे पक्ष में थे, इसलिए हमारी जीत सुनिश्चित थी। सत्यमेव जयते। मैंने यह पहले भी कहा था और अब यह सिद्ध हो गया है। विरोधियों का मुंह काला हुआ है। उन्हें सही जवाब मिल गया है। देश हमेशा धर्म और सत्य के साथ खड़ा रहा है और हमेशा रहेगा।

उन्होंने कोर्ट के फैसले को सत्य और धर्म की जीत करार दिया और उन लोगों पर हमला बोला जिन्होंने 'भगवा आतंकवाद' या 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का भी केंद्र बन गया है। हमें इस विवाद में निष्पक्षता से विचार करना चाहिए और सभी पक्षों की आवाज सुननी चाहिए।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कब बरी किया गया?
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 31 जुलाई 2023 को मालेगांव विस्फोट मामले में मुंबई की एनआईए कोर्ट से बरी किया गया।
साध्वी प्रज्ञा ने क्या आरोप लगाए?
साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि उन्हें जांच एजेंसियों द्वारा राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा और उन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम लेने के लिए मजबूर किया गया।
साध्वी प्रज्ञा का इस मामले में क्या कहना है?
उन्होंने इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि 'भगवा आतंकवाद' का झूठा नैरेटिव गढ़ने वालों का मुंह काला हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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