शिवसेना सांसद संजय देशमुख ने परिवार संग PM मोदी से की मुलाकात, भेंट की विट्ठल-रुक्मिणी प्रतिमा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के यवतमाल-वाशिम सांसद संजय देशमुख ने 4 जुलाई 2025 को अपने पूरे परिवार के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात में देशमुख ने प्रधानमंत्री को पंढरपुर की भक्ति परंपरा के प्रतीक श्री विट्ठल-रुक्मिणी की एक पवित्र प्रतिमा उपहार में दी।
मुलाकात का विवरण और देशमुख की भावनाएँ
देशमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री के साथ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'परिवार के साथ भारत के सफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। इस अवसर पर उन्हें श्री विट्ठल-रुक्मिणी की एक पवित्र प्रतिमा भेंट की गई। पंढरपुर की भक्ति परंपरा और हमारी संस्कृति के प्रतीक इस प्रतिमा को भेंट करना विशेष आनंद का अनुभव था।'
उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भी मोदी एक ऐसे नेता हैं जो सहजता से आम लोगों से जुड़ते हैं और हमेशा सुलभ रहते हैं — यह तथ्य उन्हें विशेष रूप से सराहनीय लगा।
शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए, जिनमें संजय देशमुख का नाम भी शामिल है। देशमुख ने इस निर्णय को लेकर स्पष्ट किया था कि यह कदम विकास कार्यों के लिए धन की कमी की समस्या के चलते सामूहिक रूप से उठाया गया। उन्होंने कहा था, 'पार्टी छोड़ने वाला मैं अकेला नहीं हूँ; मेरे साथ 6 सांसदों ने यह निर्णय लिया।'
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ है और एकनाथ शिंदे गुट केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।
क्षेत्रीय विकास की प्रतिबद्धता
देशमुख ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि यवतमाल किसान आत्महत्याओं के लिए जाना जाने वाला जिला है, जबकि वाशिम एक आकांक्षी जिला है। उन्होंने वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेलवे परियोजना और शकुंतला ब्रॉड गेज रेलवे को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने कहा, 'जब हमने समर्थन किया है, तो विकास के लिए इस काम को पूरा करना हमारा कर्तव्य है।' यह बयान उनके दल-बदल के राजनीतिक औचित्य को क्षेत्रीय विकास से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी से परहेज़
देशमुख ने उद्धव ठाकरे के बारे में सीधी टिप्पणी करने से परहेज़ किया। उन्होंने कहा, 'मैं उद्धव ठाकरे के बारे में कुछ नहीं कहूँगा। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आएंगे, लोगों से मिलेंगे, अपनी भूमिका बताएंगे, और हम अपनी भूमिका बताएंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय संविधान और कानून के दायरे में लिया गया है।
आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर जनसंपर्क की प्रतिस्पर्धा तेज़ होने की संभावना है।