26 जुलाई 2026
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सोनिया गांधी से ममता बनर्जी की दूसरी मुलाकात, 24 घंटे में इंडिया गठबंधन एकता पर मंथन

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सोनिया गांधी से ममता बनर्जी की दूसरी मुलाकात, 24 घंटे में इंडिया गठबंधन एकता पर मंथन

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद दिल्ली पहुँचीं ममता बनर्जी ने 24 घंटे में दूसरी बार सोनिया गांधी से मुलाकात की। TMC के भीतर असंतोष और कुछ सांसदों के NDA की ओर झुकाव के बीच यह भेंट विपक्षी एकजुटता की कोशिश का संकेत मानी जा रही है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 9 जून को 10 जनपथ पर सोनिया गांधी से करीब एक घंटे तक मुलाकात की — 24 घंटे में दूसरी भेंट।
इससे पहले सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में दोनों नेत्रियों ने एक-दूसरे को गले लगाया था।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के कुछ सांसदों ने NDA को समर्थन देने की घोषणा की है।
ममता ने इंडिया गठबंधन बैठक में चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर सवाल उठाए और विपक्षी एकता की अपील की।
दिल्ली दौरे में ममता ने अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की।

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी मंगलवार, 9 जून को 10 जनपथ पर फिर आमने-सामने बैठीं — और यह मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी। 24 घंटे के भीतर दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक थी, जो विपक्षी एकजुटता को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह ममता का पहला दिल्ली दौरा है।

मुलाकात का क्रम और संदर्भ

इससे पहले सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में दोनों नेत्रियों की मुलाकात हुई थी, जहाँ उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया — एक ऐसा दृश्य जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने सुलह के संकेत के रूप में देखा। मंगलवार को 10 जनपथ पर हुई बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस दिल्ली दौरे में ममता ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की, इसके बाद सोनिया गांधी से भेंट की।

इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता का रुख

सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि आने वाले समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी एकता अनिवार्य है।

TMC का राजनीतिक संकट

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब तृणमूल कांग्रेस गंभीर आंतरिक दबाव का सामना कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। पहले कुछ विधायकों की नाराज़गी की बात उठी, और अब पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की घोषणा ने नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गौरतलब है कि यह वही दल है जो एक समय पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपराजेय माना जाता था।

TMC-कांग्रेस संबंधों का उतार-चढ़ाव भरा इतिहास

ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास जटिल रहा है। 1998 में ममता ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। 2011 में दोनों दलों ने मिलकर वाम मोर्चे की दशकों पुरानी सरकार को सत्ता से बाहर किया, लेकिन इसके बाद रिश्तों में खटास आई और कांग्रेस के कई नेता व विधायक TMC में शामिल हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने का अवसर दिखाई दे रहा है।

आगे क्या

विपक्षी खेमे में यह सक्रियता आने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडिया गठबंधन की एकजुटता और TMC की आंतरिक स्थिरता — दोनों पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल संकट-प्रबंधन की एक और कड़ी है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात 9 जून को क्यों हुई?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी के पहले दिल्ली दौरे के दौरान यह मुलाकात हुई। इंडिया गठबंधन की बैठक के अगले दिन 10 जनपथ पर करीब एक घंटे तक दोनों नेत्रियों के बीच बातचीत हुई, जो विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में अहम मानी जा रही है।
TMC में इस समय क्या संकट चल रहा है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के कुछ विधायकों में असंतोष की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा पार्टी के कुछ सांसदों ने NDA को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।
इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने क्या कहा?
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी एकता जरूरी है।
TMC और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास कैसा रहा है?
1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर TMC की स्थापना की थी। 2011 में दोनों दलों ने मिलकर वाम मोर्चे को सत्ता से बाहर किया, लेकिन बाद में रिश्तों में खटास आई और कांग्रेस के कई नेता TMC में चले गए।
ममता बनर्जी ने दिल्ली में और किससे मुलाकात की?
सोनिया गांधी से मिलने से पहले ममता बनर्जी ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इस दौरे को विपक्षी राजनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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