एसआईआर पर बड़ा आरोप: आदित्य साहू बोले — हेमंत सोरेन बचा रहे हैं फर्जी वोटर

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एसआईआर पर बड़ा आरोप: आदित्य साहू बोले — हेमंत सोरेन बचा रहे हैं फर्जी वोटर

सारांश

भाजपा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने CM हेमंत सोरेन पर एसआईआर को लेकर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। 2019-24 में मतदाता वृद्धि दर 16.7%25 — राष्ट्रीय औसत 10.1%25 से कहीं अधिक। साहू बोले — असली चिंता फर्जी वोटरों को बचाना है।

Key Takeaways

  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 23 अप्रैल को CM हेमंत सोरेन पर एसआईआर के मुद्दे पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।
  • 2019 से 2024 के बीच झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 16.7%25 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 10.1%25 था।
  • 2014-19 के बीच झारखंड में मतदाता वृद्धि दर मात्र 6.2%25 थी, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम थी।
  • एसआईआर आजादी के बाद से 13 बार हो चुकी है, आखिरी बार 2004 में इसे लागू किया गया था।
  • साहू ने कहा कि बिहार और बंगाल में एसआईआर के बाद किसी पात्र नागरिक का नाम नहीं कटा, इसलिए विरोध बेबुनियाद है।
  • चुनाव आयोग की इस स्वायत्त प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दल की कोई भूमिका नहीं होती।

रांची, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर झारखंड के मतदाताओं को जानबूझकर भ्रमित कर रहे हैं। साहू का स्पष्ट आरोप है कि सोरेन गरीब, आदिवासी और मूलवासियों की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं, जबकि उनकी असली चिंता उन घुसपैठिए मतदाताओं को बचाना है जो उनके शासनकाल में फर्जी तरीके से मतदाता सूची में दर्ज हुए।

मुख्यमंत्री के बयान को बताया आधारहीन

आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन के उस बयान को पूरी तरह निराधार करार दिया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा एसआईआर के माध्यम से आदिवासियों और पिछड़े वर्गों को उनके मताधिकार, राशन और पेंशन से वंचित करना चाहती है। साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह बेचैनी और बौखलाहट इसलिए है क्योंकि एसआईआर की प्रक्रिया से फर्जी मतदाताओं का पर्दाफाश होना तय है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर कोई नई या असाधारण प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद से अब तक यह प्रक्रिया 13 बार अपनाई जा चुकी है और अंतिम बार वर्ष 2004 में इसे लागू किया गया था। यानी यह पूरी तरह एक संवैधानिक और नियमित चुनाव सुधार प्रक्रिया है।

कांग्रेस काल में कोई आपत्ति क्यों नहीं थी?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा सवाल उठाया कि जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के शासनकाल में इस प्रक्रिया पर कभी कोई विवाद नहीं हुआ, तो मोदी सरकार के दौरान इसे विवादास्पद बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और एसआईआर पूरी तरह उसका आंतरिक कार्य है — इसमें किसी भी राजनीतिक दल की कोई भूमिका या दखल नहीं होती।

साहू ने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति फर्जीवाड़े के जरिए सूची में शामिल न हो सके।

बिहार और बंगाल का उदाहरण

उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी एसआईआर को लेकर इसी तरह का भ्रामक प्रचार किया गया था, लेकिन वास्तविकता यह रही कि किसी भी वास्तविक और पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया। आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की घबराहट उन घुसपैठियों को लेकर है जिन्होंने उनके कार्यकाल में झारखंड की जनसांख्यिकीय संरचना (डेमोग्राफी) को बदल दिया है।

आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2014 से 2019 के बीच झारखंड में मतदाताओं की वृद्धि दर मात्र 6.2 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम थी। लेकिन 2019 से 2024 के बीच — यानी जब से हेमंत सोरेन सरकार सत्ता में आई — यह वृद्धि दर अचानक 16.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत केवल 10.1 प्रतिशत रहा।

साहू ने इस असामान्य उछाल को फर्जी मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने का ठोस प्रमाण बताया। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड की सीमावर्ती स्थिति और जनसंख्या वृद्धि के सामान्य पैटर्न को देखते हुए इतनी तेज वृद्धि दर स्वाभाविक नहीं मानी जा सकती।

गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर देशभर में विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार है। आने वाले हफ्तों में झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह राजनीतिक विवाद और गहरा होने की संभावना है।

Point of View

बल्कि यह राज्य की बदलती जनसांख्यिकी और सीमावर्ती घुसपैठ की उस बड़ी बहस का हिस्सा है जो वर्षों से दबी हुई थी। 2019-24 के बीच मतदाता वृद्धि का राष्ट्रीय औसत से साढ़े छह प्रतिशत अधिक होना महज संयोग नहीं हो सकता — यह डेटा एक गंभीर जांच की मांग करता है। विडंबना यह है कि जो दल आदिवासी अधिकारों की सबसे ऊंची आवाज उठाता है, वही उस प्रक्रिया का विरोध कर रहा है जो वास्तविक आदिवासी मतदाताओं के वोट की ताकत को पतला होने से बचा सकती है। मुख्यधारा की मीडिया इस डेटा एंगल को अक्सर नजरअंदाज करती है — राष्ट्र प्रेस इसे सामने लाता है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या होता है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाने की एक संवैधानिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना है। आजादी के बाद से यह प्रक्रिया 13 बार अपनाई जा चुकी है।
हेमंत सोरेन एसआईआर का विरोध क्यों कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि एसआईआर से आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के मताधिकार, राशन और पेंशन पर खतरा है। हालांकि भाजपा का आरोप है कि यह विरोध फर्जी मतदाताओं को बचाने के लिए किया जा रहा है।
झारखंड में मतदाता वृद्धि दर इतनी अधिक क्यों रही?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के अनुसार 2019 से 2024 के बीच झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 16.7%25 रही, जो राष्ट्रीय औसत 10.1%25 से काफी अधिक है। साहू इसे फर्जी मतदाताओं के पंजीकरण का प्रमाण मानते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका है।
क्या एसआईआर से वास्तविक नागरिकों के नाम कटते हैं?
भाजपा का दावा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद किसी भी वास्तविक और पात्र नागरिक का नाम सूची से नहीं हटाया गया। चुनाव आयोग भी स्पष्ट कर चुका है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी है और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
आदित्य साहू कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
आदित्य साहू भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे राज्य में भाजपा के सर्वोच्च संगठनात्मक पद पर हैं और पार्टी की ओर से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
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