तवांग मठ दौरे पर केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी बोले — पूरे नॉर्थ ईस्ट को 'देवभूमि' कहा जाना चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यटन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने 30 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) के अवसर पर ऐतिहासिक तवांग मठ का दौरा किया और पूर्वोत्तर भारत को 'देवभूमि' की संज्ञा दी। उनके साथ मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा भी थे, जिन्होंने मठ की भव्यता की प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने मठ परिसर में पूजा-अर्चना की और बौद्ध धर्म की सांस्कृतिक विरासत को समझने का प्रयास किया।
मठ दौरे का आध्यात्मिक अनुभव
तवांग मठ के भीतर पहुँचने पर सुरेश गोपी ने अपना आध्यात्मिक अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, 'किसी मठ में जाता हूं, तो मुझे एक नया अनुभव मिलता है। यह एक ऐसा आध्यात्मिक जुड़ाव है, जो सीधे आपके दिल में उतर जाता है और हर बार आपकी आत्मा को शुद्ध कर देता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मंदिरों की तुलना में ऐसे पवित्र स्थलों की अनुभूति विशिष्ट होती है क्योंकि यहाँ 'स्वतः ही शुद्धि हो जाती है।'
गौरतलब है कि तवांग मठ एशिया के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक है और यह भारत-चीन सीमा के समीप स्थित है, जिससे इसका सामरिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्त्व है।
प्रकृति और आस्था पर राज्यमंत्री के विचार
सुरेश गोपी ने पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्म से जोड़ते हुए कहा, 'अगर हम ईश्वर को प्रकृति के तत्वों से जोड़कर देखें, तो हमें समझना होगा कि प्रकृति ही जीवन का आधार है।' उन्होंने चेतावनी दी कि विकास कार्यों से प्रकृति की मूल संरचना को नुकसान पहुँचता है, जिसके परिणामस्वरूप भूस्खलन जैसी आपदाएँ आती हैं।
यह बयान ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के कई राज्य पिछले कुछ वर्षों में मानसून-जनित भूस्खलन की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक केंद्रीय मंत्री का यह स्वीकारोक्ति-भरा बयान नीति-स्तर पर पर्यावरण संवेदनशीलता की ओर संकेत करता है।
पूर्वोत्तर को 'देवभूमि' घोषित करने की अपील
केंद्रीय राज्यमंत्री ने पूर्वोत्तर की तारीफ करते हुए कहा कि पूरे नॉर्थ ईस्ट को 'देवभूमि' की संज्ञा दी जानी चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र को प्रकृति और ईश्वर का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने देश के अन्य हिस्सों के लोगों से अपील की कि वे पूर्वोत्तर के निवासियों के बारे में किसी पूर्वाग्रह को छोड़कर वहाँ जाएं और उनके साथ समय बिताएं।
उन्होंने कहा, 'अगर आपने पहले इनके बारे में कुछ गलत बातें सुनी या पढ़ी हैं, तो एक बार नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ एक-दो दिन बिताकर देखिए। आप समझ जाएंगे कि वे कितने सच्चे और वफादार भारतीय हैं।' यह बयान 14वें ITM के व्यापक संदर्भ में पर्यटन को सामाजिक एकता के माध्यम के रूप में प्रस्तुत करता है।
मेघालय के मंत्री की प्रतिक्रिया
मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने तवांग मठ को 'बहुत बढ़िया और काफी प्रभावशाली' बताया। उन्होंने कहा कि लद्दाख और सिक्किम के मठों के दौरे के बाद तवांग मठ उन्हें विशेष रूप से देखना था। शिरा ने बताया कि मठ में 500 से अधिक भिक्षु रहते हैं और यह तवांग आने वाले पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है।
गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य के मंत्री की उपस्थिति पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग की बढ़ती भावना को भी दर्शाती है, जो 14वें ITM के मुख्य उद्देश्यों में से एक है।
14वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का महत्त्व
तवांग में आयोजित यह 14वाँ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट पूर्वोत्तर भारत के पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रमुख वार्षिक आयोजन है। इस आयोजन में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारें और निजी पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। सुरेश गोपी का तवांग दौरा पूर्वोत्तर पर्यटन को केंद्र सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करता है।