बिहार CM सम्राट चौधरी का मंत्रिमंडल विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, जातीय संतुलन और महिलाओं को मिली तरजीह
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 7 मई 2026 को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 32 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में पुराने मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को फिर से स्थान दिया गया, साथ ही कई नए चेहरों को भी मौका मिला। खास बात यह रही कि नए मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन और महिला प्रतिनिधित्व दोनों को प्राथमिकता दी गई।
गठबंधन दलों के बीच मंत्री पदों का बंटवारा
सत्तारूढ़ गठबंधन में मंत्री पदों का वितरण दलीय समीकरण के अनुसार किया गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कोटे से 15 नेताओं को मंत्री बनाया गया, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) के खाते में 13 मंत्री पद गए। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली, वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री शामिल किए गए।
महिला प्रतिनिधित्व: पाँच महिला मंत्रियों को मिली जगह
सम्राट कैबिनेट में पाँच महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है, जो इस विस्तार की उल्लेखनीय विशेषता है। इनमें सबसे अधिक तीन महिला मंत्री जदयू से हैं — लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता और शीला को मंत्री पद दिया गया। BJP की ओर से रमा निषाद और श्रेयसी सिंह को मंत्रिमंडल में स्थान मिला।
जातीय समीकरण: हर वर्ग को साधने की कोशिश
मंत्रिमंडल विस्तार में सभी प्रमुख जातीय वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। राजपूत समाज से सर्वाधिक चार नेताओं को जगह मिली — संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह और LJP(R) से संजय सिंह। इसके अलावा भूमिहार और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया।
बिहार के सबसे बड़े वोट बैंक माने जाने वाले अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को साधने पर विशेष जोर रहा। रमा निषाद, प्रमोद चंद्रवंशी, रामचंद्र प्रसाद, मदन सहनी, दामोदर रावत, बुलो मंडल और शीला मंडल को इस वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वैश्य समाज से दिलीप जायसवाल, केदार गुप्ता, अरुण शंकर प्रसाद और श्वेता गुप्ता को जगह मिली।
दलित, मुस्लिम और यादव समाज का प्रतिनिधित्व
दलित समुदाय से BJP और JDU ने लखेंद्र पासवान, नंद किशोर राम, सुनील कुमार, रत्नेश सदा और अशोक चौधरी को मंत्रिमंडल में जगह दी। LJP(R) से संजय पासवान और HAM पार्टी से संतोष कुमार सुमन भी दलित प्रतिनिधित्व का हिस्सा हैं। मुस्लिम समाज से जमा खान को एक बार फिर मंत्रिमंडल में स्थान मिला है, जबकि यादव समाज के प्रतिनिधि के रूप में रामकृपाल यादव कैबिनेट में शामिल हैं।
आगे क्या
यह मंत्रिमंडल विस्तार बिहार में आगामी चुनावी राजनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की यह कोशिश सम्राट चौधरी सरकार के लिए आने वाले समय में राजनीतिक परीक्षा का आधार बनेगी।