29 जुलाई 2026
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अमरनाथ यात्रा 2026: जम्मू की सीमा पर टाली माता मंदिर में उमड़ी भीड़, जयकारों से गूंजा बॉर्डर

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अमरनाथ यात्रा 2026: जम्मू की सीमा पर टाली माता मंदिर में उमड़ी भीड़, जयकारों से गूंजा बॉर्डर

सारांश

अमरनाथ यात्रा का उत्साह अब सिर्फ बाबा बर्फानी तक सीमित नहीं — जम्मू की जीरो लाइन पर बसा टाली माता मंदिर भी श्रद्धालुओं से भर उठा है। बॉर्डर के उस पार तक सुनाई देते जयकारे और दशकों की अटूट आस्था इस मंदिर को एक अनोखा धार्मिक-राष्ट्रीय प्रतीक बनाती है।

मुख्य बातें

टाली माता मंदिर , जम्मू, भारत-पाकिस्तान की जीरो लाइन पर स्थित है और अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से भरा हुआ है।
29 जुलाई को मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं; जयकारों की गूंज सीमा पार तक सुनाई दी।
उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी नवीन शर्मा हर वर्ष यहाँ भंडारा आयोजित करते हैं।
श्रद्धालुओं के अनुसार, सीमा पर तनाव और गोलीबारी के दौरान भी मंदिर और आसपास के गाँवों को कभी कोई नुकसान नहीं हुआ।
फर्रुखाबाद और बरेली सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के साथ-साथ इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में चल रही अमरनाथ यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित टाली माता मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। 29 जुलाई को मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं और पूरा सीमावर्ती क्षेत्र माता के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने बताया कि बॉर्डर के इतने करीब होने के बावजूद यहाँ का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित है।

मंदिर की विशेषता और स्थान

मंदिर के पुजारी के अनुसार, टाली माता मंदिर भारत-पाकिस्तान की जीरो लाइन पर स्थित है। उन्होंने बताया कि यहाँ देश के कोने-कोने से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और माता रानी सभी की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं। उन्होंने कहा कि जब यहाँ जयकारे लगते हैं, तो उनकी गूंज पाकिस्तान के क्षेत्र तक पहुँचती है।

यह ऐसे समय में आया है जब अमरनाथ यात्रा पूरे जोश के साथ जारी है और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल रही है।

श्रद्धालुओं के अनुभव

उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी नवीन शर्मा ने बताया कि वे प्रतिवर्ष यहाँ भंडारा आयोजित करने आते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट होने के बावजूद यहाँ के हालात पूरी तरह सामान्य हैं। शर्मा ने यह भी कहा कि सीमा पर गोलीबारी के दौरान भी इस मंदिर और आसपास के गाँवों को कभी कोई नुकसान नहीं पहुँचा।

फर्रुखाबाद के निवासी राजीव गुप्ता ने बताया कि वे मूलतः बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जम्मू आए थे। वापसी के दौरान उन्हें टाली माता मंदिर के बारे में जानकारी मिली और वे यहाँ खिंचे चले आए। उन्होंने कहा कि यहाँ की मान्यता है कि दोनों देशों के बीच कितनी भी तनावपूर्ण स्थिति रही हो, इस मंदिर और समीपवर्ती गाँवों को कभी हानि नहीं हुई।

बरेली की एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वे अमरनाथ दर्शन के बाद जम्मू में रुकी थीं और चर्चा के दौरान इस मंदिर के बारे में सुनकर दर्शन के लिए आ गईं। उन्होंने कहा कि यह उनकी इस मंदिर की पहली यात्रा है।

आस्था और सांस्कृतिक महत्व

गौरतलब है कि टाली माता मंदिर सीमावर्ती क्षेत्र में आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि राष्ट्रीय भावना के प्रतीक के रूप में भी महत्व रखता है — जहाँ देवी के जयकारे सीमा पार तक गूंजते हैं।

अमरनाथ यात्रा से जुड़ाव

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। टाली माता मंदिर इसी श्रृंखला में एक प्रमुख पड़ाव बनता जा रहा है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य प्रांतों — से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। आने वाले दिनों में यात्रा सीजन के चरम पर पहुँचने के साथ मंदिर में भीड़ और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जनमानस में सामान्यता की भावना की वापसी का संकेत देता है। हालाँकि, सीमावर्ती मंदिरों में भारी भीड़ के मद्देनज़र सुरक्षा प्रबंधन की पर्याप्तता पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः चुप रहती है — यह एक पहलू है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाली माता मंदिर जम्मू कहाँ स्थित है?
टाली माता मंदिर जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर, जीरो लाइन के निकट स्थित है। मंदिर के पुजारी के अनुसार यह मंदिर बिल्कुल जीरो लाइन पर मौजूद है और यहाँ के जयकारे पाकिस्तान के क्षेत्र तक सुनाई देते हैं।
अमरनाथ यात्रा के दौरान टाली माता मंदिर में इतनी भीड़ क्यों आ रही है?
अमरनाथ यात्रा पर आए अनेक श्रद्धालु जम्मू में रुकते हैं और इस दौरान टाली माता मंदिर के दर्शन भी करते हैं। मंदिर की मान्यता है कि यहाँ माँगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, जिससे यह यात्रा सीजन में एक प्रमुख धार्मिक पड़ाव बन गया है।
क्या सीमा के इतने नजदीक होने के कारण यह मंदिर सुरक्षित है?
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों देशों के बीच तनाव और गोलीबारी के दौरान भी इस मंदिर और आसपास के गाँवों को कभी कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। श्रद्धालुओं ने बताया कि यहाँ का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित है।
टाली माता मंदिर में कौन-से राज्यों से श्रद्धालु आते हैं?
इस मंदिर में उत्तर प्रदेश के बदायूं, फर्रुखाबाद, बरेली सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। कई श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के साथ-साथ इस मंदिर के दर्शन को भी अपनी यात्रा का हिस्सा बनाते हैं।
टाली माता मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
यह मंदिर देवी दुर्गा (काली माता) को समर्पित है और सीमावर्ती क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से सिर झुकाने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है और मंदिर की दिव्य शक्ति इसे सभी परिस्थितियों में सुरक्षित रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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