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क्या शिमला फर्जी डिग्री घोटाले में मां-बेटे को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया?

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क्या शिमला फर्जी डिग्री घोटाले में मां-बेटे को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया?

सारांश

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में मानव भारती विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री घोटाले में मां-बेटे को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। जानिए क्यों यह मामला इतना महत्वपूर्ण है और क्या है इसकी पूरी कहानी।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश में 387 करोड़ रुपए का फर्जी डिग्री घोटाला हुआ है।
मनदीप राणा और उसकी मां अशोनी कंवर को भगोड़ा घोषित किया गया।
ईडी ने 200 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।
दोनों आरोपी ऑस्ट्रेलिया भाग गए हैं।
यह मामला शिक्षा क्षेत्र में गंभीरता से देखा जा रहा है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में मानव भारती विश्वविद्यालय के 387 करोड़ रुपए के फर्जी डिग्री घोटाले में शामिल एक व्यक्ति और उसकी मां को शिमला की विशेष अदालत (पीएमएलए) ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है। दोनों पर ऑस्ट्रेलिया भाग जाने का आरोप है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने एक बयान में कहा कि ईडी के शिमला उप क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायालय ने शनिवार को मनदीप राणा और उसकी मां अशोनी कंवर को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया।

अधिकारी ने बताया कि ये दोनों कथित तौर पर मनदीप राणा के पिता राज कुमार राणा द्वारा किए गए फर्जी डिग्री घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) 2018 के प्रावधानों के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है।

ईडी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के धरमपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।

ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अशोनी कंवर और बेटे मनदीप राणा सहित अन्य सह-आरोपियों की मदद से एजेंटों/छात्रों से पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां बेचीं।

बयान में कहा गया है कि ये फर्जी डिग्रियां मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन के नाम पर बेची गईं और फर्जी डिग्रियों की बिक्री से प्राप्त अपराध की धनराशि 387 करोड़ रुपए आंकी गई है।

ईडी ने बताया कि इस अवैध गतिविधि से प्राप्त धन का उपयोग राज राजकुमार राणा, अशोनी कंवर और मनदीप राणा ने विभिन्न राज्यों में अपने नाम और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया।

संघीय जांच एजेंसी ने इस मामले में अब तक 200 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।

इससे पहले, ईडी ने हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में राज कुमार राणा, अशोनी कंवर, मनदीप राणा और अन्य सहित 14 व्यक्तियों और दो संस्थाओं के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत अभियोग शिकायत (पीसी) दायर की थी।

विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने 4 जनवरी, 2023 को आरोपपत्र का संज्ञान लिया और अशोनी कंवर और मनदीप राणा को समन जारी किया, जिसका उन्होंने पालन नहीं किया। बाद में, 4 नवंबर, 2023 को विशेष न्यायालय ने अशोनी कंवर और मनदीप राणा के खिलाफ अनिश्चितकालीन गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किए।

इसके अलावा, जांच के दौरान यह पता चला कि मानव भारती विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अशोनी कंवर और मनदीप राणा दोनों देश छोड़कर भाग गए थे और फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं।

दोनों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे कभी जांच में शामिल नहीं हुए। इसके अलावा, दोनों आरोपियों को भारत वापस लाकर मुकदमे का सामना कराने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन दोनों आरोपियों ने आपराधिक अभियोजन का सामना करने के लिए भारत लौटने से इनकार कर दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फर्जी डिग्री घोटाले का मुख्य आरोप क्या है?
मुख्य आरोप यह है कि मां-बेटे ने मानव भारती विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्रियां बेचकर 387 करोड़ रुपए की धनराशि जुटाई।
ईडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने इस मामले में 200 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है और मां-बेटे को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है।
क्या आरोपी ऑस्ट्रेलिया भाग गए हैं?
हां, दोनों आरोपी इस मामले में जांच में शामिल होने के लिए बुलाए जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया भाग गए हैं।
इस मामले में अदालत ने क्या निर्णय लिया?
विशेष न्यायालय ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अनिश्चितकालीन गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
फर्जी डिग्री घोटाले का प्रभाव क्या है?
इस घोटाले का प्रभाव शिक्षा के क्षेत्र में विश्वास को कमजोर करता है और युवा पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डालता है।
राष्ट्र प्रेस
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