24 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक का 27 दिन का अनशन समाप्त, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर धरना जारी रहेगा

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सोनम वांगचुक का 27 दिन का अनशन समाप्त, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर धरना जारी रहेगा

सारांश

सोनम वांगचुक ने 27 दिन की भूख हड़ताल तोड़ी, लेकिन जंतर-मंतर का धरना खत्म नहीं हुआ। सीजेपी प्रवक्ता अशुतोष रांका का साफ संदेश — धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। जेपी नड्डा के साथ बैठक में फैसले का इंतजार।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 27 दिनों की भूख हड़ताल 24 जुलाई को समाप्त की।
सरकार के साथ बातचीत में दो मांगें मानी गईं — प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं और प्रभावितों को पर्याप्त मुआवजा ।
मुआवजे का लिखित विवरण अभी बाकी है।
जंतर-मंतर पर धरना जारी रहेगा — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक।
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे सीसीआई में बैठक प्रस्तावित; केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के भी शामिल होने की संभावना।

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 27 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, लेकिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा धरना प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। 24 जुलाई को सीजेपी प्रवक्ता अशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि अनशन की समाप्ति आंदोलन की समाप्ति नहीं है।

अनशन क्यों खत्म हुआ

अशुतोष रांका के अनुसार, सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसके चलते उन्हें और उनके समर्थकों को भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील करनी पड़ी। रांका ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत में आंदोलन से जुड़ी दो प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है — प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा।

हालांकि रांका ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजे और अन्य फैसलों से जुड़ा लिखित विवरण अभी आना बाकी है, जिससे इन वादों की पुष्टि होनी शेष है।

धरना जारी रहने की वजह

सीजेपी प्रवक्ता रांका ने कहा कि इस आंदोलन की शुरुआत से ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे प्रमुख माँग रही है। उन्होंने कहा, 'जब तक यह माँग पूरी नहीं होती, प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे।' छात्रों और आंदोलनकारियों के मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की माँग जारी रहेगी।

जेपी नड्डा के साथ बैठक प्रस्तावित

रांका ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे सीसीआई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ एक बैठक प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के भी शामिल होने की संभावना है। बैठक में हुई चर्चा की जानकारी बाद में सार्वजनिक की जाएगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब आंदोलन को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। अब नजरें जेपी नड्डा के साथ होने वाली बैठक के नतीजों पर टिकी हैं — यह बैठक तय करेगी कि आंदोलन का अगला चरण किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आंदोलन की असली परीक्षा अब शुरू होती है। सरकार ने दो मांगें मानने की बात कही है, परंतु लिखित विवरण के बिना ये वादे महज आश्वासन हैं। जेपी नड्डा के साथ बैठक का परिणाम तय करेगा कि सरकार इस आंदोलन को वार्ता से सुलझाना चाहती है या टालना — और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर कोई भी रियायत राजनीतिक रूप से संवेदनशील होगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल क्यों खत्म की?
सोनम वांगचुक ने 27 दिनों की भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य कारणों से अनशन समाप्त किया। सीजेपी प्रवक्ता अशुतोष रांका के अनुसार, उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और सरकार के साथ बातचीत में दो प्रमुख मांगों पर सहमति भी बनी।
जंतर-मंतर पर धरना अभी भी क्यों जारी है?
आंदोलन की प्रमुख माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, जो अभी तक पूरी नहीं हुई। सीजेपी प्रवक्ता अशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह माँग नहीं मानी जाती, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।
सरकार ने आंदोलनकारियों की कौन-सी मांगें मानी हैं?
अशुतोष रांका के अनुसार, सरकार ने दो मांगों पर सहमति जताई है — प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं और प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा। हालांकि मुआवजे का लिखित विवरण अभी आना बाकी है।
जेपी नड्डा के साथ बैठक में क्या होगा?
शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे सीसीआई में BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के भी शामिल होने की संभावना है। बैठक के नतीजे बाद में सार्वजनिक किए जाएंगे।
इस आंदोलन से छात्रों और आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों और प्रभावित समुदायों की जवाबदेही की माँग को लेकर है। सरकार से मुआवजे और कानूनी संरक्षण की माँग मानी गई है, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की केंद्रीय माँग अभी अनसुलझी है।
राष्ट्र प्रेस
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