26 जुलाई 2026
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सुभाष यादव की साधु यादव को चेतावनी: 'अनर्गल बयानबाजी बंद करो, वरना खुलकर जवाब दूंगा'

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सुभाष यादव की साधु यादव को चेतावनी: 'अनर्गल बयानबाजी बंद करो, वरना खुलकर जवाब दूंगा'

सारांश

RJD परिवार में दरार एक बार फिर खुलकर सामने आई — पूर्व सांसद सुभाष यादव ने भाई साधु यादव को सार्वजनिक चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर बेबुनियाद बयानबाजी बंद करें। साथ ही विधान परिषद उम्मीदवारी पर भी नाराज़गी जताई, जो बिहार में RJD की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

पूर्व सांसद सुभाष यादव ने 9 जून 2026 को भाई साधु यादव को सार्वजनिक चेतावनी दी।
साधु यादव पर आरोप — सोशल मीडिया पर शहाबुद्दीन और सतीश पांडे का नाम लेकर छवि खराब करने की कोशिश।
सुभाष यादव ने RJD के विधान परिषद उम्मीदवार सुनील सिंह की उम्मीदवारी पर भी असंतोष जताया।
रोहिणी आचार्य सहित परिवार के कई सदस्य इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं।
सुभाष यादव ने कहा — 1986 से लालू यादव के साथ हैं, उनके आग्रह पर ही राजनीति में आए।

बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर पारिवारिक कलह एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई और पूर्व सांसद सुभाष यादव ने 9 जून 2026 को अपने भाई साधु यादव को सार्वजनिक चेतावनी दी कि यदि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी जारी रही, तो वे भी तथ्यों के साथ खुलकर जवाब देने को मजबूर होंगे। यह विवाद RJD परिवार के भीतर बढ़ते आंतरिक तनाव को उजागर करता है।

क्या है विवाद की जड़

सुभाष यादव ने कहा कि साधु यादव बचपन से ही उनके प्रति ईर्ष्या भाव रखते हैं। उनके अनुसार, 'जब मैं दो साल का था, तब भी उन्होंने मेरे साथ मारपीट की थी।' उन्होंने आरोप लगाया कि साधु यादव बार-बार उनका नाम विभिन्न लोगों के साथ जोड़कर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश करते हैं। सुभाष यादव ने कहा, 'अब उन्हें चेत जाना चाहिए, नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।'

शहाबुद्दीन और सतीश पांडे के नाम पर आपत्ति

सुभाष यादव ने कहा कि साधु यादव कभी दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम लेते हैं, कभी सतीश पांडे का — और इस तरह उनकी छवि से खिलवाड़ करते हैं। उन्होंने कहा, 'शहाबुद्दीन अब हमारे बीच नहीं हैं। मैं उन्हें नमन करता हूं। वे बहुत सज्जन और अच्छे व्यक्ति थे। उनके नाम का इस्तेमाल कर किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं है।' सतीश पांडे को लेकर भी उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य और गरीबों की सेवा में लगे हैं, ऐसे में उनका नाम अनावश्यक विवाद में घसीटना उचित नहीं।

RJD विधान परिषद उम्मीदवारी पर नाराज़गी

राजद द्वारा विधान परिषद चुनाव में सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी सुभाष यादव ने असंतोष जताया। उनका कहना था कि यह तेजस्वी यादव का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता और परिवार के कई सदस्य इससे खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस समय जब राजद सीमित सीटों पर सिमट रही है, किसी साधारण कार्यकर्ता को मौका देने से तेजस्वी की छवि मजबूत होती। उन्होंने दावा किया कि रोहिणी आचार्य सहित परिवार के कई लोग इस फैसले से नाराज हैं।

लालू यादव से पुराना जुड़ाव

सुभाष यादव ने लालू प्रसाद यादव के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, '1986 से ही हम लालू यादव के साथ रहे हैं। जब कोई व्यवस्था नहीं होती थी, तब हम उनके लिए खाना बनाते थे, लिट्टी-चोखा तैयार करते थे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में आने की उनकी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं थी — लालू यादव के आग्रह पर ही वे सार्वजनिक जीवन में आए।

आगे क्या होगा

सुभाष यादव ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विवाद को बढ़ाना नहीं है, लेकिन यदि व्यक्तिगत आरोप जारी रहे तो वे सार्वजनिक रूप से तथ्यों के साथ जवाब देंगे। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ और RJD का आंतरिक संगठन दोनों महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। पारिवारिक विखंडन पार्टी की एकजुटता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुभाष यादव ने साधु यादव को चेतावनी क्यों दी?
सुभाष यादव ने आरोप लगाया कि साधु यादव सोशल मीडिया पर उनका नाम विभिन्न विवादित व्यक्तियों से जोड़कर उनकी छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह बयानबाजी नहीं रुकी तो वे तथ्यों के साथ खुला जवाब देंगे।
RJD में विधान परिषद उम्मीदवारी को लेकर क्या विवाद है?
सुभाष यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव द्वारा सुनील सिंह को विधान परिषद उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी कार्यकर्ता और परिवार के कई सदस्य नाराज हैं। उनके अनुसार, किसी साधारण कार्यकर्ता को टिकट देने से तेजस्वी की छवि अधिक मज़बूत होती।
सुभाष यादव का लालू प्रसाद यादव से क्या संबंध है?
सुभाष यादव के अनुसार वे 1986 से लालू प्रसाद यादव के साथ जुड़े हैं और उनके आग्रह पर ही राजनीतिक जीवन में आए। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में वे लालू यादव के लिए खाना बनाने तक में सहयोग करते थे।
मोहम्मद शहाबुद्दीन के नाम पर सुभाष यादव ने क्या कहा?
सुभाष यादव ने कहा कि दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन अब हमारे बीच नहीं हैं और वे उन्हें नमन करते हैं। उनके नाम का इस्तेमाल कर किसी पर आरोप लगाना उन्होंने अनुचित बताया।
क्या यह विवाद RJD की एकता को प्रभावित कर सकता है?
सुभाष यादव के बयानों से संकेत मिलता है कि RJD परिवार और संगठन में आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है। रोहिणी आचार्य सहित कई सदस्यों की नाराज़गी और पारिवारिक कलह पार्टी की चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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