सुभाष घई ने PM मोदी की तारीफ की, ब्रिक्स 2026 पर बोले — 'पॉजिटिव सोच ही इंसानियत को आगे ले जाती है'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्ममेकर सुभाष घई ने 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन से जुड़ी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि सकारात्मक सोच ही दुनिया से नकारात्मकता को मिटाकर इंसानियत को आगे बढ़ा सकती है। नई दिल्ली में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में शामिल विश्व नेताओं की तस्वीरों के साथ उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई।
क्या पोस्ट किया सुभाष घई ने
घई ने इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एकसाथ देखा जा सकता है। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा, 'केवल वही ऐसा कर सकते हैं। प्यार से प्यार पैदा होता है। मुस्कुराहट से पॉजिटिव एनर्जी बनती है।'
अपनी पोस्ट में उन्होंने आगे जोड़ा, 'हमारा इतिहास यह साबित करता है कि इस दुनिया से नेगेटिविटी को खत्म करके इंसानियत को आगे बढ़ाने का काम केवल पॉजिटिव सोच ही कर सकती है। आखिर हमें अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गर्व क्यों नहीं होना चाहिए, जब हर देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री उनका सम्मान करते हैं। हम उनसे प्यार करते हैं। ब्रिक्स 2026 की बधाई।'
ब्रिक्स 2026 — वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन इस समय वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में सबसे महत्त्वपूर्ण बहुपक्षीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के प्रमुख राष्ट्र वैश्विक कूटनीति, आर्थिक साझेदारी और सुरक्षा के नए समीकरण बनाने में जुटे हैं। भारत इस मंच पर एक अहम भूमिका निभा रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक सक्रियता की व्यापक चर्चा है।
सुभाष घई — हिंदी सिनेमा का एक स्तंभ
गौरतलब है कि सुभाष घई हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा फिल्ममेकरों में हैं जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक सरोकार, दमदार किरदार और भव्य कहानियों को बड़े पर्दे पर नई पहचान दी। उन्होंने अपने निर्देशकीय सफर की शुरुआत 1976 में फिल्म 'कालीचरण' से की थी।
'कालीचरण' की कामयाबी के बाद उन्होंने 'विश्वनाथ', 'गौतम गोविंदा', 'कर्ज', 'क्रोधी' और 'विधाता' जैसी फिल्मों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। 1983 में आई फिल्म 'हीरो' ने उनके करियर को एक और ऊँचाई दी। इसके बाद उन्होंने 'मेरी जंग', 'कर्मा', 'राम लखन', 'सौदागर', 'खलनायक', 'परदेस' और 'ताल' जैसी कालजयी फिल्में दीं।
आम जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
सुभाष घई की इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। जहाँ एक तरफ उनके समर्थकों ने सकारात्मक कूटनीति की भावना की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने एक फिल्मकार द्वारा राजनीतिक टिप्पणी पर भी सवाल उठाए। यह आगे देखने वाली बात होगी कि ब्रिक्स 2026 के नतीजे भारत की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाते हैं।