13 अगस्त 2026
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संजय राउत का अमित शाह को चुनौती: 'विपक्ष नहीं भागा, गृह मंत्री सदन में आकर दें जवाब'

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संजय राउत का अमित शाह को चुनौती: 'विपक्ष नहीं भागा, गृह मंत्री सदन में आकर दें जवाब'

सारांश

संसद के मानसून सत्र में गतिरोध के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सत्ता पक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर नीट लीक और छात्र आंदोलन पर जवाब देने की सीधी चुनौती दी।

मुख्य बातें

संजय राउत ने कहा — विपक्ष चर्चा से नहीं भागा; गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर जवाब देना चाहिए।
विपक्ष की माँग: नीट पेपर लीक और झारखंड-बिहार में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर संसद में बहस हो।
राउत ने मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का समर्थन किया; कहा यह नियम हर राज्य पर लागू होना चाहिए।
पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एसआईटी जाँच में आरोप सिद्ध होने पर राउत ने न्यायपालिका में व्यापक सुधार की जरूरत बताई।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने माँग की — यशवंत वर्मा को तत्काल गिरफ्तार कर आजीवन कारावास दिया जाए।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 13 अगस्त को स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद में चर्चा से नहीं भाग रहा, बल्कि गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में आकर नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच राउत की यह टिप्पणी सत्ता पक्ष के उस आरोप के सीधे जवाब में आई, जिसमें कहा गया था कि विपक्ष अपनी 'गलतियाँ छिपाने' के लिए सदन से बाहर है।

राउत का सत्ता पक्ष पर सीधा वार

राउत ने कहा, 'कोई भी चर्चा से भाग नहीं रहा है। अमित शाह सांसद और गृह मंत्री हैं, उन्हें अंदर आने से किसने रोका? उन्हें चर्चा के लिए अंदर आना चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस का इच्छुक है और झारखंड तथा बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के सवाल अनुत्तरित हैं।

गौरतलब है कि मानसून सत्र में नीट पेपर लीक विवाद ने संसद की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर सफाई नहीं देते, तब तक गतिरोध बना रहेगा।

मराठी भाषा अनिवार्यता पर राउत का रुख

राउत ने मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का समर्थन करते हुए कहा, 'आपको मराठी समझनी चाहिए। आप देश में कहीं भी जाएं — चाहे गुजरात, कर्नाटक, बिहार, हरियाणा या कोई अन्य राज्य हो — अगर आप ऐसे पेशे में हैं जिसमें ग्राहकों से बातचीत करनी पड़ती है, तो आपको स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 'अगर कोई मुंबई में ऑटो चलाता है तो उसे मराठी आनी चाहिए, जैसे बेंगलुरु में कन्नड़ और अहमदाबाद में गुजराती।'

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले पर प्रतिक्रिया

पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एसआईटी जाँच में आरोप सिद्ध होने पर राउत ने कहा, 'यह अच्छी बात है कि एसआईटी ने उनकी जाँच की और ठीक से पूछताछ की, हालांकि आज भी न्यायपालिका में ऐसे कई यशवंत वर्मा मौजूद हैं।' उनकी यह टिप्पणी न्यायिक जवाबदेही पर व्यापक सवाल उठाती है।

कांग्रेस नेता की माँग — कठोर कार्रवाई हो

लखनऊ से कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि अगर अपराध साबित हो गए हैं तो यशवंत वर्मा को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर दंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'बड़े लोग अगर इस तरीके से भ्रष्ट होंगे तो फिर छोटे क्या करेंगे। आज पूरा देश देख रहा है कि यशवंत वर्मा को कौन सी सजा मिलती है। वरना लोगों का न्यायपालिका से भी विश्वास उठ जाएगा।'

राजपूत ने यह भी कहा, 'अगर आम आदमी को भ्रष्टाचार के लिए दो साल की सजा होती है तो यशवंत वर्मा जैसे बड़े लोगों को भ्रष्टाचार के लिए आजीवन कारावास होना चाहिए।' यह माँग न्यायिक समानता की व्यापक बहस को और तीखा करती है।

आगे क्या

मानसून सत्र में गतिरोध जारी रहने की आशंका है जब तक सरकार और विपक्ष के बीच नीट, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बनती। विपक्ष का दबाव है कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में उपस्थित होकर जवाबदेही सुनिश्चित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक ठोस संवैधानिक सवाल है — जब गृह मंत्री स्वयं सांसद हैं, तो सदन में जवाबदेही से परहेज क्यों? नीट लीक पर संसद में बहस से बचना सरकार की उस छवि को नुकसान पहुँचाता है जो पारदर्शिता का दावा करती है। यशवंत वर्मा प्रकरण में 'न्यायपालिका में और भी ऐसे लोग हैं' वाली राउत की टिप्पणी महत्वपूर्ण है — यह व्यक्तिगत मामले को संस्थागत संकट की ओर ले जाती है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ध्यान नहीं देती। मराठी अनिवार्यता का समर्थन राउत की क्षेत्रीय राजनीति की जरूरत को दर्शाता है, लेकिन इसे राष्ट्रीय सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत करना भाषाई विविधता की जटिलता को सरल बना देता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने अमित शाह से सदन में जवाब देने की माँग क्यों की?
राउत ने कहा कि नीट पेपर लीक और झारखंड-बिहार में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर गृह मंत्री का सदन में उपस्थित होकर जवाब देना जरूरी है। उन्होंने सत्ता पक्ष के उस आरोप को खारिज किया कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
संसद के मानसून सत्र में गतिरोध किन मुद्दों पर है?
मानसून सत्र में नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। विपक्ष गृह मंत्री की सदन में उपस्थिति को गतिरोध समाप्त करने की शर्त बता रहा है।
पूर्व जज यशवंत वर्मा मामले में क्या हुआ है?
एसआईटी जाँच में पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए हैं। संजय राउत ने जाँच को सकारात्मक बताते हुए कहा कि न्यायपालिका में ऐसे और भी लोग हैं जिन पर नजर रखी जानी चाहिए।
राउत ने मराठी भाषा अनिवार्यता पर क्या कहा?
राउत ने मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखना जरूरी बताया और कहा कि यह सिद्धांत पूरे देश पर लागू होना चाहिए — जैसे बेंगलुरु में कन्नड़ और अहमदाबाद में गुजराती। उनके अनुसार ग्राहक-सेवा वाले पेशों में स्थानीय भाषा की जानकारी अनिवार्य होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने यशवंत वर्मा मामले पर क्या माँग की?
लखनऊ से कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने माँग की कि आरोप सिद्ध होने के बाद यशवंत वर्मा को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और आजीवन कारावास दिया जाए। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के लिए सजा आम नागरिक से कम नहीं, बल्कि अधिक कठोर होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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