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एक राष्ट्र एक चुनाव पर शिवराज सिंह चौहान का पलटवार, चिदंबरम के 'असंवैधानिक' दावे को नकारा

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एक राष्ट्र एक चुनाव पर शिवराज सिंह चौहान का पलटवार, चिदंबरम के 'असंवैधानिक' दावे को नकारा

सारांश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चिदंबरम के 'असंवैधानिक' दावे को नकारते हुए कहा कि 1952 से 1962 तक एक साथ चुनाव होते रहे और कांग्रेस की नीतियों ने ही इस व्यवस्था को तोड़ा। विधि आयोग, चुनाव आयोग और कोविंद समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रहित की अनिवार्यता बताया।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 अगस्त को पी.
चिदंबरम के 'असंवैधानिक' दावे को खारिज किया।
1952, 1957 और 1962 में लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे; कांग्रेस की नीतियों से यह व्यवस्था बाधित हुई।
विधि आयोग ने 1983 और 2018 में एक साथ चुनाव की सिफारिश की थी।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में तैयार रिपोर्ट एक राष्ट्र, एक चुनाव का समर्थन करती है।
प्रस्ताव के तहत पहले लोकसभा-विधानसभा चुनाव, फिर 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव।
चौहान के अनुसार निरंतर चुनावी चक्र से सरकारी खर्च बढ़ता है और विकास कार्य ठप होते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार, 26 अगस्त को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के उस बयान को सिरे से खारिज किया, जिसमें उन्होंने एक राष्ट्र, एक चुनाव को असंवैधानिक करार दिया था। चौहान ने कहा कि यह प्रस्ताव राष्ट्रहित में है और इस पर किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं।

ऐतिहासिक संदर्भ और संवैधानिक आधार

चौहान ने तर्क दिया कि एक राष्ट्र, एक चुनाव कोई नई अवधारणा नहीं है — 1952, 1957 और 1962 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ संपन्न हुए थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद कांग्रेस द्वारा राज्य सरकारों को अस्थिर करने के प्रयासों के चलते यह व्यवस्था बिगड़ी। विधि आयोग ने 1983 में और फिर 2018 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव आयोग स्वयं इस विचार का समर्थन कर चुका है।

कोविंद समिति की रिपोर्ट का हवाला

चौहान ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस विषय पर देशभर के विशेषज्ञों और चिंतकों से व्यापक विचार-विमर्श किया, जिसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार हुई जो एक राष्ट्र, एक चुनाव की अवधारणा को प्रतिपादित करती है। उन्होंने कहा, 'आखिर यह सब कुछ असंवैधानिक कहाँ से हो गया?'

बार-बार चुनाव से विकास कार्यों पर असर

मंत्री ने तर्क दिया कि देश में निरंतर चुनावी चक्र न केवल सरकारी खर्च बढ़ाता है, बल्कि आचार संहिता लागू होने के कारण विकास परियोजनाएँ भी ठप हो जाती हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी — सभी का समय और ऊर्जा चुनाव प्रबंधन में खप जाती है, जिससे शासन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि लोकलुभावन घोषणाएँ भी विकास को बाधित करने का काम करती हैं।

प्रस्तावित रूपरेखा

चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव के अनुसार पहले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हों और उसके बाद 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि इस पूरी रूपरेखा को धरातल पर उतारना समय की माँग है।

कांग्रेस पर तीखा प्रहार

चिदंबरम के 'जमीर' वाले बयान पर पलटवार करते हुए चौहान ने कहा, 'कांग्रेस का जमीर दूसरा विषय है, लेकिन राष्ट्रहित हमारे लिए सर्वोपरि है।' यह ऐसे समय में आया है जब संसद में एक राष्ट्र, एक चुनाव विधेयक पर बहस की तैयारी चल रही है और विपक्षी दल इसके विरोध में एकजुट हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह संदर्भ अधूरा है; उस दौर की संघीय संरचना और आज की बहुदलीय जटिलता में ज़मीन-आसमान का फर्क है। कोविंद समिति की रिपोर्ट व्यापक ज़रूर है, पर आलोचक यह पूछते हैं कि छोटे और क्षेत्रीय दलों की आवाज़ इसमें कितनी शामिल है। असली सवाल यह है कि जब संविधान संशोधन और राज्यों की सहमति दोनों अनिवार्य हैं, तो क्रियान्वयन की राजनीतिक व्यवहार्यता कितनी है — यह बहस अभी शुरू भी नहीं हुई है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक राष्ट्र, एक चुनाव क्या है?
एक राष्ट्र, एक चुनाव वह प्रस्ताव है जिसके तहत लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएँ। इसके बाद 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न करने का प्रावधान है।
शिवराज सिंह चौहान ने चिदंबरम के बयान पर क्या कहा?
चौहान ने चिदंबरम के 'असंवैधानिक' दावे को खारिज करते हुए कहा कि 1952, 1957 और 1962 में एक साथ चुनाव हो चुके हैं और विधि आयोग तथा चुनाव आयोग दोनों इसका समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसी की नीतियों ने यह व्यवस्था बिगाड़ी।
कोविंद समिति ने एक राष्ट्र, एक चुनाव पर क्या सिफारिश की?
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने देशभर के विशेषज्ञों से परामर्श के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जो एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा का समर्थन करती है।
बार-बार चुनाव होने से क्या नुकसान होता है?
चौहान के अनुसार निरंतर चुनावी चक्र से सरकारी खर्च बढ़ता है, आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य रुकते हैं और प्रशासनिक अधिकारी चुनाव प्रबंधन में व्यस्त हो जाते हैं। इससे शासन और विकास दोनों प्रभावित होते हैं।
क्या एक राष्ट्र, एक चुनाव संवैधानिक है?
इस पर मतभेद है। कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इसे असंवैधानिक मानते हैं, जबकि सरकार और कोविंद समिति का तर्क है कि यह संविधान संशोधन के ज़रिए संभव और वैध है। विधि आयोग ने 1983 और 2018 में इसे व्यवहार्य बताया था।
राष्ट्र प्रेस
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