संजय निरुपम का पलटवार: 'हमारे साथियों की अपनी ताकत, 2029 तक खत्म होगी उद्धव की पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 22 जून को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे के उस बयान को सीधे खारिज किया, जिसमें आदित्य ने दावा किया था कि शिवसेना (यूबीटी) की टिकट से जीते नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव नहीं जीत सकते। निरुपम ने कहा कि उनके साथ आए सभी नेताओं का अपना स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व है और वे चुनावी मैदान में शिवसेना तथा BJP दोनों के समर्थन से उतरेंगे।
निरुपम का आदित्य ठाकरे को जवाब
निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जितने भी लोग हमारे साथ आए हैं, उन सभी की अपनी एक ताकत है। उनका अपना राजनीतिक अस्तित्व है।' उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जब ये नेता चुनाव में उतरेंगे, तो उन्हें शिवसेना और BJP दोनों का समर्थन मिलेगा। उन्होंने प्रतिद्वंद्वियों को परोक्ष रूप से संदेश देते हुए कहा कि ऐसे में किसी के लिए भी सपने देखना उचित नहीं होगा।
बाला साहेब के विचारों पर तीखा हमला
निरुपम ने उन नेताओं पर कड़ा प्रहार किया जिन्होंने, उनके अनुसार, बाला साहेब ठाकरे और हिंदुत्व की विचारधारा से मुँह मोड़ा। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने बाला साहेब ठाकरे और हिंदुत्व के विचारों को तिलांजलि दी, उनसे बड़ा गद्दार कौन हो सकता है? सबसे बड़े गद्दार तो ये लोग हैं।' यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से शिवसेना (यूबीटी) के नेतृत्व पर निशाना साधती है।
केंद्र सरकार की मदद और विकास का तर्क
निरुपम ने यह भी तर्क दिया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना किसी भी जनप्रतिनिधि का अधिकार और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर सांसद और विधायक अपने क्षेत्र में विकास चाहता है और यदि कोई सत्ता के करीब रहकर अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ अपने मतदाताओं तक पहुँचाना चाहता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
संजय राउत और उद्धव ठाकरे पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के मुखर नेता संजय राउत पर सीधा हमला करते हुए निरुपम ने उन्हें 'झूठे इंसान' करार दिया और कहा कि वे हमेशा भ्रामक प्रचार करते हैं। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता इसलिए पार्टी छोड़ रहे हैं क्योंकि उनका अपने नेता उद्धव ठाकरे पर से भरोसा उठ रहा है। निरुपम के अनुसार, 'उनका नेता निष्क्रिय हो चुका है। वो सिर्फ मातोश्री में बैठकर सरकार चलाना चाहता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पार्टी छोड़ने की प्रक्रिया में पैसे की कोई भूमिका नहीं है।
2029 तक उद्धव की पार्टी के खात्मे का दावा
निरुपम ने एक बड़ा राजनीतिक पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए कहा कि 2029 आते-आते उद्धव ठाकरे की पार्टी अस्तित्व में नहीं रहेगी। उनका कहना था कि पार्टी चलाने के तरीके से आम कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है और अंततः केवल संजय राउत और उद्धव ठाकरे ही पार्टी में बचेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच खींचतान जारी है और दलबदल की घटनाएँ लगातार सुर्खियों में हैं।