अमरनाथ यात्रा 2025: छह दिन बाद बालटाल मार्ग से रवाना हुआ 18वां जत्था, श्रद्धालुओं में उत्साह
सारांश
मुख्य बातें
श्री अमरनाथ यात्रा शनिवार, 25 जुलाई को छह दिनों के अवरोध के बाद पुनः आरंभ हुई, जब 18वां जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से बालटाल मार्ग के जरिए रवाना हुआ। लगातार खराब मौसम और भारी वर्षा के कारण प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित किया था।
यात्रा क्यों रोकी गई थी
जम्मू-कश्मीर में लगातार छह दिनों तक हुई भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड एवं प्रशासन ने यात्रा को रोकने का निर्णय लिया। अधिकारियों के अनुसार यह कदम किसी भी अप्रिय घटना से बचने और तीर्थयात्रियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु भगवती नगर और अन्य पड़ावों पर यात्रा के फिर से शुरू होने की प्रतीक्षा करते रहे।
श्रद्धालुओं का जोश बरकरार
यात्रा के फिर से आरंभ होने पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। पहली बार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले एक श्रद्धालु ने कहा, 'मेरे दिमाग में बस यही है कि बाबा के दर्शन करने हैं। इसलिए हम लोग बारिश के समय में भी यहाँ दर्शन के लिए पहुँचे हैं।' उनके शब्दों में उस आस्था की झलक थी जो हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय कराती है।
तीसरी बार यात्रा पर आए एक अन्य श्रद्धालु ने बताया, 'मुझे तीसरी बार यहाँ आने का अवसर मिला है। मैं पहली बार 2023 में यहाँ आया था। अभी यहाँ श्रद्धालुओं के लिए अच्छी व्यवस्थाएँ हैं।'
दूर-दराज से पहुँचे तीर्थयात्री
मध्य प्रदेश के सागर जिले से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने इससे पहले 2002 में अपने गुरु के साथ यह यात्रा की थी। उन्होंने कहा, 'बारिश के दौरान हम प्रार्थना कर रहे थे कि यह रुकनी चाहिए, क्योंकि अमरनाथ यात्रा में कुछ दिन ही बाकी हैं।'
उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी विनेश कुमार साहू ने बताया कि उनका 7 लोगों का दल 19 जुलाई को जम्मू पहुँचा था और तब से यात्रा के पुनः आरंभ होने की प्रतीक्षा कर रहा था। उन्होंने कहा, 'सभी ने यहाँ यात्रा के दोबारा शुरू होने का इंतजार किया और भगवान शिव की कृपा से आज हम लोग यात्रा के लिए निकल रहे हैं।'
प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
अधिकारियों के अनुसार मौसम में सुधार की पुष्टि के बाद ही यात्रा को हरी झंडी दी गई। प्रशासन ने मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती, चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन राहत दलों की व्यवस्था सुनिश्चित की है। गौरतलब है कि पर्वतीय मार्गों पर मानसून के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रहता है, जिसे देखते हुए मौसम-आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाई जाती है।
आगे की यात्रा
यह ऐसे समय में आया है जब वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा के शेष दिन सीमित हैं और हज़ारों श्रद्धालु अभी भी बाबा बर्फानी के दर्शन की प्रतीक्षा में हैं। यात्रा के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन ने मौसम विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने का संकल्प जताया है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर निगरानी जारी रहेगी।