केंद्र सरकार पर सुप्रिया श्रीनेत का कड़ा हमला: अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ता खतरा
सारांश
Key Takeaways
- अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बढ़ रहा है।
- सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
- सरकार की विफलताओं को छुपाने की कोशिश हो रही है।
- आम जनता को सवाल पूछते रहने की आवश्यकता है।
- लोकतंत्र खतरे में है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय, 24 अकबर रोड पर एक प्रेस ब्रीफिंग में केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार हर क्षेत्र में विफल साबित हो रही है और अब अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला कर रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "केंद्र सरकार की खामी हर मोर्चे पर खुलकर सामने आ रही है—आर्थिक, कूटनीतिक, राजनीतिक और सामाजिक। अमेरिका के दबाव में देश की संप्रभुता खतरे में पड़ गई है। उनकी विफल विदेश नीति के कारण पाकिस्तान, रूस और चीन एकजुट हो गए हैं, लेकिन अब केवल विपक्ष नहीं, देश की आम जनता भी सवाल पूछ रही है। ये सवाल सोशल मीडिया पर उठ रहे हैं, इसलिए सरकार सोशल मीडिया पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कई 'एक्स' प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो सरकार की विफलताओं को उजागर करते थे। यूट्यूब चैनल्स को निलंबित किया गया है। नोएडा पुलिस ने गैस सप्लाई पर रिपोर्टिंग कर रहे यूट्यूबर को गिरफ्तार किया। इंस्टाग्राम, फेसबुक पर भी कई अकाउंट्स और रील्स को बैन या डिलीट किया गया है।
श्रीनेत ने आईटी एक्ट की धारा 69ए के दुरुपयोग का जिक्र करते हुए कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के दो मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दबाव डालकर कंटेंट को हटवा रहे हैं या अकाउंट्स को ब्लॉक कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अब कुछ बाबू यह तय करेंगे कि सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया जाएगा और क्या नहीं। यह संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आजादी पर एक बड़ा हमला है। रुपया 93.36 तक गिर गया, लेकिन कोई चर्चा नहीं। सारे सवाल सोशल मीडिया पर उठ रहे हैं, इसलिए सरकार डर
उन्होंने आगे कहा, "अगर 10 अकाउंट बंद हुए हैं, तो 10,000 नए बनेंगे। अभिव्यक्ति की आजादी किसी परोपकार में नहीं मिली।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये अकाउंट्स कांग्रेस के नहीं हैं, कुछ ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाए हैं, लेकिन गलत होने पर आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे सवाल पूछते रहें, क्योंकि लोकतंत्र खतरे में है।