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सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन को भेजा अवमानना नोटिस, 7 जुलाई को तलब

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सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन को भेजा अवमानना नोटिस, 7 जुलाई को तलब

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने एम्स नई दिल्ली के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन को अवमानना नोटिस जारी किया है — डीएनए रिपोर्ट मामले में 16 अप्रैल के आदेश का पालन न करने पर। 'कार्यवाहक पद' की दलील खारिज; 7 जुलाई को व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 5 जून 2026 को एम्स नई दिल्ली के कार्यवाहक निदेशक डॉ.
निखिल टंडन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया।
16 अप्रैल के आदेश में माँगे गए व्यक्तिगत स्पष्टीकरण के बजाय उप सचिव द्वारा हलफनामा दाखिल करने पर अदालत ने आपत्ति जताई।
पीठ ने 'कार्यवाहक निदेशक' की दलील खारिज की; कहा — पद चाहे स्थायी हो या अस्थायी, जिम्मेदारी समान है।
एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की डीएनए रिपोर्ट ने बिमल किशोर को संबंधित व्यक्ति का जैविक पिता पुष्टि किया।
टंडन को 7 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से सर्वोच्च न्यायालय में उपस्थित होना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 5 जून 2026 को एम्स नई दिल्ली के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। डीएनए जांच रिपोर्ट से जुड़े एक मामले में अदालत के 16 अप्रैल के आदेश का पालन न करने पर यह कार्यवाही शुरू की गई है। अदालत ने उन्हें 7 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

अदालत की नाराज़गी की वजह

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद एम्स निदेशक की ओर से व्यक्तिगत जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बजाय संस्थान के एक उप सचिव ने हलफनामा दाखिल कर दिया, जिसे पीठ ने अस्वीकार्य करार दिया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल के आदेश में साफ तौर पर निदेशक से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण माँगा गया था। किसी अन्य अधिकारी द्वारा उनकी ओर से जवाब दाखिल करना अदालत की मंशा के विरुद्ध है।

कार्यवाहक पद की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि संस्थान में फिलहाल स्थायी निदेशक का पद रिक्त है और डॉ. टंडन केवल कार्यवाहक क्षमता में दायित्व निभा रहे हैं। अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चाहे कोई अधिकारी स्थायी पद पर हो या कार्यवाहक रूप में — उसे अपने पद की पूरी जिम्मेदारी वहन करनी होगी।

पीठ ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कार्यवाहक निदेशक को संदेह का लाभ देने के पक्ष में नहीं है और प्रथमदृष्टया यह अवमानना का मामला बनता है।

डीएनए रिपोर्ट के निष्कर्ष

मामले के मूल विवाद पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की डीएनए रिपोर्ट पर विचार किया। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि संबंधित व्यक्ति का डीएनए प्रोफाइल बिमल किशोर और प्रतिभा कश्यप के डीएनए प्रोफाइल से मेल खाता है, जिससे यह स्थापित होता है कि बिमल किशोर उसके जैविक पिता हैं।

इस रिपोर्ट के आलोक में अदालत ने कहा कि उससे जुड़े लंबित आवेदनों पर अब अलग से निर्णय देने की आवश्यकता नहीं रही और उन्हें निस्तारित कर दिया गया।

आगे की कार्रवाई

सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट की प्रतियाँ सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। मूल रिपोर्ट याचिकाकर्ता के वकील को सौंपी जाएगी और उसे संबंधित उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा, ताकि वहाँ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।

मामला 7 जुलाई 2026 को केवल डॉ. निखिल टंडन की व्यक्तिगत उपस्थिति और अवमानना नोटिस पर उनके जवाब के लिए सूचीबद्ध रहेगा। यह मामला संस्थागत जवाबदेही और न्यायिक निर्देशों के पालन की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह संस्थागत जवाबदेही के लिए एक ज़रूरी संदेश है। एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में स्थायी निदेशक का पद रिक्त रहना और उसकी आड़ में अदालती आदेशों की अनदेखी — दोनों मिलकर प्रशासनिक शिथिलता की गहरी तस्वीर पेश करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम स्पष्ट करता है कि पद का अस्थायी स्वरूप, संवैधानिक दायित्वों से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के कार्यवाहक निदेशक को अवमानना नोटिस क्यों जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल के उस आदेश का पालन न होने पर यह नोटिस जारी किया जिसमें एम्स निदेशक से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण माँगा गया था। निदेशक की जगह एक उप सचिव ने हलफनामा दाखिल किया, जिसे अदालत ने अस्वीकार्य माना।
डॉ. निखिल टंडन को कब और कहाँ पेश होना है?
सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. निखिल टंडन को 7 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अवमानना नोटिस पर अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
इस मामले में डीएनए रिपोर्ट की क्या भूमिका है?
एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की डीएनए रिपोर्ट में पाया गया कि संबंधित व्यक्ति का डीएनए प्रोफाइल बिमल किशोर और प्रतिभा कश्यप से मेल खाता है, जिससे बिमल किशोर की जैविक पितृत्व पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने संबंधित लंबित आवेदन निस्तारित कर दिए।
क्या 'कार्यवाहक निदेशक' होने की दलील अदालत में मान्य हुई?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस दलील को स्पष्ट रूप से खारिज किया। पीठ ने कहा कि चाहे अधिकारी स्थायी पद पर हो या कार्यवाहक रूप में, उसे अपने पद की पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
7 जुलाई 2026 को मामला केवल डॉ. टंडन की व्यक्तिगत उपस्थिति और अवमानना नोटिस पर उनके जवाब के लिए सूचीबद्ध है। साथ ही, डीएनए रिपोर्ट की मूल प्रति याचिकाकर्ता के वकील को सौंपी जाएगी और संबंधित उच्च न्यायालय में आगे की कार्रवाई के लिए पेश की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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