13 जुलाई 2026
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मां वाग्देवी प्रतिमा वापसी: सावित्री ठाकुर ने शेखावत से की मुलाकात, भोजशाला में पुनर्स्थापना की माँग

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मां वाग्देवी प्रतिमा वापसी: सावित्री ठाकुर ने शेखावत से की मुलाकात, भोजशाला में पुनर्स्थापना की माँग

सारांश

धार सांसद सावित्री ठाकुर ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री शेखावत से मिलकर लंदन संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भोजशाला में पुनर्स्थापित करने की माँग उठाई। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया और शेखावत ने जून में धार दौरे पर सहमति जताई।

मुख्य बातें

सावित्री ठाकुर ने 28 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की।
लंदन संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को धार की भोजशाला में पुनर्स्थापित करने की माँग रखी गई।
केंद्र सरकार ने सांस्कृतिक विरासत वापसी के प्रयासों का आश्वासन दिया; मंत्री शेखावत जून 2026 में धार का दौरा करेंगे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है; केंद्र-राज्य समन्वय जारी है।
सावित्री ठाकुर ने भोजशाला में एक भव्य सांस्कृतिक परिसर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा।

केंद्रीय मंत्री एवं धार सांसद सावित्री ठाकुर ने 28 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से औपचारिक मुलाकात की और लंदन संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाकर मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में पुनर्स्थापित करने की माँग रखी। बैठक में केंद्र सरकार ने सांस्कृतिक विरासत की वापसी के प्रयासों का आश्वासन दिया और मंत्री शेखावत ने जून 2026 में धार का दौरा करने पर सहमति जताई।

मुख्य माँग और पृष्ठभूमि

सावित्री ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है। उनके शब्दों में, 'यह सिर्फ एक प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आस्था से जुड़ा बहुत बड़ा विषय है।' उन्होंने बताया कि 2014 से पहले भी इस मुद्दे पर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ और प्रयास हो चुके हैं, लेकिन अब इसे नए सिरे से गंभीरता के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय

सावित्री ठाकुर के अनुसार, इस विषय पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा हो चुकी है और राज्य सरकार भी इस दिशा में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इस सांस्कृतिक धरोहर को स्वदेश वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं। मंत्री शेखावत ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी के प्रति पूरी तरह गंभीर है।

भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व

सावित्री ठाकुर ने रेखांकित किया कि अदालती फैसलों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर भोजशाला को एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। उनका कहना है कि अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही उनका भोजशाला और उससे जुड़ी परंपराओं से गहरा नाता रहा है। इसी कारण मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी का मुद्दा लोगों की भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है।

भव्य सांस्कृतिक परिसर की परिकल्पना

सावित्री ठाकुर ने यह भी प्रस्ताव रखा कि यदि प्रतिमा वापस आती है, तो केवल उसकी पुनर्स्थापना पर्याप्त नहीं होगी — भोजशाला परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भारतीय संस्कृति को गहराई से समझ सकें। यह प्रस्ताव धार को एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।

आगे क्या होगा

मंत्री शेखावत का जून में प्रस्तावित धार दौरा इस मुद्दे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार विदेशों में रखी कई सांस्कृतिक और पुरातात्त्विक धरोहरों की वापसी के लिए राजनयिक प्रयास तेज़ कर रही है। मां वाग्देवी प्रतिमा की वापसी इस व्यापक सांस्कृतिक पुनरुद्धार अभियान की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस राजनयिक प्रगति अब तक सीमित रही है। शेखावत का जून में प्रस्तावित धार दौरा एक सकारात्मक संकेत है, पर असली परीक्षा यह होगी कि यह दौरा केवल प्रतीकात्मक इशारा बनकर रह जाता है या ब्रिटेन से ठोस राजनयिक वार्ता की दिशा में पहला कदम बनता है। भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों से सांस्कृतिक धरोहरें वापस मँगाई हैं, लेकिन ब्रिटिश संस्थाओं के साथ यह प्रक्रिया ऐतिहासिक रूप से जटिल और दीर्घकालिक रही है — यह संदर्भ इस माँग की व्यावहारिक चुनौतियों को रेखांकित करता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन में कैसे पहुँची?
मां वाग्देवी की प्रतिमा ऐतिहासिक रूप से धार की भोजशाला से संबंधित मानी जाती है और कथित तौर पर औपनिवेशिक काल में लंदन संग्रहालय में स्थानांतरित की गई थी। यह भारत की उन अनेक सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है जो विदेशी संग्रहालयों में संरक्षित हैं।
भोजशाला क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है, जिसे अदालती फैसलों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल माना जाता है। यह परिसर मां वाग्देवी (सरस्वती) की आराधना से जुड़ी परंपराओं का केंद्र रहा है।
केंद्र सरकार ने इस माँग पर क्या रुख अपनाया?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक में आश्वासन दिया कि सरकार भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी के प्रति पूरी तरह गंभीर है। साथ ही उन्होंने जून 2026 में धार का दौरा करने और भोजशाला से जुड़े मुद्दों को करीब से समझने पर सहमति जताई।
क्या राज्य सरकार भी इस प्रयास में शामिल है?
हाँ, सावित्री ठाकुर के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है और राज्य सरकार इस दिशा में सक्रिय है। केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इस सांस्कृतिक धरोहर को वापस लाने के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं।
प्रतिमा वापस आने पर क्या योजना है?
सावित्री ठाकुर ने प्रस्ताव रखा है कि प्रतिमा की पुनर्स्थापना के साथ-साथ भोजशाला में एक भव्य सांस्कृतिक परिसर भी विकसित किया जाए। इसका उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति से परिचित कराना है।
राष्ट्र प्रेस
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