22 अगस्त 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग का ₹5 करोड़ जुर्माना रद्द किया, यमुना बाढ़ क्षेत्र विवाद में बड़ा फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग का ₹5 करोड़ जुर्माना रद्द किया, यमुना बाढ़ क्षेत्र विवाद में बड़ा फैसला

सारांश

लगभग 10 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन का ₹5 करोड़ पर्यावरण जुर्माना रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यमुना के इको-सेंसिटिव जोन को नुकसान का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं, और DDA अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2026 को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और व्यक्ति विकास केंद्र पर लगाया गया ₹5 करोड़ का पर्यावरणीय जुर्माना रद्द किया।
जुर्माना मार्च 2016 में यमुना बाढ़ क्षेत्र में आयोजित 'विश्व संस्कृति महोत्सव' के दौरान कथित पर्यावरण क्षति के आधार पर NGT ने लगाया था।
कोर्ट ने पाया कि आयोजन से इको-सेंसिटिव जोन को नुकसान का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
DDA को निर्देश दिया गया कि जमा ₹5 करोड़ की राशि व्यक्ति विकास केंद्र को वापस लौटाए।
कोर्ट ने DDA को यमुना बाढ़ क्षेत्र पुनर्वास कार्य NGT दिशानिर्देशों के अनुसार जारी रखने का आदेश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2026 को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और उसके पंजीकृत ट्रस्ट व्यक्ति विकास केंद्र पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा लगाया गया ₹5 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा रद्द कर दिया। यह जुर्माना मार्च 2016 में नई दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र में आयोजित 'विश्व संस्कृति महोत्सव' के दौरान कथित पर्यावरणीय क्षति के आधार पर लगाया गया था। लगभग 10 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला संस्था के लिए निर्णायक राहत है।

मुख्य घटनाक्रम

शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिया कि वह व्यक्ति विकास केंद्र द्वारा पहले ही जमा की जा चुकी ₹5 करोड़ की राशि वापस लौटाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आर्ट ऑफ लिविंग के आयोजन से यमुना के इको-सेंसिटिव जोन को हुई क्षति का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है।

DDA की जिम्मेदारी पर कोर्ट की टिप्पणी

न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि DDA यमुना के इको-सेंसिटिव जोन की सुरक्षा की अपनी संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। साथ ही कोर्ट ने DDA को निर्देश दिया कि वह NGT के आदेशों के अनुरूप यमुना बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास (rehabilitation) का कार्य जारी रखे।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मार्च 2016 में श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने यमुना के बाढ़ मैदानों पर तीन दिवसीय 'विश्व संस्कृति महोत्सव' का आयोजन किया था। आलोचकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने आरोप लगाया था कि इस आयोजन से नदी के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँचा। इसके बाद NGT ने संस्था पर ₹5 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया, जिसे फाउंडेशन ने जमा भी किया। यह ऐसे समय में आया है जब यमुना के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण और आयोजनों पर नियामकीय सख्ती को लेकर बहस जारी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद DDA को अब जमा राशि वापस करनी होगी। यमुना बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास का कार्य NGT के दिशानिर्देशों के अंतर्गत जारी रहेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में इको-सेंसिटिव क्षेत्रों में आयोजनों की अनुमति और निगरानी से जुड़े कानूनी ढाँचे को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों से इस संवेदनशील क्षेत्र की अनदेखी करता आया है। विडंबना यह है कि जिस संस्था पर जुर्माना लगा, उसे राहत मिली, लेकिन जो नियामक एजेंसी वास्तव में जवाबदेह थी, उस पर कोई ठोस दंड नहीं। यमुना पुनर्वास की जिम्मेदारी फिर से DDA के कंधों पर डाल दी गई है — बिना किसी समयसीमा या जवाबदेही तंत्र के, जो इस पूरे मामले की सबसे बड़ी अनुत्तरित चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग का जुर्माना क्यों रद्द किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि यमुना के इको-सेंसिटिव जोन को 'विश्व संस्कृति महोत्सव' से हुई क्षति का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि DDA स्वयं इस क्षेत्र की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
आर्ट ऑफ लिविंग पर ₹5 करोड़ का जुर्माना कब और क्यों लगाया गया था?
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने मार्च 2016 में नई दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र में आयोजित 'विश्व संस्कृति महोत्सव' के दौरान पर्यावरण और जैव विविधता को कथित नुकसान के आधार पर यह जुर्माना लगाया था। फाउंडेशन ने यह राशि जमा भी कर दी थी।
व्यक्ति विकास केंद्र क्या है और इसका आर्ट ऑफ लिविंग से क्या संबंध है?
व्यक्ति विकास केंद्र, श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग संगठन का एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है। इसी ट्रस्ट ने NGT द्वारा लगाई गई ₹5 करोड़ की राशि जमा की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर DDA वापस करेगा।
DDA को सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
सर्वोच्च न्यायालय ने DDA को दो निर्देश दिए — पहला, व्यक्ति विकास केंद्र द्वारा जमा ₹5 करोड़ की राशि वापस लौटाई जाए; दूसरा, यमुना बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास का कार्य NGT के दिशानिर्देशों के अनुसार जारी रखा जाए।
'विश्व संस्कृति महोत्सव' विवाद का अब तक का सफर क्या रहा?
मार्च 2016 में आयोजन के बाद पर्यावरण क्षति के आरोपों पर NGT ने ₹5 करोड़ जुर्माना लगाया। फाउंडेशन ने राशि जमा कर मामला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लगभग 10 वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद शीर्ष अदालत ने अब जुर्माना रद्द कर राशि वापसी का आदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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