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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली की मांग: नेशनल कॉन्फ्रेंस का दिल्ली में प्रदर्शन, PM मोदी से वादा निभाने की अपील

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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली की मांग: नेशनल कॉन्फ्रेंस का दिल्ली में प्रदर्शन, PM मोदी से वादा निभाने की अपील

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस का दिल्ली में यह प्रदर्शन महज़ एक राजनीतिक रैली नहीं — यह उस वादे की याद दिलाना है जो केंद्र ने अनुच्छेद 370 हटाते वक्त किया था। सरकार बने दो साल बाद भी स्टेटहुड बहाल न होना, जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में स्टेटहुड बहाली की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
राज्यसभा सांसद सज्जाद अहमद किचलू ने कहा कि सरकार बने दो साल बाद भी स्टेटहुड का वादा पूरा नहीं हुआ।
AAP विधायक मेहराज मलिक ने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए जनादेश की अनदेखी का आरोप लगाया।
NC प्रवक्ता ठाकुर यशु वर्धन सिंह ने कहा — 'यह प्रधानमंत्री का जनता से किया गया वादा था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ।' नेताओं ने चेतावनी दी कि स्टेटहुड बहाल होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने 20 जुलाई को नई दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग तेज कर दी। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाज़ी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू-कश्मीर की जनता से किए गए स्टेटहुड बहाली के वादे को पूरा करने की माँग कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार बने दो वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी यह आश्वासन कागज़ों पर ही सिमटा हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शन में जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता एवं राज्यसभा सांसद सज्जाद अहमद किचलू ने कहा, 'अगर जम्मू-कश्मीर में सब कुछ ठीक होता, तो वहाँ के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को दिल्ली की सड़कों पर उतरने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे साफ पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर के लोग कितने नाराज़ हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोगों के संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए है।

रोज़गार और महँगाई: असली दर्द

किचलू ने कहा, 'आज जम्मू-कश्मीर के सामने सबसे बड़े मुद्दे रोज़गार, बेरोज़गारी और महँगाई हैं। केंद्र सरकार ने कई बार स्टेटहुड बहाल करने का वादा किया था। हमने भी उस आश्वासन पर भरोसा किया था, लेकिन सरकार बने दो साल हो चुके हैं और अब तक यह वादा पूरा नहीं किया गया।' गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय केंद्र ने आतंकवाद के अंत, विकास और रोज़गार के नए अवसरों का आश्वासन दिया था।

आम आदमी पार्टी का समर्थन

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं और जनादेश की अनदेखी की जा रही है। मलिक ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर का हर नागरिक राज्य का दर्जा वापस चाहता है। लोगों ने जिस उम्मीद के साथ मतदान किया था, उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। अनुच्छेद 370 हटाते समय कहा गया था कि इससे आतंकवाद खत्म होगा, विकास होगा और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। लेकिन आज भी लोगों को सुरक्षा, रोज़गार और विकास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।'

नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता की अपील

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अतिरिक्त प्रवक्ता ठाकुर यशु वर्धन सिंह ने केंद्र सरकार से वादा निभाने की अपील करते हुए कहा, 'हमें हमारा स्टेटहुड वापस चाहिए। यह प्रधानमंत्री का जनता से किया गया वादा था। आज तक वह पूरा नहीं हुआ है। इसी माँग को लेकर हम दिल्ली आए हैं। हम अपना संवैधानिक अधिकार और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा वापस चाहते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच अधिकारों के बँटवारे को लेकर तनाव की खबरें सामने आती रही हैं।

आगे क्या होगा

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टेटहुड का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आने वाले समय में और अधिक केंद्रीय बनता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

विकास और रोज़गार — उनकी सत्यापन-योग्य प्रगति रिपोर्ट आज भी सार्वजनिक नहीं है। चुनी हुई सरकार को पूर्ण अधिकार न देना लोकतांत्रिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह प्रदर्शन केवल एक पार्टी की राजनीति नहीं, बल्कि उस जनादेश की आवाज़ है जिसे संवैधानिक मान्यता का इंतज़ार है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली की माँग क्या है?
जम्मू-कश्मीर को 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई दल माँग कर रहे हैं कि इसे पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, जिससे निर्वाचित सरकार को पूर्ण संवैधानिक अधिकार मिल सकें।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में प्रदर्शन क्यों किया?
पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार ने स्टेटहुड बहाली का वादा किया था, लेकिन सरकार बने दो साल बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी माँग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए 20 जुलाई को नई दिल्ली में प्रदर्शन किया गया।
क्या AAP ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया?
हाँ, AAP विधायक मेहराज मलिक ने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए स्टेटहुड बहाल होना ज़रूरी है और लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में स्टेटहुड न मिलने से क्या समस्याएँ हैं?
नेताओं के अनुसार रोज़गार, बेरोज़गारी और महँगाई जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े मुद्दे हैं। केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा होने से निर्वाचित सरकार के अधिकार सीमित हैं, जिससे स्थानीय मुद्दों पर स्वायत्त निर्णय लेना कठिन होता है।
यह आंदोलन आगे कैसे बढ़ेगा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि स्टेटहुड बहाल होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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