5 सितंबर 2026
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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: सीबीआई ने लखनऊ और बलिया से दो आरोपित गिरफ्तार, सात सदस्यीय SIT गठित

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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: सीबीआई ने लखनऊ और बलिया से दो आरोपित गिरफ्तार, सात सदस्यीय SIT गठित

सारांश

सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीबीआई ने यूपी से दो आरोपितों को दबोचा और सात सदस्यीय SIT गठित की। तीसरे आरोपित मोनू ने बलिया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। जांच का दायरा अब साजिश के पूरे नेटवर्क तक फैल रहा है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 5 जून 2026 को विकास मिश्रा को लखनऊ और गोलू सिंह को बलिया से गिरफ्तार किया।
दोनों पर 6 मई को चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है।
तीसरे आरोपित ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू ने बलिया की गैंगस्टर एक्ट अदालत में आत्मसमर्पण किया; 14 दिन की न्यायिक हिरासत मिली।
मोनू के खिलाफ पहले से 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सीबीआई ने दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम यूनिट के एक डीआईजी की अगुवाई में सात सदस्यीय SIT गठित की है।
दोनों गिरफ्तार आरोपितों को कानूनी प्रक्रिया के बाद कोलकाता की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 5 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बलिया से दो आरोपितों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपितों पर 6 मई को चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है।

गिरफ्तारी का विवरण

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, पहले आरोपित विकास मिश्रा को लखनऊ के अशोक मार्ग स्थित एक होटल से दबोचा गया। दूसरे आरोपित गोलू सिंह को बलिया से गिरफ्तार किया गया। दोनों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोलकाता की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

तीसरे आरोपित ने किया आत्मसमर्पण

इस मामले के एक अन्य आरोपित ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू ने गुरुवार को बलिया की गैंगस्टर एक्ट अदालत में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, मोनू एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

सीबीआई जांच और SIT गठन

हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच बंगाल पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने औपचारिक एफआईआर दर्ज कर जांच को तेज किया और दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम यूनिट के एक डीआईजी की अगुवाई में सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। यह SIT हत्या की पूरी साजिश, आरोपितों के नेटवर्क और घटना के पीछे की संभावित वजहों की गहन पड़ताल कर रही है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की जांच

गौरतलब है कि 6 मई को हुई इस हत्या ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी थी। घटना के बाद गंभीर रूप से घायल चंद्रनाथ रथ को तत्काल अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सीबीआई अब मामले से जुड़े अन्य संभावित आरोपितों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। सात सदस्यीय SIT का गठन इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। हालांकि, असली सवाल यह है कि बंगाल पुलिस से जांच क्यों ली गई और क्या राज्य सरकार ने शुरुआती जांच में पर्याप्त तत्परता दिखाई — यह पहलू अभी सार्वजनिक जवाबदेही से परे है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड क्या है?
चंद्रनाथ रथ पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक थे, जिनकी 6 मई 2026 को गोली मारकर हत्या कर दी गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
सीबीआई ने इस मामले में किसे और कहाँ से गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने विकास मिश्रा को लखनऊ के अशोक मार्ग स्थित एक होटल से और गोलू सिंह को बलिया से गिरफ्तार किया। दोनों पर चंद्रनाथ रथ की हत्या में शामिल होने का आरोप है।
मामले के तीसरे आरोपित मोनू का क्या हुआ?
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू ने बलिया की गैंगस्टर एक्ट अदालत में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और स्थानीय पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ पहले से 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सीबीआई ने इस मामले की जांच के लिए क्या व्यवस्था की है?
सीबीआई ने दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम यूनिट के एक डीआईजी की अगुवाई में सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। यह SIT हत्या की साजिश, आरोपितों के नेटवर्क और घटना के पीछे की वजहों की पड़ताल कर रही है।
इस मामले की जांच बंगाल पुलिस से सीबीआई को क्यों सौंपी गई?
हत्याकांड की गंभीरता और इसके राजनीतिक संवेदनशील स्वरूप को देखते हुए मामले की जांच बंगाल पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद औपचारिक एफआईआर दर्ज की और जांच को तेज कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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