5 नवंबर 2026
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मौलाना साजिद रशीदी: सनातन धर्म में मुसलमानों से नफ़रत की शिक्षा नहीं, हिंदुत्व के नाम पर हो रही है राजनीति

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मौलाना साजिद रशीदी: सनातन धर्म में मुसलमानों से नफ़रत की शिक्षा नहीं, हिंदुत्व के नाम पर हो रही है राजनीति

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी ने साफ़ कहा — वेदों और सनातन धर्म में मुसलमानों से नफरत नहीं, लेकिन हिंदुत्व के नाम पर हो रही राजनीति समाज में दरार डाल रही है। साथ ही उन्होंने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत को संवैधानिक अधिकार बताया और बिना चार्जशीट लंबी कैद पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 5 नवंबर 2026 को कहा कि सनातन धर्म और वेदों में मुसलमानों से नफरत की कोई शिक्षा नहीं है।
उन्होंने सनातन धर्म और हिंदुत्व के नाम पर की जा रही राजनीति को दो अलग बातें बताया।
उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल न होने और सुनवाई शुरू न होने पर सवाल उठाए।
सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल करना संबंधितों का संवैधानिक अधिकार बताया।
मुसलमानों को किराया न देना, आतंकवादी कहना जैसी प्रवृत्तियों पर सरकार से सख्त लगाम लगाने की माँग की।

मौलाना साजिद रशीदी ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं तथा हिंदुत्व एवं सनातन धर्म पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म और हिंदुत्व के नाम पर की जा रही राजनीति दो अलग अलग बातें हैं और सनातन ग्रंथों में मुसलमानों से घृणा की कोई शिक्षा नहीं है।

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर रशीदी का रुख

दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल होने पर मौलाना रशीदी ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि संबंधित व्यक्ति जेल में हैं और अब तक उनके मामले की सुनवाई तक शुरू नहीं हुई। उनके अनुसार, अब तक चार्जशीट भी दाखिल नहीं हुई है।

मौलाना ने आरोप लगाया कि इन लोगों को चुनावी मुद्दा बनाने और राजनीतिक रूप से किसी को नीचा दिखाने के लिए जेल में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल करना संबंधित लोगों का संवैधानिक अधिकार है और इस पर किसी को सवाल उठाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

न्यायालय और सरकार से अपील

मौलाना रशीदी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करे। उन्होंने यह भी माँग की कि अदालत सरकार से पूछे कि आखिर किस कारण से अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी।

गौरतलब है कि यह मामला फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें दोनों आरोपी कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे लंबित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गति अक्सर नागरिक स्वतंत्रता के व्यापक प्रश्नों को जन्म देती है।

सनातन धर्म और हिंदुत्व में फ़र्क

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म पर टिप्पणियों के संदर्भ में मौलाना रशीदी ने कहा कि उन्होंने स्वयं सनातन धर्म और वेदों का अध्ययन किया है और उनमें मुसलमानों से नफरत करने की कोई शिक्षा नहीं मिलती। उनके अनुसार, देश का आम हिंदू अच्छा है और आपसी मेलजोल में विश्वास रखता है।

उन्होंने कहा, "सनातन धर्म और आज कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों के नाम पर की जा रही राजनीति बिल्कुल अलग अलग बातें हैं।" उन्होंने चेताया कि मुसलमानों को दुकान या मकान किराए पर न देना, उन्हें विधर्मी या आतंकवादी बताना और रेहड़ी पटरी वालों से खरीदारी से पहले आधार कार्ड देखने जैसी प्रवृत्तियाँ समाज में नफरत को बढ़ावा देती हैं।

मुसलमानों की पहचान और देश की छवि पर टिप्पणी

मौलाना रशीदी ने यह भी कहा कि देश में मुसलमानों को 'अब्दुल' जैसे नामों से पुकारकर उनकी पहचान को सीमित करने की कोशिश होती है। उनके अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की सफलता की चर्चा होनी चाहिए, न कि इस तरह की पहचान आधारित राजनीति।

उन्होंने सरकार से माँग की कि वह नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती से लगाम लगाए। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के बयान धार्मिक सद्भाव की दिशा में ज़रूरी संवाद को प्रोत्साहित करते हैं, जबकि कुछ वर्गों का मानना है कि इन मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने से समाधान और जटिल हो जाता है।

आगे की दिशा

मौलाना रशीदी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब धार्मिक पहचान, न्यायिक विलंब और नफरती भाषण को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। उमर खालिद और शरजील इमाम के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर सभी की नज़र टिकी रहेगी, और यह देखना होगा कि सरकार चार्जशीट को लेकर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या सिर्फ टेलीविज़न की बहसों में खप जाते हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम का मामला न्यायिक विलंब की उस प्रणालीगत समस्या को उजागर करता है, जो राजनीतिक रंग की परवाह किए बिना नागरिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। नफरती भाषण पर 'लगाम' की माँग तब तक अधूरी रहती है जब तक कानून का समान और पारदर्शी प्रयोग न हो — यही वह बिंदु है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने सनातन धर्म पर क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि उन्होंने सनातन धर्म और वेदों का स्वयं अध्ययन किया है और उनमें मुसलमानों से नफरत करने की कोई शिक्षा नहीं मिलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म और हिंदुत्व के नाम पर की जा रही राजनीति दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर रशीदी का क्या कहना है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल करना संबंधित लोगों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और सुनवाई शुरू नहीं हुई, तब तक लंबी हिरासत देश का दुर्भाग्य है।
दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में अब तक क्या हुआ है?
मौलाना रशीदी के अनुसार फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं।
मौलाना रशीदी ने समाज में नफरत बढ़ाने वाली किन गतिविधियों का ज़िक्र किया?
उन्होंने मुसलमानों को दुकान या मकान किराए पर न देने, उन्हें विधर्मी या आतंकवादी बताने और रेहड़ी पटरी वालों से खरीदारी से पहले आधार कार्ड देखने जैसी प्रवृत्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से इन गतिविधियों पर सख्त लगाम लगाने की माँग की।
दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म पर टिप्पणियों से यह विवाद क्यों जुड़ा?
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म पर टिप्पणियाँ कीं, जिसके बाद मौलाना रशीदी से प्रतिक्रिया माँगी गई। रशीदी ने सनातन और हिंदुत्व की राजनीति में फ़र्क करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रंथ आधारित धर्म और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियाँ एक नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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