शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: नेमरा में CM हेमंत ने किया 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, ₹102.5 करोड़ की योजनाओं की सौगात
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार, 4 अगस्त को रामगढ़ जिले के पैतृक गांव नेमरा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और ₹102.5 करोड़ की विकास योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास भी किया।
प्रतिमा अनावरण और श्रद्धांजलि समारोह
नेमरा में आयोजित इस विशेष समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 फीट ऊंची शिबू सोरेन की प्रतिमा का अनावरण करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति का दिन है। मुख्यमंत्री ने कहा, "इसी दिन दिशोम गुरु ने अंतिम सांस ली थी और उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि नेमरा में स्थापित यह प्रतिमा नई पीढ़ी को झारखंड के इतिहास और संघर्षों से जोड़ने का माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, आज के युवाओं को यह जानना आवश्यक है कि आजादी के बाद भी इस क्षेत्र के लोगों ने किस तरह शोषण सहा और उनके पूर्वजों ने उसके विरुद्ध लंबा संघर्ष किया।
शिबू सोरेन की विरासत और योगदान
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना से लेकर अलग झारखंड राज्य के निर्माण तक, उनका संघर्ष आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज़ बना। हेमंत सोरेन ने कहा कि दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के अन्य वीर सपूतों के संघर्ष की बदौलत ही अलग झारखंड राज्य का सपना साकार हो सका।
गौरतलब है कि शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली स्तंभों में से एक रहे हैं। उनकी स्मृतियाँ और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री का भावुक संबोधन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उस समय विशेष रूप से भावुक हो गए, जब उन्होंने समारोह स्थल के समीप स्थित अपने दादा सोबरन मांझी की समाधि का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके दादा की हत्या असामाजिक तत्वों ने कर दी थी और उस समय उनका जन्म भी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में वैसी ताकतें मौजूद हैं, और ऐसी चुनौतियों का जवाब केवल आपसी एकता, भाईचारा और परस्पर सम्मान में निहित है।
मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन झारखंड की असली ताकत उसकी एकजुटता है।
विकास योजनाओं की सौगात
पुण्यतिथि समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ₹102.5 करोड़ की लागत वाली विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और विकास की प्रक्रिया में सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर ही राज्य का भविष्य मजबूत बनाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार आदिवासी अधिकारों और विकास के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है।