सुंदरबन में 1,600 एकड़ अवैध मछली फार्मों पर बड़ी कार्रवाई, नवंबर तक मैंग्रोव पुनर्रोपण का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुंदरबन क्षेत्र में मैंग्रोव वनों को नष्ट कर बनाए गए अवैध ब्रैकिश वाटर फिशरीज (खारे पानी के मछली पालन केंद्रों) के विरुद्ध व्यापक अभियान छेड़ा है। राज्य के वन विभाग ने 19 जुलाई 2026 को ऐसे सभी अवैध मछली फार्मों की पहचान, उन्हें बंद कराने और उन स्थलों पर पुनः मैंग्रोव रोपण के आदेश जारी किए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार ये फार्म करीब 1,600 एकड़ क्षेत्र में फैले हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य के नवनियुक्त वन मंत्री मनोज उरांव ने वन विभाग के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से निर्देश दिया है कि दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना जिलों में फैले सुंदरबन क्षेत्र में ऐसे सभी अवैध मछली पालन केंद्रों को चिह्नित किया जाए। इसके पश्चात पुलिस की सहायता से इन्हें बंद कराया जाए और जिन स्थानों पर मैंग्रोव काटकर ये फार्म स्थापित किए गए हैं, वहाँ दोबारा मैंग्रोव के पौधे लगाए जाएँ।
वन विभाग के प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार, इन अवैध फार्मों का अधिकांश हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन इलाके में केंद्रित है। पूरी प्रक्रिया — पहचान, बंदी और पुनर्रोपण — नवंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
वन मंत्री मनोज उरांव ने कहा, 'राज्य वन विभाग जिला प्रशासन के साथ मिलकर इन क्षेत्रों को उनकी मूल स्थिति में वापस लाने का काम करेगा, जहाँ फिर से मैंग्रोव के जंगल विकसित किए जाएँगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में वन विभाग और जिला प्रशासन पूरे क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखेंगे, ताकि मैंग्रोव को क्षति पहुँचाकर दोबारा अवैध फार्म या अन्य निर्माण न हो सके।
पर्यावरणविदों की राय
इस निर्णय का पर्यावरण विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि सुंदरबन के मैंग्रोव वन समुद्री तटीय क्षेत्रों को चक्रवात और महाचक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने वाली अपरिहार्य प्राकृतिक ढाल हैं। इसलिए इन वनों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पिछली कार्रवाइयाँ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के सत्ता संभालने के बाद से सुंदरबन क्षेत्र में पर्यटन स्थलों के आसपास अवैध निर्माणों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी माह की शुरुआत में दक्षिण 24 परगना जिले में मतला नदी के किनारे अवैध रूप से बने 'अरण्येर कुले' नामक कैफे को ध्वस्त किया गया। यह कैफे पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सौकत मोल्ला के पुत्र इमरान मोल्ला का बताया जा रहा है। यह प्रतिष्ठान दक्षिण 24 परगना के जीबंतला थाना क्षेत्र के मौखाली इलाके में स्थित था।
आगे क्या होगा
वन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त दल अब चिह्नित क्षेत्रों में सर्वेक्षण तेज करेंगे। नवंबर 2026 की समयसीमा को देखते हुए मानसून के बाद रोपण कार्य में तेजी आने की संभावना है। यह अभियान सुंदरबन के दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।