शालीमार मस्जिद पर कार्रवाई गलत, दिल्ली सरकार यूपी की राह पर: मौलाना शहाबुद्दीन
सारांश
मुख्य बातें
बरेली में 23 सितंबर 2026 को मौलाना शहाबुद्दीन ने दिल्ली में शालीमार मस्जिद पर हुई कार्रवाई को गलत ठहराते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की आलोचना की और कहा कि दिल्ली सरकार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही है। उन्होंने सभी सरकारों से अपील की कि किसी भी धर्म के पूजा स्थलों पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए।
मुख्य बयान और आरोप
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि जहाँ लोग इबादत, पूजा-पाठ और नमाज अदा करते हैं, ऐसे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना तंग नज़रिए और पक्षपात की बुनियाद पर की जाने वाली कार्रवाई है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, कुछ दिन पहले सहारनपुर की एक मस्जिद गिराई गई थी और अब दिल्ली में शालीमार मस्जिद को निशाना बनाया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से ऐसी कार्रवाइयों से बचने की माँग करते हुए कहा कि इससे समाज में शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मोदी के नारे और सरकार की कार्रवाई में विरोधाभास
मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के नारे का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक तरफ यह संदेश दिया जाता है, जबकि मुख्यमंत्री की ओर से विश्वास तोड़ने वाली कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने चेताया कि इससे समाज को नुकसान होगा और समाज को नुकसान होने पर देश भी प्रभावित होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति सिर्फ मस्जिदों तक सीमित नहीं है — मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च — किसी भी इबादतगाह पर सरकारों को इस तरह की कार्रवाई से बचना चाहिए।
समाजवादी पार्टी से मुस्लिम प्रतिनिधित्व की माँग
मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुस्लिम आबादी के प्रतिशत के हिसाब से टिकट देने की माँग दोहराई। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 150 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहाँ मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है और इन सीटों पर मुसलमानों को उम्मीदवारी दी जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के दौर में भी सपा में मुस्लिम आबादी के अनुपात में टिकट नहीं दिए गए और उम्मीदवारी तय करने में इसका ध्यान नहीं रखा गया।
सपा पर परिवारवाद का आरोप
मौलाना ने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानी, ब्लॉक प्रमुख या जिला पंचायत जैसे स्थानीय पदों पर भी मुसलमानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता और पार्टी के परिवार के लोगों को ही प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने साफ कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में यह स्थिति नहीं चलेगी।
आगे क्या
मौलाना के यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई और उत्तर प्रदेश में मुस्लिम टिकट वितरण — दोनों मुद्दे आने वाले महीनों में और तीखे होने की संभावना है।